एनालॉग पनीर (Analog Paneer) पनीर जैसा दिखने वाला एक खाद्य उत्पाद है, जिसे पारंपरिक तरीके से दूध फाड़कर नहीं बनाया जाता. इसके बजाय इसे वनस्पति वसा (Vegetable Fat), दूध प्रोटीन, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य खाद्य सामग्री को मिलाकर तैयार किया जाता है. इसका उद्देश्य पनीर जैसी बनावट और उपयोग प्रदान करना होता है.
एनालॉग पनीर का उपयोग मुख्य रूप से खाद्य उद्योग, होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाओं और प्रोसेस्ड फूड बनाने वाली कंपनियों में किया जाता है. इसका इस्तेमाल पिज्जा, बर्गर, सैंडविच, रोल, फ्रोजन फूड और रेडी-टू-कुक उत्पादों में किया जा सकता है. इसकी बनावट और उपयोग उत्पाद बनाने वाली कंपनी के फॉर्मूले पर निर्भर करते हैं.
पारंपरिक पनीर केवल दूध से तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर के निर्माण में दूध के साथ या बिना दूध के भी विभिन्न खाद्य अवयवों का उपयोग किया जा सकता है. इसमें वनस्पति तेल, दूध प्रोटीन, स्टेबलाइजर, इमल्सीफायर और अन्य स्वीकृत खाद्य योजक (Food Additives) शामिल हो सकते हैं. इसका निर्माण खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार नियंत्रित परिस्थितियों में किया जाता है.
भारत में एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियम लागू होते हैं. यदि किसी उत्पाद में पारंपरिक पनीर के स्थान पर एनालॉग पनीर का उपयोग किया गया है, तो निर्माता के लिए लेबल पर इसकी सही जानकारी देना आवश्यक होता है, ताकि उपभोक्ता उत्पाद की प्रकृति को समझ सकें.
एनालॉग पनीर का उपयोग उन खाद्य उत्पादों में अधिक देखा जाता है, जहां बड़े पैमाने पर उत्पादन या लंबे समय तक भंडारण की आवश्यकता होती है. यह विभिन्न आकार, बनावट और उपयोग के अनुसार तैयार किया जा सकता है. अलग-अलग कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार इसकी संरचना में बदलाव भी करती हैं.
आज एनालॉग पनीर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का एक महत्वपूर्ण उत्पाद माना जाता है. हालांकि, किसी भी पैक्ड खाद्य पदार्थ को खरीदने से पहले उसका लेबल पढ़ना, सामग्री (Ingredients) की सूची देखना और यह समझना जरूरी है कि उत्पाद पारंपरिक पनीर है या एनालॉग पनीर. इससे उपभोक्ता अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार सही विकल्प चुन सकते हैं.
दिवाली से पहले UP के 38 जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई और नमकीन की दुकानों पर जांच की. कहीं मिठाइयों के पास चूहे मिले, तो कहीं पनीर में स्टार्च की मिलावट सामने आई. अभियान में 7,660 किलो खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई. वीडियो में जानें क्या है मामला.
FSSAI ने एनालॉग पनीर के नाम और प्रचार को लेकर नया ड्राफ्ट जारी किया है. इसमें दूध से न बने उत्पादों को पनीर नाम से बेचने और प्रचार करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है. इस ड्राफ्ट पर 60 दिनों तक सुझाव मांगे गए हैं. अगर यह नियम लागू होते हैं तो बाजार में मौजूद कई उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग में बदलाव आएगा.
Zomato ने अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स बेचने वाले रेस्तरां के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. कंपनी ने कहा है कि ऐसे उत्पाद तुरंत हटा दिए गए हैं और रेस्तरां को उनके प्लेटफॉर्म के जरिए केवल शुद्ध डेयरी उत्पाद ही बेचने होंगे.
महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी एनालॉग पनीर के भंडारण, बिक्री और सप्लाई पर रोक लगा दी गई है. हालांकि फिलहाल सिर्फ एक साल के लिए यह रोक लगाई गई है.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेस्तरां को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या आपने अपने मेन्यू कार्ड में बताया है और ग्राहकों को जानकारी दी है कि आप उन्हें एनालॉग पनीर खिला रहे हैं? अदालत ने कहा कि आपको कोई राहत नहीं दी जाएगी.
एनालॉग पनीर को लेकर NHRC ने FSSAI, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजा है. आयोग ने इसकी सुरक्षा, पोषण संरचना, नियामकीय स्थिति, जांच प्रक्रिया और स्वास्थ्य प्रभावों पर जवाब मांगा है. राज्यों से निर्माण, सप्लाई, बिक्री, निरीक्षण, सैंपल जांच, उल्लंघन और कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है.
गुजरात में एनालॉग पनीर, चीज और बटर पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. सरकार के इस फैसले का मकसद बाजार में बिक रहे नकली और मिलावटी डेयरी उत्पादों पर रोक लगाना है. सरकार के इस आदेश के बाद पूरे गुजरात में फूड विभाग और पुलिस का एक्शन भी शुरू हो गया. अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की जा रही है. देखें गुजरात आजतक.
फरवरी 2026 में किए गए आजतक के एक एक्सक्लूसिव स्टिंग ऑपरेशन में बाजार में बिक रहे नकली पनीर (एनालॉग पनीर) के काले कारोबार का पर्दाफाश हुआ है. नकली पनीर वनस्पति तेल, स्टार्च और केमिकल्स से बनता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है. यही वजह है कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात में एनालॉग पनीर को बैन कर दिया गया है.