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क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश में अतिक्रमण किया? इंडियन आर्मी बोली- गलत है ऐसी रिपोर्ट

अरुणाचल प्रदेश की नाह वेलफेयर सोसायटी ने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल दखल देने की अपील की, ताकि सीमावर्ती क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को रोका जा सके. संस्था का कहना है कि इन इलाकों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है.

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अरुणाचल में चीनी सेना के अतिक्रमण से इंडियन आर्मी का इनकार (File Photo: Reuters)
अरुणाचल में चीनी सेना के अतिक्रमण से इंडियन आर्मी का इनकार (File Photo: Reuters)

भारतीय सेना ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश में अतिक्रमण कर भारतीय इलाके के अंदर मिलिट्री कैंप बना लिए हैं. इंडियन आर्मी ने ऐसी रिपोर्ट्स को गलत और आधारहीन बताया.

भारतीय सेना का यह खंडन उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आया, जिनमें दावा किया गया था कि अरुणाचल प्रदेश के सामुदायिक संगठन नाह वेलफेयर सोसायटी (NWS)  ने स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन दिया था. इसमें कहा गया था चीनी सेना ने पिछले कई वर्षों के दौरान राज्य के बॉर्डर से सटे दूरस्थ इलाकों में धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी बढ़ा ली है.

भारतीय सेना ने कहा, 'हमने ऐसी मीडिया रिपोर्ट्स देखी है जिसमें दावा किया गया है कि चीनी आर्मी- PLA ने अरुणाचल प्रदेश में अतिक्रमण कर कैंप बना लिए हैं. इस तरह की रिपोर्ट्स गलत और आधारहीन है.'

नाह वेलफेयर सोसाइटी का क्या है दावा?
इंडिया टुडे नॉर्थ ईस्ट के मुताबिक,  नाह वेलफेयर सोसायटी (NWS) एक सामुदायिक संस्था है. संस्था ने डिप्टी कमिश्नर को एक ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने बॉर्डर के पास भारत के अंदर अपने शिविर बना लिए हैं.

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इस ज्ञापन में दावा किया कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान चीनी सैनिकों ने ताकसिंग सर्किल के सीमावर्ती क्षेत्रों पर धीरे-धीरे कब्जा कर मौजूदगी का विस्तार किया है. उन स्थानों पर, जिनका स्थानीय निवासी परंपरागत रूप से शिकार और पशुओं के चराने के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं, अब वहां सड़कें, पुल और सैन्य शिविर बन गए हैं.

इन पांच जगहों पर अतिक्रमण का जिक्र
NWS ने पांच स्थानों- ओयिंग, पनियार, मारपान (मारनाफे), पोटरंग झील और टिंडिंगतांग का जिक्र करते हुए कहा कि अब ये इलाके वर्ष 2020 से चीन के कब्जे में आ गए हैं. इनमें से कुछ स्थान ताकसिंग मुख्यालय के निकट स्थित हैं. स्थानीय समुदायों के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. संगठन ने दावों की पुष्टि के लिए कुछ तस्वीरें भी दीं.

संगठन ने अरुणाचल प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से तत्काल दखल देने की अपील की, ताकि सीमावर्ती क्षेत्र में चीन की आगे की गतिविधियों को रोका जा सके. ज्ञापन में भारतीय सेना की तारीफ की गई है. हालांकि यह भी कहा गया कि इन इलाकों की रक्षा के लिए  ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है. 

भारतीय सेना ने ये कहा
भारतीय सेना के ताजा बयान में ज्ञापन में लगाए गए आरोप पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है. हालांकि इंडियन आर्मी ने चीन की ओर से अतिक्रमण किए जाने और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अरुणाचल प्रदेश में शिविर स्थापित किए जाने संबंधी खबरों का स्पष्ट रूप से खंडन किया.

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ये आरोप उस समय सामने आए जब कुछ ही सप्ताह पहले भारत और चीन के बीच बॉर्डर से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए बीजिंग में मीटिंग हुई थी.

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