बिहार के सीवान जिले में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल के AK-47 से फायरिंग करने का मामला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है.नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए सीनियर पुलिस अधिकारियों और गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग की है. वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि कांस्टेबल ने बिना किसी आदेश के फायरिंग की थी और उसे निलंबित कर दिया गया है.
यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कांस्टेबल अभिषेक पटेल का AK-47 से फायरिंग करते हुए एक वीडियो सामने आया. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. इसके बाद विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और प्रदर्शन के दौरान हथियार के इस्तेमाल को लेकर आलोचना शुरू हो गई.
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने दावा किया कि देश में यह पहला मामला है, जब छात्रों के प्रदर्शन के दौरान AK-47 का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने इसे पुलिस मैनुअल का उल्लंघन बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भविष्य में वकीलों, डॉक्टरों, शिक्षकों, जजों, छात्रों, महिलाओं और किसानों के प्रदर्शन के दौरान भी इसी तरह बल प्रयोग किया जाएगा.
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
आरजेडी नेता ने कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी केवल फायरिंग करने वाले कांस्टेबल तक सीमित नहीं होनी चाहिए. उन्होंने जिले के एसपी और अन्य सीनियर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की. इसके साथ ही गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने की बात कही. तेजस्वी ने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए उन्हें 'Elected CM' की जगह 'Selected CM' कहा.
कांस्टेबल सस्पेंड, विभागीय कार्रवाई शुरू
विवाद बढ़ने के बाद सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फायरिंग में शामिल पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. सीवान के जिलाधिकारी विवेक रंजन ने कहा कि कांस्टेबल को फायरिंग करने का कोई आदेश नहीं दिया गया था और उसे हवा में भी गोली नहीं चलानी चाहिए थी. उन्होंने यह भी कहा कि कांस्टेबल को सार्वजनिक स्थान पर AK-47 लेकर नहीं रहना चाहिए था. जिलाधिकारी के मुताबिक, कांस्टेबल दूसरी जगह जा रहा था, लेकिन रास्ते में वह हंगामे के बीच फंस गया.
जिला प्रशासन का कहना है कि फायरिंग की अनुमति नहीं दी गई थी और कांस्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो चुकी है. वहीं, विपक्ष पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है.