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बेरोजगारी या महंगाई, देश की सबसे बड़ी समस्या क्या है? सर्वे में जनता ने दिया जवाब

इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में युवाओं और आम जनता की राजनीतिक व सामाजिक चिंताओं का व्यापक विश्लेषण किया गया है. सर्वे में बेरोजगारी को 23 फीसदी लोगों ने देश की सबसे बड़ी समस्या बताया है.

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सर्वे में बेरोजगारी को सबसे बड़ी समस्या बताया गया है
सर्वे में बेरोजगारी को सबसे बड़ी समस्या बताया गया है

इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में देश की बदलती राजनीतिक और सामाजिक बयार का बड़ा आकलन सामने आया है. हालिया 'Gen-Z' प्रोटेस्ट के बाद किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक सर्वे है, जिसमें युवाओं और आम जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश की गई है. इस सर्वे में देश के मूड को लेकर कई अहम सवाल पूछे गए हैं. सर्वे का फोकस मौजूदा हालात से लेकर आने वाले चुनाव तक के सवालों पर है.

23 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी को बताया बड़ी समस्या

इस सर्वे में बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आई है. सर्वे में 23 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी को मौजूदा समय में भारत की सबसे बड़ी समस्या बताया. वहीं, 18 फीसदी लोगों ने महंगाई को सबसे बड़ी चिंता माना, जिससे यह दूसरे स्थान पर रही. इसके अलावा 7 फीसदी लोगों ने किसान संकट को देश की सबसे बड़ी समस्या बताया. सर्वे के आंकड़े संकेत देते हैं कि रोजगार और रोजमर्रा के खर्च से जुड़े आर्थिक मुद्दे लोगों की प्रमुख चिंताओं में बने हुए हैं.

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नौकरी या शिक्षा, बड़ा मुद्दा क्या?
सर्वे में जब देश के GenZ से पूछा गया कि अभी उनके लिए सबसे अहम मुद्दा क्या है, तो सबसे बड़ी संख्या में उन्होंने नौकरी को चुना. 53 प्रतिशत युवाओं ने साफ कहा कि रोजगार ही उनकी सबसे बड़ी चिंता है. इसके बाद 22 प्रतिशत ने शिक्षा को अपना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. रहन-सहन का खर्च यानी महंगाई 12 प्रतिशत युवाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा निकला, जबकि मानसिक स्वास्थ्य को सिर्फ 4 प्रतिशत ने प्राथमिकता दी.

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यह भी पढ़िएः Mood of The Nation: नौकरी या शिक्षा... Gen-Z के लिए सबसे बड़ा मुद्दा क्या है? पढ़ें- देश का मिजाज

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अभी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
सर्वे में लोगों से यह भी पूछा गया कि अभी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता क्या होनी चाहिए. सबसे ज्यादा 23 प्रतिशत लोगों ने शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार को प्राथमिकता दी. 21 प्रतिशत ने बुनियादी ढांचा और पूंजीगत खर्च बढ़ाने की बात कही. 18 प्रतिशत का मत था कि सभी क्षेत्रों को बराबर प्राथमिकता दी जाए, जबकि 16 प्रतिशत ने सीधे परिवारों को मदद पहुंचाने की वकालत की. टैक्स घटाने की मांग 8 प्रतिशत लोगों ने की और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने को सिर्फ 4 प्रतिशत ने सर्वोच्च प्राथमिकता बताया. इससे साफ है कि शिक्षा-स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी जनता की नजर में सबसे ऊपर हैं.

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