मूड ऑफ द नेशन (Mood of the Nation) या MOTN देश का तात्कालिक राजनीतिक और सामाजिक मूड मीटर है. यह बताने की कोशिश करता है कि उस समय भारतीय जनता क्या सोच रही है और अगर उस समय चुनाव होते तो राजनीतिक तस्वीर कैसी हो सकती है. यह इंडिया टुडे समूह की तरफ से होने वाला सर्वे है. इसका मकसद यह जानना होता है कि उस समय भारतीय मतदाता देश की राजनीति, सरकार, अर्थव्यवस्था, राजनेताओं, विपक्ष, सामाजिक मुद्दों आदि को किस तरह देख रहे हैं.
देखा जाए तो यह महज “कौन चुनाव जीतेगा?” बताने वाला सर्वे नहीं है. इसमें जानने की कोशिश की जाती है कि जनता नेताओं के प्रदर्शन, सरकार के कामकाज, बेरोजगारी, महंगाई, लोकतंत्र, विपक्ष, प्रमुख नेताओं की लोकप्रियता के अलावा सामाजिक तथा राष्ट्रीय मुद्दों के बारे में क्या सोचती है.
'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के आंकड़े बीजेपी के डबल इंजन मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत साख मजबूत बनी हुई है, लेकिन राज्यों के स्तर पर पार्टी की पकड़ ढीली पड़ रही है. हिंदी पट्टी और पारंपरिक गढ़ों में सीटों का नुकसान बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है, जिसकी भरपाई केवल एक बंगाल से संभव नहीं है.
इंडिया टुडे-सी वोटर के MOTN सर्वे में अगर आज लोकसभा चुनाव हों तो NDA को एक बार फिर बहुमत मिलने का अनुमान है. वोट शेयर में NDA 45%, INDIA ब्लॉक 39% और अन्य 16% पर रह सकते हैं. राज्यों में यूपी में INDIA ब्लॉक और बंगाल-महाराष्ट्र में NDA को बढ़त का अनुमान है.
उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सीटें 33 सीटें, समाजवादी पार्टी को 37 सीटें , कांग्रेस को 6 सीटें और अपना दल को 2 सीटें मिली थी. लेकिन MOTN के ताजा सर्वे चौंकाने वाले हैं.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में जनता की राय जानी. अगर देश में आज लोकसभा चुनाव हुए तो किसकी सरकार बनेगी, कौन प्रधानमंत्री पद की पहली पसंद है और राज्यों में हवा किस ओर बह रही है? इन सभी सवालों के जवाब सर्वे के जरिए जाने गए. देखें ये खास कार्यक्रम.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के नतीजे आ गए हैं. सर्वे में देश की जनता का मूड टटोलने की कोशिश की गई. अगर आज लोकसभा चुनाव हुए तो NDA और INDIA ब्लॉक में से किसे कितनी सीटें और वोट शेयर मिलेगा? देखें सर्वे के नतीजे.
इंडिया टुडे-सी वोटर के MOTN सर्वे में देशभर के लोगों ने अलग-अलग सवालों के जवाब दिए. इस दौरान उनसे यह भी पूछा गया कि जलवायु परिवर्तन का उनके जीवन या आजीविका पर क्या असर पड़ रहा है.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे में युवाओं ने रोजगार और अवसरों को लेकर अपनी राय रखी। 32% युवाओं का मानना है कि मेहनत और प्रतिभा अब भी मायने रखती है, जबकि 26% ने पैसा और संपर्क को ज्यादा प्रभावी माना।
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में Gen Z के मुद्दों को जानने की कोशिश की गई. सर्वे में पूछा गया कि Gen-Z के लिए सबसे अहम मुद्दा क्या है, तो सबसे बड़ी संख्या में नौकरी को चुना गया. 53 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि नौकरी को उनका सबसे बड़ा मुद्दा है. 22 प्रतिशत युवाओं ने शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. देखें MOTN सर्वे.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के नतीजे आ गए हैं. अगर आज देश में लोकसभा चुनाव हो जाएं तो प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे अच्छा उम्मीदवार कौन होगा? इसके जवाब में नरेंद्र मोदी को 49 प्रतिशत लोगों ने अपनी पहली पसंद बताया. दूसरे और तीसरे नंबर पर किसका नाम आया? देखें वीडियो.
इंडिया टुडे के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में जेन-जी के रुख और देश के बदलते मूड को समझने की कोशिश की गई है. जेन-जी प्रोटेस्ट के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा सर्वे है. इसमें रोजगार से लेकर CJP के चुनाव लड़ने जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे गए हैं.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में देश की जनता से राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों को लेकर सवाल पूछे गए. सर्वे में सवाल पूछा गया कि प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी का कामकाज कैसा? 51 फीसदी लोगों ने कामकाज अच्छा बताया. तो 17 फीसदी ने औसत बताया. देखें Video.
अगस्त 2026 के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने देश का राजनीतिक मिजाज साफ कर दिया है. पेपर लीक, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर युवाओं में भारी गुस्सा है, लेकिन इसके बावजूद Gen-Z और एक बड़ी आबादी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कायम है. सर्वे की यह रिपोर्ट सरकार के लिए बड़ी चुनौती, सबक और भरोसे की तस्वीर पेश करती है.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के MOTN सर्वे में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर जनता की राय सामने आई है. सर्वे में देश के युवाओं का मूड टटोलने की कोशिश की गई.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के नतीजे आ गए हैं. सर्वे में तमाम मुद्दों पर देश का मूड जानने की कोशिश की गई. जब सवाल किया गया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चुनाव लड़ी तो क्या वोट करेंगे? इसके जवाब में कितने प्रतिशत लोगों ने हां कहा और कितनों ने नहीं, देखें वीडियो.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में युवाओं और जनता की राजनीतिक व सामाजिक चिंताओं का व्यापक विश्लेषण किया गया. सर्वे में 23 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी को देश की सबसे बड़ी समस्या बताया. तो 18 फीसदी ने महंगाई को सबसे बड़ी समस्या माना. देखें Video.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में जब पूछा गया कि Gen Z के लिए सबसे अहम मुद्दा क्या है, तो सबसे बड़ी संख्या में उन्होंने नौकरी को चुना. 53 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि नौकरी को उनका सबसे बड़ा मुद्दा है. 22 प्रतिशत युवाओं ने शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. देखें MOTN सर्वे.
इंडिया टुडे के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में जेन-जी के रुख और देश के बदलते मूड को समझने की कोशिश की गई है. जेन-जी प्रोटेस्ट के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा सर्वे है. सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता पर Gen-Z को कितना भरोसा है. इस पर भी युवाओं ने वोट किया. देश के 67 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनका भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर भरोसा कम या बिल्कुल नहीं है.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में युवाओं और आम जनता की राजनीतिक व सामाजिक चिंताओं का व्यापक विश्लेषण किया गया है. सर्वे में बेरोजगारी को 23 फीसदी लोगों ने देश की सबसे बड़ी समस्या बताया है.
इंडिया टुडे–सी वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने कहा कि वे महंगाई, बेरोजगारी और बिगड़ते घरेलू बजट को लेकर परेशान हैं. लेकिन इन्हीं लोगों ने ये भी माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार अच्छा काम कर रही है.
इंडिया टुडे–सी वोटर के मूड ऑफ द नेशन सर्वे में INDIA ब्लॉक के नेतृत्व और विपक्षी राजनीति को लेकर जनता की राय सामने आई है. राहुल गांधी MOTN सर्वे में ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव से काफी आगे नजर आ रहे हैं.
इंडिया टुडे और सी वोटर की ओर से जारी मूड ऑफ द नेशन सर्वे में INDIA ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर लोगों की पसंद सामने आई है. जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 29 फीसदी लोगों ने राहुल गांधी को गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बताया. ममता बनर्जी को 7 फीसदी, जबकि अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव को 6-6 फीसदी समर्थन मिला.