लोकसभा चुनाव के दो साल बाद विपक्षी एकजुटता को नई धार देने के मकसद से इंडिया ब्लॉक की 7वीं बैठक दिल्ली में हुई. कांग्रेस की अगुवाई में करीब ढाई घंटे चली बैठक में 25 दलों के नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई. बैठक में नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई. इंडिया ब्लॉक ने नियमित अंतराल पर बैठकें करने का फैसला लिया.
इंडिया ब्लॉक की इस बैठक में कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत 25 दलों के 34 नेता और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल शामिल हुए. दोपहर 12 शुरू हुई बैठक करीब ढाई घंटे से ज्यादा चली. इंडिया ब्लॉक में शामिल प्रमुख दलों के नेता दोपहर 3 बजे जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए.
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में 25 दलों के नेता शामिल हुए और 5 प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी. उन्होंने कहा कि बैठक में नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक और सीबीएसई रिवैल्यूएशन में अनियमितताओं के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस अध्यक्ष ने इन दोनों मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि ये देश के युवाओं के साथ धोखा है. उन्होंने इंडिया ब्लॉक की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.
हर दूसरे महीने INDIA ब्लॉक की बैठक होगी...
'हम लड़ेंगे, आगे बढ़ेंगे...', INDIA ब्लॉक की मीटिंग के बाद बोले मल्लिकार्जुन खड़गे#IndiaAlliance #MallikarjunKharge #EducationMinister #Political #Opposition | @SumitDefence pic.twitter.com/q0QayS9iMs— AajTak (@aajtak) June 8, 2026
इंडिया ब्लॉक की बैठक में इन 5 मुद्दों पर सहमति बनी
खड़गे ने बताया कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी गठबंधन नियमित बैठकें करेगा. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'बैठक में एसआईआर, वोट की लूट और चुनाव में धांधली के संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने पर सहमति बनी है. यह पत्र जल्द ही भारत के मुख्य न्यायाधीश को सौंप दिया जाएगा. दूसरा बिंदु यह है कि शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग पर सर्वसम्मति से सहमति बनी है. क्योंकि उनकी देखरेख में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है.'