संयुक्त राष्ट्र दिवस पर आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन' में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद को शांति के लिए गंभीर खतरा बताया. उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद को राज्य नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है. जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद को न तो सही ठहराया जा सकता है और न ही इसके लिए कोई तर्क दिया जा सकता है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया है. 'चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन' में विदेश मंत्री ने आतंकवाद को शांति के लिए घातक खतरा बताया.
उन्होंने कहा, 'राज्य-नीति के एक साधन के रूप में इसका इस्तेमाल पूरी तरह से अस्वीकार्य है. इसे कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता, न ही इसके लिए कोई तर्क दिया जा सकता है.' उन्होंने आतंकवाद के हर रूप को गलत बताते हुए कहा कि यह जारी है क्योंकि सभी देश वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति नहीं अपनाते हैं.
उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि इतिहास में कई सबक मिलने के बाद भी कुछ देश राजनीतिक नफा नुकसान को ज्यादा तवज्जो देते हैं. उन्होंने दुनिया से आतंकवाद के प्रति और ज्यादा जागरूक होने की अपील की. उन्होंने सभी देशों द्वारा मिलकर आतंकवाद का मुकाबला करने की जरूरत पर भी जोर दिया.
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उन्होंने आगे कहा कि प्रगति और समृद्धि, संघर्ष और हिंसा के बिल्कुल विपरीत है. ये दोनों एक-दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते. आज के दौर का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि आज के समय में सप्लाई चेन बहुत जटिल हैं, बाजार वैश्विक हो चुके हैं और संसाधन साझा हैं. उन्होंने कहा, 'ऐसी स्थिति में दुनिया आगे नहीं बढ़ सकती, जहां एक हिस्सा समृद्ध हो और दूसरा हिस्सा सुविधाओं से वंचित रहे.' उन्होंने कहा कि ऐसी असमानता लगातार अस्थिरता को बढ़ावा देने जैसा है.