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20 गुना मुनाफे का झांसा देकर हुई 113 करोड़ की ठगी! MTC क्रिप्टो केस में ED का एक्शन

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी ट्रेड कॉइन (MTC) नामक क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड मामले में मुंबई और ठाणे में 12 अगस्त को छापेमारी की. इस मामले में आरोप है कि निवेशकों को 4 से 6 महीने में 10 से 20 गुना रिटर्न का झांसा देकर करीब 113 करोड़ रुपये की ठगी की गई.

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ईडी ने मुंबई से ठाणे तक मारे छापे
ईडी ने मुंबई से ठाणे तक मारे छापे

क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देने से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. Money Trade Coin (MTC) नाम की क्रिप्टोकरेंसी के जरिए निवेशकों को महज चार से छह महीने में निवेश की रकम पर 10 से 20 गुना तक रिटर्न देने का वादा किया गया था. इस मामले की जांच के सिलसिले में ED के मुंबई जोनल ऑफिस ने 12 अगस्त को मुंबई और ठाणे में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई.

जांच एजेंसी के मुताबिक, MTC उन क्रिप्टोकरेंसी में से एक थी, जिसका इस्तेमाल निवेशकों को कम समय में असाधारण रिटर्न का भरोसा देकर निवेश के लिए आकर्षित करने में किया गया. निवेशकों से चार से छह महीने के भीतर उनकी रकम को 10 से 20 गुना करने का दावा किया गया था. ED ने मामले से जुड़े मुंबई और ठाणे के कई ठिकानों की तलाशी ली है. एजेंसी इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग और निवेश से जुड़े लेनदेन की जांच कर रही है.

जानकारी के मुताबिक, ED के मुंबई जोनल ऑफिस ने 12 अगस्त को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत मुंबई और ठाणे में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. एजेंसी ने 20 अगस्त 2026 को जारी ऑफिशियल इन्फॉर्मेंशन में बताया कि छापेमारी के दौरान करीब एक करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं. इसके अलावा कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए हैं.

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ED ने ठाणे सिटी पुलिस की ओर से दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की है. FIR में अमित मदनलाल लखनपाल, ताहा हाफिज काजी, सचिन वसंत शेलार, कोमल भीमराव शिरसाठ समेत अन्य लोगों के नाम हैं. आरोप है कि आरोपियों ने 'मनी ट्रेड कॉइन' (MTC) नाम की गैर-मान्यता प्राप्त क्रिप्टोकरेंसी बनाई और बड़ी संख्या में लोगों को इसमें निवेश के लिए प्रेरित किया. अगस्त 2017 से अप्रैल 2018 के बीच निवेशकों से करीब 113.10 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है.

2018 में किया था स्टिंग

फरवरी 2018 में इंडिया टुडे के अंडरकवर रिपोर्टर निवेशक बनकर ठाणे स्थित फ्लिंटस्टोन ग्रुप के ऑफिस पहुंचे थे. रिपोर्टर्स ने करोड़ों रुपये निवेश करने की इच्छा जताई तो कंपनी से जुड़े लोगों ने बड़े-बड़े दावे किए. MTC के वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर पेश हुए दिगंबर जांगले ने कथित तौर पर एस्क्रो अकाउंट उपलब्ध कराने से लेकर कैरेबियाई देश की नागरिकता दिलाने तक की बात कही थी.

जांगले ने दावा किया था कि वे एंटीगुआ और बारबुडा की सरकार के सीधे संपर्क में हैं और जल्द ही MTC को वहां के कुछ देशों में कानूनी मुद्रा के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. निवेशकों को चार से छह महीने में रकम 10 से 20 गुना तक होने का लालच भी दिया जाता था.

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इंडिया टुडे की जांच सामने आने के बाद जून 2018 में ठाणे पुलिस ने फ्लिंटस्टोन ग्रुप के मालिक अमित लखनपाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. उस समय निवेश की रकम करीब 300 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान भी सामने आया था. तत्कालीन ठाणे पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने इंडिया टुडे की जांच की सराहना भी की थी.

खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताने का आरोप

अब ED की जांच में इस कथित नेटवर्क को लेकर नए तथ्य सामने आए हैं. एजेंसी के मुताबिक, दिल्ली, पुणे और नासिक में कई सेमिनार आयोजित किए गए थे, जिनमें लखनपाल ने कथित तौर पर खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताया. उसने निवेशकों से MTC को सरकारी मान्यता मिलने का दावा करते हुए भारी रिटर्न का भरोसा दिया.

इसके बाद Coin Deposit Ratio, MTC Banque, MTCX India और Cryptozaniya जैसी अलग-अलग स्कीम और एक्सचेंज शुरू किए गए. ED का आरोप है कि MTC की कीमतों में हेरफेर किया गया और बाद में ट्रेडिंग तथा पैसे निकालने की सुविधाएं रोक दी गईं. इससे निवेशकों को उनकी मूल रकम के साथ वादा किए गए रिटर्न का भी नुकसान हुआ.

एंटीगुआ-बारबुडा का पासपोर्ट लेकर देश से भागा आरोपी

ED की जांच में यह भी सामने आया है कि अमित लखनपाल अपने कुछ सहयोगियों के साथ भारत से फरार हो गया. एजेंसी का दावा है कि उसने एंटीगुआ और बारबुडा का पासपोर्ट हासिल किया और फिलहाल फर्जी पहचान के सहारे दुबई, UAE में रह रहा है

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