मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर कई फैसले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना लिए गए. याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह ने इसे चुनाव आयोग में सत्ता के लगातार केंद्रीकरण का मामला बताया है.
याचिका में कहा गया है कि भारत का चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था है और इसके अधिकारों का इस्तेमाल सामूहिक फैसले की प्रक्रिया के तहत होना चाहिए. याचिका के मुताबिक, संविधान के आर्टिकल 324 और 2023 के कानून की धारा 18 के तहत आयोग के फैसले सर्वसम्मति से या असहमति की स्थिति में बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए.
यह भी पढ़ें: बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, अब नई तारीख 5 अक्टूबर तय
SIT जांच और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करने की मांग की गई है. इनमें बैठकों के मिनट्स, एजेंडा, अप्रूवल, फाइल नोटिंग, IT-एक्सेस रिकॉर्ड, इलेक्टोरल रोल, फॉर्म-6, ERONet और ECINet से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं. पश्चिम बंगाल में ट्रिब्यूनल के सामने ECI की तरफ से दायर अपीलों से जुड़े रिकॉर्ड और ऑडिट की भी मांग की गई है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना पश्चिम बंगाल में ECI के नाम पर 16.10 लाख अपीलें दायर की गईं. साथ ही आरोप है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्ति या असहमति दर्ज कराई.
फॉर्म-6 और वोटर डेटा में बदलाव का भी आरोप
याचिका में जुलाई 2026 में फॉर्म-6 में किए गए बदलावों और कुछ अन्य कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग की गई है. इसमें ECINet के जरिए वोटर लिस्ट के डेटा और IT कंट्रोल के कथित केंद्रीकरण, साथ ही इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स यानी ERO की पहुंच पर पाबंदियों का भी आरोप लगाया गया है.
यह भी पढ़ें: योगेंद्र यादव, जवाहर सरकार समेत 2000 लोगों ने CJI को लिखा पत्र, SIR पर रोक की मांग
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि आयोग की मंजूरी के बिना लिए गए कथित फैसलों को रद्द किया जाए, फॉर्म-6 और वोटर लिस्ट तक विकेंद्रीकृत पहुंच बहाल की जाए और ECINet तथा ERONet के रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं. इन रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कराने और जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र न्यायिक जांच या SIT गठित करने की भी मांग की गई है.
याचिका में संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, फॉर्म-6 में आगे बड़े बदलावों पर रोक लगाने और मामले की सुनवाई लंबित रहने तक CEC को अपने पद से जुड़े काम करने से रोकने की मांग भी की गई है. वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक नोट और मतभेद उसके कामकाज का हिस्सा हैं और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.