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योगेंद्र यादव, जवाहर सरकार समेत 2000 लोगों ने CJI को लिखा पत्र, SIR पर रोक की मांग

देश के 2,000 से अधिक नागरिकों ने CJI सूर्यकांत को खुला पत्र लिखकर SIR की वैधता और प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा पूरी होने तक इसे रोकने की मांग की है. पत्र में निर्वाचन आयोग पर ECINet और फॉर्म 6 में बिना वैधानिक अनुमति बदलाव करने के आरोप लगाए गए हैं.

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2,000 से अधिक नागरिकों ने CJI सूर्यकांत को खुला पत्र लिखकर SIR पर रोक लगाने की मांग की. (File Photo: ITG)
2,000 से अधिक नागरिकों ने CJI सूर्यकांत को खुला पत्र लिखकर SIR पर रोक लगाने की मांग की. (File Photo: ITG)

देश के 2,000 से अधिक जाने-माने नागरिकों ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को खुला पत्र लिखकर निर्वाचन आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की वैधता और उसकी प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा पूरी होने और कोर्ट का फैसला आने तक इस पर तुरंत रोक लगाने की गुहार लगाई है.

चिट्ठी लिखने वालों ने CJI से इस गंभीर मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेने की अपील की है. इन नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह चुनाव आयोग के आचरण और उसकी भूमिका पर स्वतः संज्ञान लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू करे. इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व नेवी चीफ एडमिरल विष्णु भागवत, पूर्व राज्यसभा सांसद और प्रसार भारती प्रमुख रहे जवाहर सरकार, अर्थशास्त्री जयती घोष और कमल मल्होत्रा, JNU के सेवानिवृत्त प्रोफेसर दंपति आदित्य मुखर्जी और मृदुला मुखर्जी, सामाजिक कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज और वैज्ञानिक गौहर रज़ा जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हैं.

इनके अलावा रंगकर्मी और मानवाधिकार कार्यकर्ता शबनम हाशमी, लेखिका सैयदा हमीद, पत्रकार जियाउस्सलाम, कई मामलों के विशेषज्ञ योगेंद्र यादव, शिक्षाविद रूपरेखा वर्मा, JNU के पूर्व प्रोफेसर डॉक्टर सुखदेव मुनि यानी एसडी मुनि, रिटायर्ड सिविल सर्वेंट रेणुका विश्वनाथन भी पत्र पर दस्तखत करने वालों में शामिल हैं.

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लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

पत्र में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीकरण सॉफ्टवेयर ECINet और नए मतदाता पंजीकरण के 'फॉर्म 6' में बिना किसी वैधानिक अनुमति या व्यापक सहमति के मनमाने और अनधिकृत बदलाव किए हैं. इसके चलते युवाओं और नए मतदाताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

आंतरिक मतभेद का दिया हवाला

हस्ताक्षर करने वाले नागरिकों ने कथित आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया कि तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग के भीतर भी आंतरिक मतभेद हैं. उनके अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार उन फैसलों पर अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी, जो उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए थे. इन नागरिकों ने मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और सॉफ्टवेयर लॉक्स की वजह से स्थानीय अधिकारियों को आ रही तकनीकी दिक्कतों की कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच और 'ECINet' प्लेटफॉर्म के व्यापक ऑडिट की मांग की है.

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