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कमजोर मानसून से प्रभावित हुए यूपी-बिहार समेत ये 12 राज्य, अलर्ट मोड में सरकार

जून के महीने में इस बार 43 फीसदी कम बारिश हुई है. जुलाई में भी औसत से कम बारिश के अनुमान मौसम विभाग ने जताए हैं. ऐसे में सरकार अब अलर्ट मोड में आ गई है.

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कम बारिश से प्रभावित हो सकता है उत्पादन (Photo: ITG)
कम बारिश से प्रभावित हो सकता है उत्पादन (Photo: ITG)

मानसून ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दस्तक दे दी है. संभावित तारीख से पांच दिन देरी से दिल्ली पहुंचे मानसून की पहली बारिश वैसी नहीं रही, जैसी होती रही है. मॉनसून के इस धीमेपन को लेकर अब सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कैबिनेट की मीटिंग में भी मानसून को लेकर बात हुई है. पीएम मोदी ने मंत्रालयों को इसे लेकर जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

मौसम विभाग ने कहा है कि इस बार जून के महीने में पिछले 12 वर्ष में सबसे कम बारिश हुई है. जुलाई महीने में भी औसत से कम बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने जताया है. मौसम विभाग के आंकड़ों की मानें, तो अब तक औसत से 43% कम बारिश हुई है. कम बारिश का विपरीत प्रभाव खेती-किसानी पर पड़ सकता है. उत्पादन प्रभावित होने की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं.

मानसून की ऐसी रफ्तार के पीछे अल नीनो को प्रमुख वजह बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि अल नीनो के कारण बारिश की स्थिति में इस बार अलग तस्वीर नजर आ सकती है. कहीं अधिक, तो कहीं कम बारिश की संभावना है. कृषि, खाद्य, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, ऊर्जा, जल शक्ति, पशुपालन, डेयरी, गृह और वित्त मंत्रालय को सरकार ने हालात से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है.

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इसे लेकर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश के 315 जिलों में कमजोर मानसून की वजह से चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा कि 111 जिलों में सिंचाई उपलब्धता 25% से कम है. दर्जनभर राज्य इससे प्रभावित हैं. प्रभावित राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु भी शामिल हैं.

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मानसून कमजोर रहने से बनी स्थिति में अधिक रोजगार देने की तैयारी भी सरकार के स्तर पर की जा रही है. इसके लिए सरकार वीबी जी राम जी योजना का बजट बढ़ाने पर भी विचार कर रही है. एक जुलाई 2026 से लागू हुई इस योजना के लिए मौजूदा बजट 95 हजार करोड़ रुपये है. इस योजना के तहत अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मजदूरी दर (300 से 409 रुपये तक) है. सिक्किम में इस योजना के तहत मजदूरी दर सबसे अधिक 450 रुपये है.

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सरकार जलाशयों के जलस्तर पर नजर रख रही है. कमजोर मानसून के कारण पनबिजली परियोजनाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सरकार सतर्क है. अधिकारी बिजली उत्पादन पर इसके असर का आकलन करने में जुटे हैं. वैकल्पिक स्रोतों से बिजली उत्पादन की तैयारी भी शुरू हो गई है.

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