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'कोर्ट से मिले न्याय को कानून से क्यों बदलना चाहती है सरकार', CAPF बिल पर माकन ने उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद अजय माकन ने राज्यसभा में सीएपीएफ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि पिछले पांच वर्ष में 529 जवानों ने सुसाइड किया है. उन्होंने इस बिल को संविधान की आत्मा के खिलाफ बताया और इसे वापस लेने की मांग की.

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अजय माकन ने CAPF बिल पर सरकार को घेरा (Photo: Screengrab)
अजय माकन ने CAPF बिल पर सरकार को घेरा (Photo: Screengrab)

गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज रेगुलेशन बिल पेश कर दिया. उच्च सदन से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक पारित होने के बाद इस बिल को चर्चा के लिए लिया गया. इस बिल पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कर्नाटक से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अजय माकन ने कहा कि भारत में अगर लोकतंत्र जिंदा है, तो उसके सबसे बड़े कारणों में से हमारी पैरामिलिट्री फोर्सेज, सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज जो भी कहा जाए, वो हैं. जब भी कहीं चुनाव होते हैं, लोकतंत्र की रक्षा करने की जरूरत होती है, तब इन फोर्सेज का इस्तेमाल किया जाता है जो दूसरे राज्य से भेजे जाते हैं.

उन्होंने कहा कि 2009 में हम लोगों ने कोबरा बटालियन बनई. उस समय गृह राज्यमंत्री था, पी चिदंबरम गृह मंत्री थे. नक्सलवाद को खतम करने में इसका बहुत बड़ा योगदान रहा है. अजय माकन ने कहा कि जब हमारे गृह मंत्री यह बोलते हैं कि मैं नक्सल को 31 मार्च तक हटा दूंगा, नक्शे से मिटा दूंगा तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण हमारे इन जवानों की, अधिकारियों की कुर्बानी है. इसके अलावा कुछ नहीं. उन्होंने कहा कि असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक को हाल ही में एक आईईडी ब्लास्ट में अपना पैर गंवाना पड़ा. 15 साल से उनको प्रमोशन नहीं मिला.

अजय माकन ने कहा कि सीआईएसएफ में 30 साल लगते हैं एडीजी बनने के लिए. डीआईजी बनने के लिए 20 साल, सीनियर कमांडेंट बनने के लिए 15 वर्ष लगते हैं. वहीं एक आईपीएस सात वर्ष के अंदर एसपी और डीआईजी बन जाता है, सीनियर कमांडेंट के लेवल पर. इतनी असमानता पैरामिलिट्री फोर्सेज के अंदर हैं. उन्होंने कहा कि हमारे अर्धसैनिक बलों के 529 लोगों ने पिछले पांच वर्ष के अंदर अपनी जान दी. अजय माकन ने सदन में एक लिस्ट दिखाते हुए कहा कि डेढ़ सौ अधिकारियों ने देश की रक्षा करते हुए अपनी शहादत दी है और आज हम उनके प्रमोशन को रोक रहे हैं.

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उन्होंने कहा कि जब कोर्ट ने छह-छह बार यह कह दिया कि इनको न्याय मिलना चाहिए, तब सरकार न्यायालय की ओर से मिले न्याय को कानून से क्यों बदलना चाहती है. ये केवल 13 हजार अधिकारी नहीं, 10 लाख पैरामिलिट्री के साथी हैं. अजय माकन ने कहा कि आज इन फोर्सेज में एक लाख लोगों की वैकेंसी है. हमारे अर्धसैनिक बलों में 749 लोगों ने सुसाइड कर लिया. 46 हजार लोगों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है. 9532 लोगों ने रिजाइन दे दिया. ये सभी नौजवान लोग हैं. 24 लोग भगोड़ा घोषित किए गए. उन्होंने कहा कि आज हम किस तरह से इन लोगों को मोटिवेट कर रहे हैं. यहां पर आने से पहले अर्धसैनिक बलों के कर्मचारी-अधिकारी कई दिनों से हम लोगों के पास आ रहे हैं और कह रहे हैं कि आप हमारी बात रखिए, सरकार को समझाइए.

गृह मंत्री यहां नहीं, ये दुख की बात- माकन

अजय माकन ने कहा कि दुख की बात है कि लोकतंत्र की रक्षा करने वाले, नक्सल से हमें बचाने वाले 10 लाख लोगों के बारे में विधेयक है और गृह मंत्री यहां पर नहीं हैं. इसको पहले सलेक्ट कमेटी, स्टैंडिंग कमेटी के अंदर जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि वहां पर हम चर्चा करते. इनके लोगों को बुलाते, उनसे पूछते कि बताइए क्या दिक्कत है. हम कैसे आपकी दिक्तों को दूर कर सकें. इनको मोटिवेट करते. लेकिन दुख की बात है कि इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी के अंदर ले जाने का भी हम लोगों को मौका नहीं मिला. हम इसकी निंदा करते हैं. अजय माकन ने कहा कि इसका फाइनेंशियल मेमोरैंडम यह कहता है कि कोई खर्च नहीं होगा. यह सरासर गलत है.

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यह बिल संविधान की आत्मा के खिलाफ- माकन

पूर्व गृह राज्यमंत्री अजय माकन ने कहा कि इसका क्लॉज-पांच ये कहता है कि पुराने जितने भी आदेश हैं, उन आदेशों के अंतर्गत इनको वित्तीय लाभ मिलता रहेगा. 12 जुलाई 2019 को यह ऑर्डर होता है कि इनको ऑर्गेनाइज ग्रुप ए सर्विसेज माना जाए. यानी इनको नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन दिया जाएगा. अजय माकन ने कहा कि जब पुराना ऑर्डर है, क्लॉज पांच ये कह रहा है कि वह अप्लिकेबल है, तो फिर ये कैसे कह सकते हैं कि इसका कोई वित्तीय असर नहीं होगा.

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उन्होंने कहा कि इस पूरे बिल के अंदर सबसे खराब क्लॉज तीन है. यह सभी पुराने कानून, सभी कोर्ट के फैसलों को निरस्त कर देता है. यह अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 16 के खिलाफ है. यह संविधान, संविधान की आत्मा के खिलाफ है और नहीं आना चाहिए था ये बिल. अजय माकन ने कहा कि इतिहास गवाह रहेगा कि जब सरहद के प्रहरी न्याय मांग रहे थे, तब ये सरकार वैधानिक छल के माध्यम से उनका हक छीन रही थी. हम अपने जवानों के मनोबल को नौकरशाही की भेंट चढ़ते नहीं देख सकते. उन्होंने कहा कि हम इस अन्यायपूर्ण बिल का विरोध करते हैं. इसे वापस लिया जाना चाहिए.

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