'मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन का लेटर दिखाने के लिए तैयार हूं. क्या आपके नेता अपनी असली डिग्री दिखाएंगे?' सोशल मीडिया पर अभिजीत दिपके ने वीडियो जारी कर कई सवाल खड़े किए हैं. दरअसल, अभिजीत दिपके का दावा है कि एक बीजेपी कार्यकर्ता ने उनकी पढ़ाई और विदेश में हासिल की गई शिक्षा को लेकर RTI दायर की है. इसके जवाब में उन्होंने न सिर्फ अपनी पढ़ाई के दस्तावेज दिखाने की बात कही, बल्कि बीजेपी नेताओं से भी उनकी डिग्री सार्वजनिक करने की चुनौती दे दी.
बता दें कि गुजरात के सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और केंद्रीय GST विभाग को पत्र लिखकर अभिजीत दिपके के पिता की आर्थिक स्थिति, उनकी विदेश में पढ़ाई के खर्च और CJP के नाम पर जुटाए जा रहे लीगल डिफेंस फंड की जांच की मांग की थी.
वीडियो में अभिजीत दिपके ने क्या कहा
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि उन्होंने देखा है कि एक बीजेपी कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ RTI दाखिल की है और यह जानना चाहा है कि उन्होंने अपनी शिक्षा कैसे पूरी की. उन्होंने कहा, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या आपके नेता अपनी डिग्री दिखाएंगे? मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन का लेटर दिखाने के लिए तैयार हूं. क्या आपके नेता उनकी असली डिग्री दिखाएंगे? वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कुछ लोगों को शिक्षा से इतनी परेशानी क्यों है. उनके मुताबिक अगर किसी सामान्य परिवार का लड़का बोस्टन यूनिवर्सिटी जाकर पढ़ाई कर लेता है तो इससे किसी को दिक्कत क्यों होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर शिक्षा को लेकर इतनी आपत्ति क्यों जताई जा रही है.
RTI कार्यकर्ता ने क्या उठाए सवाल
इस बीच गुजरात के सूरत के RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है. उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्रीय GST विभाग को पत्र लिखकर कहा है कि भगवानराव दिपके महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी हैं. ऐसे में यह जांच होनी चाहिए कि एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी अपने बेटे को विदेश में उच्च शिक्षा दिलाने में कैसे सक्षम हुआ. अमित तिवारी का कहना है कि पूरे मामले की वित्तीय जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पढ़ाई का खर्च किन स्रोतों से पूरा किया गया.
NEET प्रदर्शन और CJP के फंड से जुड़ा है मामला
RTI कार्यकर्ता के मुताबिक यह पूरा मामला NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले CJP कार्यकर्ताओं को दी जा रही कानूनी सहायता और उसके लिए घोषित लीगल डिफेंस फंड से जुड़ा हुआ है. इसी आधार पर उन्होंने अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और आर्थिक स्थिति की भी जांच की मांग उठाई है. अमित तिवारी ने सिर्फ आर्थिक जांच की मांग ही नहीं की, बल्कि चुनाव आयोग को भी पत्र लिखकर CJP के वैधानिक दर्जे पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि CJP एक गैर-पंजीकृत संस्था है, लेकिन यह एक राजनीतिक दल की तरह काम कर रही है. उनका कहना है कि यदि CJP के नाम पर लीगल डिफेंस फंड के रूप में एक करोड़ रुपये जुटाए जा रहे हैं तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या यह संस्था जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत है या नहीं. RTI कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि यदि संस्था पंजीकृत नहीं है तो राजनीतिक दल की तरह उसका संचालन और फंड जुटाना जांच का विषय होना चाहिए.
कपिल सिब्बल के 1 करोड़ रुपये के फंड पर भी सवाल
RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) को भी पत्र लिखा है. उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड पर 18 प्रतिशत GST के भुगतान की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि इस राशि के कर संबंधी पहलुओं की भी जांच की जानी चाहिए. दरअसल, NEET पेपर लीक मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए CJP प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए कपिल सिब्बल ने एक करोड़ रुपये के योगदान का ऐलान किया था. अब इसी राशि को लेकर RTI कार्यकर्ता ने GST से जुड़े सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है.
एक RTI से कई सवालों तक पहुंचा मामला
शुरुआत सिर्फ अभिजीत दिपके की पढ़ाई को लेकर दाखिल RTI से हुई थी. फिर अभिजीत दिपके ने वीडियो जारी कर अपनी पढ़ाई, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन का जिक्र करते हुए जवाब दिया. इसके बाद मामला उनके पिता की आर्थिक स्थिति तक पहुंच गया. फिर CJP के लीगल डिफेंस फंड पर सवाल उठे. उसके बाद चुनाव आयोग से संस्था के रजिस्ट्रेशन की जांच की मांग की गई. और अब कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के फंड पर GST जांच की मांग भी इस पूरे विवाद का हिस्सा बन गई है.
अब नजर जांच एजेंसियों पर
फिलहाल इस पूरे मामले में कई तरह के दावे और आरोप सामने आए हैं. एक ओर अभिजीत दिपके का कहना है कि वह अपनी पढ़ाई से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हैं और उन्होंने बीजेपी नेताओं से भी उनकी डिग्री सार्वजनिक करने की चुनौती दी है. दूसरी ओर RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने चुनाव आयोग और केंद्रीय GST विभाग से कई बिंदुओं पर जांच की मांग की है. अब यह देखना होगा कि संबंधित एजेंसियां इन शिकायतों पर क्या कदम उठाती हैं और क्या किसी तरह की जांच शुरू होती है या नहीं. फिलहाल मामले में अंतिम निष्कर्ष या किसी जांच एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है.