कर्नाटक के बेंगलुरु की एक कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े केस में राहत दी है. दरअसल, कोर्ट ने एक वीडियो के प्रसारण और उसे शेयर करने पर अंतरिम रोक लगा दी. पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने कोर्ट में याचिका दायर कर वीडियो के दिखाने और उसे शेयर करने पर रोक लगाने की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि इस वीडियो के जरिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है.
बेंगलुरु की अदालत में जज बी. पुष्पांजलि ने अंतरिम आदेश देते हुए विवादित वीडियो को दिखाने, अपलोड करने और शेयर करने पर रोक लगा दी है. यह रोक सोशल मीडिया समेत सभी प्लेटफॉर्म पर लागू होगी.
पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने की थी रोक लगाने की मांग
दरअसल, सिद्धारमैया ने कहा था कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है. इसके साथ उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाने का अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए अपनी छवि खराब करने की कोशिश करार दिया.
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सिद्धारमैया ने वीडियो से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में झूठ को सच के रूप में पेश करना आसान हो गया है. उन्होंने मीडिया और आम लोगों से अपील की कि वे ऐसी जानकारी को आगे न फैलाएं, जिसे वह गलत बता रहे हैं.
सिद्धारमैया ने इस मामले में शहर के पुलिस आयुक्त के पास भी शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि वह अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करते हैं और उन्होंने कभी मीडिया को अपना काम करने से नहीं रोका. हालांकि, उनका कहना है कि कुछ मीडिया संस्थानों की ओर से इस आजादी का गलत इस्तेमाल किए जाने के कारण उन्हें कोर्ट का रुख करना पड़ा.
उन्होंने अपनी पांच दशक लंबी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि कर्नाटक की जनता उनके सार्वजनिक जीवन से परिचित है. सिद्धारमैया ने भरोसा जताया कि आखिरकार सच सामने आएगा.
बेटे यतींद्र ने भी वीडियो को बताया फर्जी
कर्नाटक सरकार में मंत्री और सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने भी वीडियो को फर्जी बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसे उनके पिता की छवि खराब करने के मकसद से फैलाया जा रहा है. यतींद्र ने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दी गई है.
उन्होंने वीडियो को स्टिंग ऑपरेशन मानने से इनकार किया. यतींद्र का कहना है कि यह किसी की छवि खराब करने और गलत प्रचार फैलाने की साजिश है. अगर लोगों को सच नहीं पता होगा, तो वे वीडियो को असली मान सकते हैं.
यतींद्र ने कहा कि आज राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि सिद्धारमैया जैसे वरिष्ठ नेता को भी ऐसे आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. अगर किसी व्यक्ति ने कुछ गलत नहीं किया है, तो उसे ऐसी घटनाओं से निराश होने की जरूरत नहीं है.