उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बाद शुरू हुआ 10 दिन का प्रायश्चित और शुद्धिकरण अनुष्ठान शुक्रवार शाम पूर्णाहुति के साथ पूरा हो गया. मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने इसकी जानकारी दी. यह अनुष्ठान 15 जुलाई से शुरू हुआ था और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसे आयोजित किया था.
ट्रस्ट के पदाधिकारियों के मुताबिक, इसका मकसद मंदिर परिसर की पवित्रता को धार्मिक विधि विधान से वापस लाना और चढ़ावा चोरी की घटना के लिए क्षमा मांगना था.
महंत दिनेंद्र दास ने शनिवार को बताया कि अनुष्ठान के आखिरी दिन मंदिर की यज्ञशाला में हवन और विशेष पूजा की गई. यह पूरा कार्यक्रम वैदिक विद्वानों की निगरानी में हुआ. इस मौके पर ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास और ट्रस्टी कृष्ण मोहन ने यजमान के तौर पर हिस्सा लिया और आहुतियां दीं. इस दौरान एक सामुदायिक भोज भी रखा गया जिसमें स्थानीय ब्राह्मणों को भोजन कराया गया.
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दास के अनुसार इस 10 दिन के अनुष्ठान में अयोध्या और अन्य जगहों से करीब 70 वैदिक आचार्यों ने हिस्सा लिया. इन आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, रुद्राभिषेक और रामार्चा पूजा की. वहीं राम लला के मुख्य पुजारी ने पूरे समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया.
उन्होंने बताया कि यह अनुष्ठान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि के निर्देश पर कराया गया. उन्होंने कहा कि चोरी या पूजा में किसी गड़बड़ी जैसी घटनाओं के बाद मंदिर की पवित्रता वापस लाने के लिए धार्मिक परंपरा के मुताबिक ही यह अनुष्ठान किया जाता है.
यह पूरा आयोजन राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच हुआ है. इस मामले में सरकार के आदेश पर एसआईटी जांच बैठाई गई थी और आपराधिक कार्रवाई भी शुरू हुई थी. इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच अभी जारी है.