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अयोध्या, बद्रीनाथ और नागौर... तीन मंदिरों में चढ़ावा चोरी का केस, जानिए किसमें कौन आरोपों के घेरे में

अयोध्या के राम मंदिर, उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम और राजस्थान के नागौर के बुटाटी धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी और चोरी के मामले सामने आए हैं. इन मामलों में एसआईटी ने शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है. 

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अयोध्या, बद्रीनाथ और नागौर के बुटाटी धाम में चढ़ावा चोरी. (photo: ITG)
अयोध्या, बद्रीनाथ और नागौर के बुटाटी धाम में चढ़ावा चोरी. (photo: ITG)

अयोध्या के राम मंदिर, उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर और राजस्थान के नागौर स्थित बुटाटी धाम में चढ़ावे (दान) की कथित हेराफेरी और चोरी के मामले सामने आने से देश भर में चर्चा छिड़ गई है. तीनों पवित्र स्थानों पर लाखों श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान, सोने-चांदी और अन्य सामान में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं. इन घोटालों ने करोड़ों भक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है, जिससे मंदिर प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

इन मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए राज्य सराकरों ने प्रशासनिक समिति और विशेष जांच दलों (SIT) गठन कर दिया, जिसकी शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर तीन मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि, जांच अभी-भी जारी है तो इन मामलों कई हाई-प्रोफाइल लोगों के नाम सामने आने या गिरफ्तारी की संभावनाएं बनी हुई हैं. एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर बद्रीनाथ में एक पूर्व कर्मचारी की गिरफ्तारी हो चुकी है तो वहीं अयोध्या में दान की गिनती से जुड़े आठ लोग न्यायिक हिरासत में हैं. नागौर के बुटाटी धाम में जिला प्रशासन की जांच में 22 करोड़ रुपये से ज्यादा की बड़ी वित्तीय लूट और भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिले हैं.

आठ आरोपी गिरफ्तार

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान में कथित हेराफेरी का ये विवाद तब शुरू हुआ, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 जून को नकद दान और अन्य कीमती सामानों की भारी चोरी का खुला आरोप लगाया था. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी. इसके बाद 25 जून को मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई और मंदिर में दान की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े 8 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

ट्रस्ट सदस्यों से भी पुलिस ने की पूछताछ

इस कार्रवाई के बाद से पुलिस की जांच का दायरा लगातार बढ़ा दिया गया है. पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई अन्य लोगों के बयान दर्ज किए हैं. इस बीच 2 जुलाई को फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने एक बड़ा विरोध मार्च निकाला और चंपत राय तथा ट्रस्ट के सदस्यों अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए पुलिस को एक शिकायत सौंपी.

बार एसोसिएशन के सदस्य आफताब खान ने बताया कि उन्होंने पुलिस को चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया था. आफताब खान चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ मामले की पैरवी के लिए बनाई गई वकीलों की इक्कीस सदस्यीय समिति के एक सक्रिय सदस्य भी हैं.

उन्होंने बताया कि अधिकारियों के अनुसार, अब तक इन तीनों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. दूसरी ओर, गिरफ्तार आठ आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सोमवार को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश प्रतिभा नारायण की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

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BKTC का निलंबित कर्मचारी गिरफ्तार

उधर, बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी मामले में उत्तराखंड पुलिस ने सोमवार को एक बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि बद्रीनाथ मंदिर में दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में बद्रीनाथ मंदिर समिति के पूर्व कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया गया है. चमोली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि नौटियाल को रविवार रात चमोली पुलिस ने उनके घर से गिरफ्तार किया और बद्रीनाथ ले गई, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है. नौटियाल श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के निलंबित कर्मचारी हैं.

एसएसपी सुरजीत सिंह पंवार ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि मंदिर समिति के अधिकारी युधवीर फरस्वान की शिकायत पर 8 जुलाई को बद्रीनाथ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था.

शिकायत में नौटियाल पर मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी करने का सीधा आरोप लगाया गया था. एसएसपी के अनुसार, शुरुआती जांच और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से ये पता चला कि नौटियाल ने कथित तौर पर कुछ कीमती सामान और नकदी चुपके से ले ली थी और इसी पक्के सबूत के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया. बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सहायक के तौर पर काम करने वाले नौटियाल के खिलाफ मंगलवार देर रात FIR दर्ज हुई थी.

बीकेटीसी की चार सदस्यीय आंतरिक जांच समिति ने नौटियाल के खिलाफ दान प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों को प्रथम दृष्टया पूरी तरह सही पाया था. सोशल मीडिया पर बद्रीनाथ मंदिर में दान की गिनती के दौरान अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद यह पूरा मामला चर्चा में आया था. इसके बाद 'भैरव सेना' नाम के एक संगठन ने भी शिकायत दर्ज कराई और इस मामले में गहन जांच तथा एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. उत्तराखंड सरकार ने इन आरोपों की जांच के लिए पिछले हफ्ते 3 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था. गढ़वाल मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) इस समिति के अध्यक्ष हैं और ये समिति अपनी पूरी रिपोर्ट और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी.

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नागौर के बुटाटी धाम में 22 करोड़ का घोटाला

राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम के बाद राजस्थान के नागौर जिले में स्थित श्री चतुर्दस महाराज मंदिर (बुटाटी धाम) में दान की संपत्ति के कथित गबन और करोड़ों रुपये की लूट का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. बुटाटी धाम पर दशकों से राजस्थान और उसके बाहर के लाखों भक्तों की अटूट आस्था और श्रद्धा रही है, जहां लकवाग्रस्त मरीज, उनके परिवार के सदस्य और देश-विदेश से भक्त चमत्कार की उम्मीद में बड़ी संख्या में आते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार भारी दान देते हैं. नागौर जिला प्रशासन की एक विस्तृत रिपोर्ट ने इस मंदिर की विकास समिति द्वारा की गई 22 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय लूट, गहरे भ्रष्टाचार और गलत कामकाज का पर्दाफाश किया है.

जांच समिति ने 146 दिनों तक किया ऑडिट

जनवरी 2026 में तत्कालीन जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने शुरू में छह सदस्यों वाली एक जांच समिति बनाई थी, जिसमें बाद में 7 और सदस्य जोड़े गए. इस तरह कुल 13 सदस्यों वाली समिति ने 146 दिनों तक गहन जांच की. डेगाना के तत्कालीन एसडीएम (SDM) मोहन चौधरी की देखरेख में बनी इस समिति ने फाइनेंशियल ईयर 2023-24 और 2024-25 के ऑडिट रिकॉर्ड का असली दस्तावेजों से मिलान किया, जिसमें लगभग 22 करोड़ रुपये के कथित गबन के सबूत मिले हैं. 23 जून 2026 को ये जांच रिपोर्ट मौजूदा जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव को सौंपी गई है.

नागौर के जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव ने इस मामले की पुष्टि करते हुए आधिकारिक बयान दिया है कि मंदिर में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है और रिपोर्ट में इसका पूरा ब्यौरा दिया गया है. उन्होंने कहा कि वो इस पूरी जांच रिपोर्ट को माननीय अदालत के समक्ष पेश करेंगे और इस मामले में अदालत से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उसके अनुसार आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

प्रशासन ने बताया कि समिति के चेयरमैन देवेंद्र सिंह बुटाटू को स्पष्टीकरण और दस्तावेज मांगने के लिए कई नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया.

इंडिया टुडे-आजतक को पता चला है कि जांच रिपोर्ट में गबन के कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं. रिकॉर्ड के अनुसार, पिछली समिति के पास 36 किलो चांदी और 250gm सोना था. चार्ज लेने पर नई समिति ने 35.5 किलो चांदी और 280 ग्राम सोना मिलने का रिकॉर्ड दर्ज किया. हालांकि, ये संपत्तियां (जिनकी कीमत लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपये है) मौजूद हैं, लेकिन इन्हें कभी-भी संगठन की अकाउंट बुक, स्टॉक रजिस्टर या वित्तीय रिकॉर्ड में ठीक से दर्ज ही नहीं किया गया.

जांच रिपोर्ट में अकाउंट्स में हेरफेर और गबन के कई और गंभीर सबूत मिले हैं. दो साल में सीसीटीवी कैमरों पर 82,41,000 रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके लिए कोई टेंडर या कोटेशन नहीं मिला और इसमें ओवर-इनवॉइसिंग (ज़रूरत से ज़्यादा बिल बनाने) के साफ सबूत मिले. इसके अलावा "एम जंक्शन सर्विसेज" के नाम पर 58,14,000 रुपये का पेमेंट दर्ज किया गया, जबकि इसके वाउचर "राणाबाई ट्रेडर्स" के नाम पर जारी किए गए थे. रिपोर्ट में गांव के विकास और मरम्मत कार्यों में भी एक करोड़ 28 लाख रुपये की भारी गड़बड़ियां पाई गई हैं.

धोखाधड़ी का आलम ये था कि दो साल में डाइनिंग हॉल के निर्माण पर 49, 49,000 रुपये का खर्च दिखाया गया, जबकि समिति की जांच से पता चला कि पूरे ग्राउंड फ्लोर का निर्माण एक दानदाता (भामाशाह) ने अपने निजी खर्च से करवाया था.

इसके अलावा मंदिर समिति ने जाली बिल जमा करके मंदिर के खजाने से पैसे निकाले. एक ही साल में किचन का खर्च 335 प्रतिशत बढ़कर 90,64,000 रुपये हो गया. दो साल में कुल एक करोड़ 17 लाख रुपये का खर्च दर्ज किया गया, फिर भी न तो सप्लायर की लिस्ट, न ही जीएसटी (GST) बिल और न ही खाना खिलाए गए लोगों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया.

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आपको बता दें कि फिलहाल तीनों मामलों में जांच जारी है और इन घटनाओं ने मंदिरों में चढ़ावे के पारदर्शी प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. भक्तों की आस्था का दुरुपयोग न हो, इसे लेकर अब सख्त निगरानी और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है.

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