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3 साल पहले सिर्फ 3 बाघ... अब 12! असम के इस जंगल ने 'टाइगर रिटर्न' की लिख दी नई कहानी

असम के नामेरी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण की अच्छी खबर आई है. साल 2022 में जहां यहां सिर्फ 3 बाघ थे, वहीं 2025 के अंत तक उनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है. राज्य सरकार ने इसे संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता बताया है. सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य में भी दशकों बाद दो बाघों की वापसी हुई है.

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असम में बढ़ी बाघों की संख्या. (Photo: Representational)
असम में बढ़ी बाघों की संख्या. (Photo: Representational)

एक समय ऐसा था, जब असम के नामेरी टाइगर रिजर्व में बाघ गिनने में ज्यादा वक्त नहीं लगता था. साल 2022 में यहां सिर्फ 3 बाघ थे. लेकिन तीन साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई. अब यहां 12 बाघ हैं. यानी संख्या चार गुना हो गई. यही नहीं, जिस जंगल से दशकों पहले बाघ गायब हो चुके थे, वहां भी उनकी वापसी हुई है,

एजेंसी के अनुसार, असम के वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने बताया कि नामेरी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 2022 के मुकाबले 2025 के अंत तक बढ़कर 12 हो गई है. यानी तीन साल में यहां बाघों की संख्या चार गुना हो गई.

मंत्री ने इसे राज्य के वन्यजीव संरक्षण अभियान की बड़ी उपलब्धि बताया. उनके मुताबिक, इस बढ़ोतरी की पुष्टि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने भी की है.

इस कहानी का दूसरा हिस्सा सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य है. यह नामेरी टाइगर रिजर्व का सैटेलाइट कोर एरिया है. सरकार के मुताबिक, यहां दशकों बाद दो बाघों की वापसी हुई है. वन्यजीव संरक्षण की दुनिया में इसे बड़ा संकेत माना जाता है. क्योंकि बाघ तभी किसी इलाके में लौटते हैं, जब वहां पर्याप्त जंगल, पानी, शिकार और सुरक्षित माहौल मौजूद हो.

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असम के सोनितपुर जिले में स्थित नामेरी नेशनल पार्क करीब 200 वर्ग किलोमीटर में फैला है. इसके साथ सोनाई-रूपाई वन्यजीव अभयारण्य, नदुआर रिजर्व फॉरेस्ट और बालीपारा रिजर्व फॉरेस्ट मिलकर नामेरी टाइगर रिजर्व बनाते हैं.

यह इलाका सिर्फ बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि हाथियों, तेंदुओं, गौर, हॉर्नबिल और सैकड़ों पक्षी प्रजातियों के लिए भी अहम आवास माना जाता है.

किसी जंगल में बाघों की संख्या बढ़ना सिर्फ वन विभाग की उपलब्धि नहीं होती. बाघों की संख्या बढ़ रही है, तो इसका मतलब है कि जंगल में शिकार प्रजातियां मौजूद हैं, जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र बेहतर है और संरक्षण के प्रयास असर दिखा रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बढ़ती संख्या के साथ नई चुनौतियां भी आती हैं. बाघों के लिए पर्याप्त क्षेत्र, मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना और शिकारियों पर निगरानी लगातार जरूरी होगी.

 

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