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'टेरर और टॉक्स साथ नहीं...', फिर भारत ने पाकिस्तान क्यों भेजा सीनियर डिप्लोमैट?

इस्लामाबाद में एक मजबूत वार्ताकार के रूप में आलोक डिमरी की मौजूदगी से भारत SCO में फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल रह सकता है और पाकिस्तान को एकतरफा एजेंडा तय करने से रोक सकता है. पाकिस्तान के पास अभी SCO की अध्यक्षता है.

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भारत की ओर से SCO की मीटिंग में आलोक डिमरी शामिल हो रहे हैं. (Photo: X)
भारत की ओर से SCO की मीटिंग में आलोक डिमरी शामिल हो रहे हैं. (Photo: X)

ऑपरेशन सिंदूर के डेढ़ साल बाद भारत की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आधिकारिक एंट्री हुई है. लेकिन यह पूरी तरह से एक मल्टीलेटरल ढांचे के तहत है. विदेश मंत्रालय (MEA) में एडिशनल सेक्रेटरी और (SCO- Shanghai cooperation organization) के लिए भारत के नेशनल कोऑर्डिनेटर आलोक अमिताभ डिमरी, SCO की 'काउंसिल ऑफ नेशनल कोऑर्डिनेटर्स' की तीन दिन की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं.

यह बैठक सोमवार को इस्लामाबाद में शुरू हुई. पहलगाम आतंकी हमले और मई 2025 के सैन्य टकराव के बाद से इतने ऊंचे ओहदे वाले किसी अधिकारी की यह पहली यात्रा है.

28-30 सितंबर को हो रही यह बैठक SCO की 'काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट' की अध्यक्षता पाकिस्तान के पास आने के बाद पाकिस्तान में पहली बड़ी गतिविधि है. पाकिस्तान ने 1 सितंबर को औपचारिक रूप से किर्गिस्तान से यह जिम्मेदारी संभाली थी और वह अगस्त 2027 में इस्लामाबाद में SCO के राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. 

सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि यह फैसला भारत के लगातार अपनाए जा रहे 'टू ट्रैक लाइन' के अनुरूप है. "द्विपक्षीय बातचीत के लिए आतंकवाद-मुक्त और अनुकूल माहौल की ज़रूरत होती है. लेकिन हम SCO के फ़ॉर्मेट के तहत पाकिस्तान के साथ जुड़ेंगे.

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भारत का यह रुख 2017 से ही बना हुआ है, जब भारत और पाकिस्तान दोनों SCO के पूर्ण सदस्य बने थे. उरी, पुलवामा और अब पहलगाम की घटनाओं के बाद भी भारत ने पाकिस्तान की मेजबानी में होने वाली SCO बैठकों में हिस्सा लेना जारी रखा. 

विदेश मंत्री एस जयशंकर खुद अक्टूबर 2024 में SCO शासनाध्यक्षों की बैठक के लिए इस्लामाबाद गए थे. 

इस बार हालात कुछ अलग दिख रहे हैं. 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से भारत का यही रुख़ रहा है कि "आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते." डिमरी को भेजने से इस रुख़ पर कोई असर नहीं पड़ता; अधिकारियों का ज़ोर इस बात पर है कि यह कोई द्विपक्षीय यात्रा नहीं है, न ही अलग से कोई द्विपक्षीय बैठक तय है, और प्रतिनिधिमंडल सिर्फ़ SCO कार्यक्रम के लिए वहां जा रहा है.

उम्मीद है कि पाकिस्तान 2027 के शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी SCO नेताओं को आमंत्रित करेगा. इस सम्मेलन में भारत किस स्तर का प्रतिनिधित्व करेगा, यह तारीख के नजदीक आने पर तय किया जाएगा. 

पिछली बार जब भारत ने इस सम्मेलन की मेजबानी की थी तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को आमंत्रित किया गया था और लेकिन उन्होंने वर्चुअल तरीक़े से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था.

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विदेश मामलों के एक मज़बूत वार्ताकार आलोक डिमरी की मौजूदगी से भारत SCO में फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल रह सकता है और पाकिस्तान को एकतरफा एजेंडा तय करने से रोक सकता है. साथ ही द्विपक्षीय बातचीत शुरू किए बिना कनेक्टिविटी, आतंकवाद-विरोधी उपायों और व्यापार पर अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रख सकता है. 

यह द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के बजाय एक बहुपक्षीय व्यावहारिक दृष्टिकोण है.

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