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मुंबई में बारिश का कहर जारी! पेड़ गिरने से अब बुजुर्ग की मौत, कई गाड़ियां भी दबीं

मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही तेज बारिश और हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं. कुर्ला के नौपाड़ा में एक बड़ा और पुराना पेड़ गिरने से 63 वर्षीय यूनुस कुंडावाला की मौत हो गई. पेड़ के नीचे कई गाड़ियां भी दब गईं, हालांकि गाड़ियों में कोई शख्स मौजूद नहीं था.

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मृतक की उम्र 63 साल थी. (Photo- ITGD)
मृतक की उम्र 63 साल थी. (Photo- ITGD)

मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं के बीच लगातार पेड़ों के गिरने के मामले सामने आ रहे हैं. पिछले दिनों एक स्कूल बस पर पेड़ गिर गया था, उसमें एक छात्र की मौत हो गई थी. अब कुर्ला में एक बड़ा पेड़ गिर गया है. इस हादसे में एक बुजुर्ग की मौत हो गई है.

रविवार दोपहर करीब 10:30 बजे कुर्ला (पश्चिम) के नौपाड़ा स्थित हिंदी बीएमसी स्कूल के पास कमानी इलाके में पेड़ गिर गया था. अचानक एक बहुत बड़ा और पुराना पेड़ पास की एक दुकान पर भरभराकर गिर गया. 

इस हादसे के वक्त दुकान के पास मौजूद 63 वर्षीय यूनुस कुंडावाला पेड़ और मलबे की चपेट में आ गए, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गए.

राहत-बचाव कार्य में जुटी टीमें

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें पहले पास के सिटी अस्पताल ले जाया गया. वहां से उन्हें फौजिया अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. हादसे की खबर मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस, बेस्ट (BEST) और नगर निगम के वार्ड प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं. टीमों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर पेड़ के मलबे को हटाने का काम किया.

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गाड़ियां दबीं, चश्मदीद ने बयां किया मंजर

ये पेड़ एक परिसर के अंदर लगा हुआ था, जो तेज हवाओं के कारण उखड़कर बाहर आ गिरा. हादसे के वक्त वहां कई गाड़ियां भी पार्क थीं, जो इसकी चपेट में आ गईं. हादसे के चश्मदीद ने बताया, 'यहां कुल चार कारें खड़ी थीं. उनमें से एक गाड़ी पहले ही निकल गई थी. तेज हवाएं चलने के बाद परिसर के अंदर मौजूद ये पेड़ अचानक गिर गया.'

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चश्मदीद ने आगे कहा, 'मैं यहीं सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करता हूं. ये बहुत पुराना पेड़ है, जो करीब 10 साल से यहां था. लोग आमतौर पर अपनी कारें यहीं पार्क करते हैं. एक कार समय रहते निकल गई, लेकिन बाकी कारें मलबे के नीचे फंस गईं. गनीमत रही कि हादसे के वक्त गाड़ियों के अंदर या उनके आसपास कोई इंसान मौजूद नहीं था.'

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