मुंबई में 248 करोड़ की लागत से तैयार किया गया मृणाल ताई गोर फ्लाईओवर एक्सटेंशन उद्घाटन के बाद विवादों में आ गया है. शहर की ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस महत्वपूर्ण फ्लाईओवर पर सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. शिवसेना (UBT) ने इसे भ्रष्टाचार बताते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका को कठघरे में खड़ा कर दिया है.
मृणाल ताई गोर रेलवे फ्लाईओवर का मुख्य हिस्सा फरवरी 2016 में बनना शुरू हुआ था. उसी साल बाद में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया था, ताकि ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सके. हालांकि, राम मंदिर और गोरेगांव को जोड़ने वाले 750 मीटर लंबे और चार लेन वाले एक्सटेंशन की कहानी कहीं ज्यादा लंबी रही. इस हिस्से को प्रशासनिक मंजूरी साल 2018 में मिली थी.
इसका वास्तविक निर्माण कार्य 22 मार्च 2019 को आधिकारिक रूप से शुरू हुआ. कई वर्षों की देरी और लागत वृद्धि के बाद आखिरकार 6 जून 2026 को इसका उद्घाटन किया गया. इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी BMC के ब्रिज विभाग ने की थी, जबकि निर्माण का ठेका MEPL-ज्ञान जॉइंट वेंचर को दिया गया था. लेकिन उद्घाटन के तुरंत बाद फ्लाईओवर की सतह को लेकर चर्चा शुरू हो गई.
लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क कई जगहों पर ऊबड़-खाबड़ दिखाई दे रही है और नई परियोजना में वह गुणवत्ता नजर नहीं आ रही जिसकी उम्मीद की जा रही थी. मंगलवार को BMC में विपक्ष की नेता किशोरी पेडनेकर ने फ्लाईओवर का दौरा किया. निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले लोग भ्रष्टाचार का एक चम्मच लेते थे, लेकिन अब वो टब बन गया है.
किशोरी पेडनेकर ने कहा कि करोड़ों रुपए खर्च करके बनाए गए फ्लाईओवर में यदि शुरुआत से ही खामियां दिखाई दें तो यह गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने खास तौर पर मानसून के दौरान वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि बरसात में ऐसी सतह दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है. इस विवाद के पीछे सड़क की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि परियोजना की बढ़ती लागत भी है.
शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस एक्सटेंशन की लागत 170 करोड़ रुपए थी, लेकिन परियोजना पूरी होते-होते यह बढ़कर 248 करोड़ रुपए पहुंच गई. यानी लागत में करीब 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यदि कुल लागत को फ्लाईओवर की लंबाई से जोड़ा जाए तो 750 मीटर लंबे इस फ्लाईओवर पर लगभग 33 लाख रुपए प्रति मीटर का खर्च आया है. ऐसे में निर्माण गुणवत्ता पर उंगलियां उठना लाजिमी है.
हालांकि, BMC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सड़क की सतह का बचाव किया है. अधिकारियों का कहना है कि फ्लाईओवर पर जो सतह दिखाई दे रही है, वह मैस्टिक एस्फाल्ट प्रक्रिया का हिस्सा है. BMC का दावा है कि अगले एक महीने में नियमित ट्रैफिक मूवमेंट के बाद सड़क पूरी तरह सेटल हो जाएगी और वर्तमान में दिखाई दे रही असमानता स्वतः खत्म हो जाएगी.
इस मामले को और संवेदनशील इसलिए भी माना जा रहा है, क्योंकि इस फ्लाईओवर का नाम समाजवादी नेता और पूर्व सांसद मृणाल ताई गोर के नाम पर रखा गया है. मृणाल ताई गोर को मुंबई में आम लोगों की आवाज उठाने वाली नेता के रूप में जाना जाता था. उन्होंने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में आम मुंबईकरों को सम्मानजनक जीवन दिलाने के लिए संघर्ष किया.
ऐसे में उनके नाम पर बने फ्लाईओवर की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल राजनीतिक और नैतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गए हैं. फिलहाल उद्घाटन के कुछ दिनों के भीतर ही यह फ्लाईओवर विकास और विवाद दोनों का प्रतीक बन गया है. एक तरफ BMC इसे मुंबई की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल कर रही है, दूसरी ओर विपक्ष भ्रष्टाचार और गुणवत्ता के मुद्दों से जोड़ रहा है.