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KCR की आपत्ति के बाद EC का एक्शन, TRS का नाम बदलने का आदेश

नई पार्टी बनाने वाली के. कविता को चुनाव आयोग से बड़ा झटका लगा है. उनकी पार्टी 'तेलंगाना रक्षणा सेना' का संक्षिप्त नाम TRS रखने पर विवाद खड़ा हो गया. 1100 से ज्यादा आपत्तियां मिलने और बीआरएस नेतृत्व की शिकायत के बाद आयोग ने नाम बदलने का आदेश दिया है.

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1100 से ज्यादा शिकायतों के बाद चुनाव आयोग का फैसला, तीन नए नाम मांगे गए. (File Photo)
1100 से ज्यादा शिकायतों के बाद चुनाव आयोग का फैसला, तीन नए नाम मांगे गए. (File Photo)

बीआरएस की पूर्व नेता के. कविता को अपनी नवगठित राजनीतिक पार्टी के नाम को लेकर बड़ा झटका लगा है. निर्वाचन आयोग ने उन्हें अपनी पार्टी 'तेलंगाना रक्षणा सेना' का नाम बदलने का निर्देश दिया है. आयोग ने कहा है कि मौजूदा नाम और उसका संक्षिप्त रूप 'TRS' पहले से इस्तेमाल हो चुके नाम से मिलता-जुलता है. इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.

दरअसल, के. कविता ने अपनी नई पार्टी का नाम 'तेलंगाना रक्षणा सेना' रखा था, जिसका संक्षिप्त नाम TRS है. यही संक्षिप्त नाम पहले 'तेलंगाना राष्ट्र समिति' का भी था. इस पार्टी का नाम बाद में बदलकर 'भारत राष्ट्र समिति' (BRS) कर दिया गया था. हालांकि, पुराने नाम का संक्षिप्त रूप TRS लंबे समय तक पार्टी की पहचान बना रहा. इसी वजह से पार्टी के नाम को लेकर विवाद हो रहा था.

बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) और वरिष्ठ नेता के. टी. रामाराव (KTR) ने निर्वाचन आयोग के सामने आपत्ति दर्ज कराई थी. उनका कहना था कि नई पार्टी का नाम और उसका संक्षिप्त रूप मतदाताओं को भ्रमित कर सकता है. इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. निर्वाचन आयोग ने इन शिकायतों पर विचार करने के बाद के. कविता को पार्टी का नाम बदलने के निर्देश जारी किए हैं. 

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आयोग ने बताया कि उसे 1100 से अधिक आपत्तियां प्राप्त हुई थीं. इनमें सबसे प्रमुख शिकायत भारत राष्ट्र समिति की ओर से दर्ज कराई गई थी. आयोग का मानना है कि किसी राजनीतिक दल का नाम और उसका संक्षिप्त रूप अलग होना चाहिए. इससे मतदाताओं में भ्रम नहीं होना चाहिए. इसके आधार कविता को अपनी पार्टी के लिए तीन नए वैकल्पिक नाम प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है.

निर्वाचन आयोग ने के. कविता को इसके लिए 15 दिनों की समयसीमा दी है. आयोग ने कहा कि यदि तय समय के भीतर तीन नए नाम नहीं दिए गए, तो उनकी पार्टी के पंजीकरण के लिए किया गया आवेदन रद्द किया जा सकता है. निर्वाचन आयोग के इस फैसले को तेलंगाना की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है. अब सबकी नजर के. कविता के अगले कदम पर टिकी हुई है.

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