महाराष्ट्र के अमरावती में एक सरकारी आवासीय स्कूल की करीब 600 छात्राएं हॉस्टल में भूत-प्रेत होने की बात से डरकर घर चली गईं. मामला 22 जुलाई को चार छात्राओं के अजीब व्यवहार से शुरू हुआ था. अब प्रशासन ने छात्राओं के लिए स्कूल परिसर में नया हॉस्टल तैयार किया है. उन्हें 1 सितंबर से यहां शिफ्ट किया जाएगा.
दरअसल, अमरावती के डोमा स्थित स्कूल में 22 जुलाई को चार छात्राएं अचानक रोने लगीं, फिर जोर-जोर से हंसने लगीं. उनके इस तरह के व्यवहार से हॉस्टल में डर का माहौल बन गया. अधिकारियों को आशंका है कि इसके पीछे मानसिक तनाव हो सकता है.
अफवाहों से बढ़ता गया डर
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, घटना के बाद छात्राओं और स्थानीय लोगों के बीच कई तरह की बातें फैलने लगीं. एक मान्यता थी कि स्कूल परिसर में मौजूद महुआ के पेड़ पर आत्माओं का वास था. पेड़ काटे जाने के बाद कुछ लोगों ने छात्राओं के व्यवहार को इससे जोड़ दिया.
एक दूसरी धारणा स्कूल के पीछे बने स्थानीय देवता के मंदिर से जुड़ी थी. कहा गया कि स्कूल की नाली से मंदिर प्रभावित हुआ, जिससे देवता नाराज हो गए. तीसरी चर्चा पास के खेत में मारे गए एक आदिवासी युवक की आत्मा को लेकर थी. इन बातों के फैलने के बाद करीब 600 आदिवासी छात्र स्कूल छोड़कर अपने घर चले गए. इस आवासीय स्कूल में करीब 810 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं. अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में डर, तनाव, अंधविश्वास और स्थानीय मान्यताओं की भूमिका सामने आई है.
मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में क्या कहा गया?
मामले को लेकर तैयार मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में भी भूत-प्रेत से जुड़ी स्थानीय धारणाओं का जिक्र किया गया. रिपोर्ट ने इस असामान्य स्थिति को अंधविश्वास, डर, मानसिक तनाव और स्थानीय मान्यताओं से जोड़ा. गांव की कुछ महिलाओं में भी बाद में इसी तरह के मानसिक लक्षण दिखाई देने की बात कही गई.
स्कूल परिसर में छात्राओं के लिए अलग नया हॉस्टल बनाया गया है. इसमें सभी छात्राओं को रखने के लिए बंक बेड की व्यवस्था की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, छात्राओं को 1 सितंबर से नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा.
इस बीच महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने छात्राओं से मुलाकात कर उन्हें समझाया. उन्होंने बातचीत के जरिए बच्चों का डर कम करने की कोशिश की.