बीजेपी नेता रविंदर रैना ने नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के कश्मीरी पंडितों को धमकियों और स्टेटहुड न देने की साजिश के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है. रैना ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक बताया और कहा कि कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा राजनीतिक सौदेबाजी का विषय नहीं हो सकती.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविंदर रैना ने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर तीखी आपत्ति जताई. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला द्वारा कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों को स्टेटहुड से जोड़ना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है. रैना ने दो टूक कहा कि कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा कोई राजनीतिक सौदेबाज़ी या स्टेटहुड की राजनीति का विषय नहीं हो सकता.
'डर का माहौल पैदा किया जा रहा'
दरअसल, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा कि घाटी में डर का माहौल पैदा किया जा रहा है.
'यहां सिर्फ कश्मीरी पंडित ही नहीं रहते'
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि यहां सिर्फ कश्मीरी पंडित ही नहीं रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि यहां तैनात डीआईजी, डीजी, एसपी और डीसी जैसे बाहर से आए सभी बड़े अधिकारी हिंदू हैं. अगर हिंदुओं को धमकियां मिल रही हैं तो इन अधिकारियों को धमकियां क्यों नहीं आ रही हैं. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि डर का माहौल बनाकर रियासत को स्टेटहुड से वंचित रखने की साजिश रची जा रही है.
एनसी प्रमुख ने कहा कि पूरी दुनिया में ये प्रचार किया जा रहा है कि अमन आ गया है और मिलिटेंसी खत्म कर दी गई है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब एलजी के पास पुलिस और पूरी व्यवस्था है तो उनसे सवाल कीजिए, वह जवाब क्यों नहीं देते? उनसे पूछें कि कौन धमकी दे रहा है. मैं आरोप लगाता हूं कि यही लोग धमकियां दे रहे हैं.