हरियाणा एसटीएफ की जांच में कथित तौर पर ऐसे आपराधिक नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को निशाना बना रहा है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, मारे जा चुके गैंगस्टर दविंदर बंबीहा के नाम से जुड़ा यह सिंडिकेट पुराने सहयोगियों के साथ नए युवाओं को भी अपने साथ जोड़ रहा है.
इसका संचालन विदेशों में बैठे प्रमुख गुर्गों द्वारा किया जा रहा है. आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को लालच देकर भर्ती किया जाता है, कारोबारियों से रंगदारी मांगी जाती है और अवैध कमाई को हवाला के रास्ते आगे पहुंचाया जाता है.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क के मुख्य निशाने पर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के टोल ऑपरेटर, होटल व बार संचालक, प्रॉपर्टी डीलर, शराब ठेकेदार, कार शोरूम मालिक और फाइनेंसर हैं. हाल ही में गुरुग्राम में गैंगस्टर कौशल चौधरी के साथी गौरव उर्फ गोरी की पत्नी नीतू की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इस गिरोह के खतरनाक नेटवर्क और कार्यप्रणाली की पूरी परतें खोलीं.
युवाओं को ऐसे जाल में फंसाता है गैंग
एसटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गैंग का 'मोडस ऑपरेंडी' बेहद संगठित और खौफनाक है. सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं को पैसों का लालच और विदेश भेजने का झांसा देकर फंसाया जाता है और उन्हें गोलीबारी, हथियार तस्करी व मादक पदार्थों की तस्करी के लिए 'स्लीपर सेल' की तरह इस्तेमाल किया जाता है. सिंडिकेट पहले बिचौलियों के जरिए कारोबारियों को रंगदारी के लिए धमकाता है और बात न मानने पर उनकी दुकानों व दफ्तरों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलवाई जाती हैं.
खौफ पैदा करने के लिए गैंग इन वारदातों के वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और मीडिया कवरेज को सोशल मीडिया पर वायरल करता है. जांच में मातू राम हलवाई, हिसार के महिंद्रा शोरूम, पलवल की मोबाइल शॉप पर हुई गोलीबारी और फाइनेंसर मंजीत की हत्या जैसे मामलों में इस गैंग की सीधी संलिप्तता का हवाला दिया गया है.
रंगदारी का पैसा हवाला से ट्रांसफर
रंगदारी से जुटाए गए काले धन को बैंक खातों और हवाला चैनलों के माध्यम से गिरोह के सदस्यों और उनके परिवारों तक पहुंचाया जाता है. हालांकि, नीतू को अदालत से यह देखते हुए जमानत मिल गई कि उसने सीधे तौर पर फिरौती की कॉल नहीं की थी और न ही वह किसी अपराध स्थल पर मौजूद थी. गौरतलब है कि दविंदर बंबीहा 2016 में पंजाब के बठिंडा में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था, लेकिन उसके गुर्गे आज भी उसके नाम पर सिंडिकेट चला रहे हैं. गिरोह के बड़े कर्ता-धर्ता फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश भागकर रेड कॉर्नर नोटिस से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि जमीन पर लोकल शूटरों से वारदातें करवाकर बिश्नोई गैंग के खिलाफ खूनी वर्चस्व की नई जंग छेड़ दी गई है.