सोचिए, एक बच्ची जिसकी उम्र सिर्फ एक महीना है. अभी दुनिया को ठीक से देखना भी नहीं सीखा. किस चेहरे पर भरोसा करना है, ये तो दूर की बात है. लेकिन पुलिस के मुताबिक, कुछ लोगों ने इस मासूम की कीमत तय कर दी थी- डेढ़ लाख रुपये. बच्ची को गुजरात के साबरकांठा से मुंबई ले जाया जा रहा था. कथित तौर पर वहां उसे एक महिला को सौंपा जाना था. नाम बताया गया- कविता. लेकिन मुंबई पहुंचने से पहले ही कहानी पलट गई.
इडर-हिम्मतनगर हाइवे पर पुलिस ने एक कार रोक ली. कार के अंदर पांच लोग थे और एक महीने की बच्ची भी. पूछताछ शुरू हुई तो जो कहानी सामने आई, उसने पुलिस को भी चौंका दिया. मामला सिर्फ इस एक बच्ची का नहीं था. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में करीब 12 बच्चों की कथित तस्करी का कनेक्शन सामने आया है. अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि मुंबई वाली कविता कौन है?

ये कहानी साबरकांठा से शुरू होती है. पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट यानी AHTU की टीम गश्त पर थी. तभी उन्हें खबर मिली कि इडर-हिम्मतनगर हाइवे पर एक कार में एक बच्ची को ले जाया जा रहा है. पुलिस को शक था कि बच्ची को बेचने के लिए ले जाया जा रहा है. सूचना मिलते ही टीम एक्टिव हुई और राजपुर गांव के पास एक कार को रोक लिया. कार में पांच लोग बैठे थे. उनके साथ एक महीने की बच्ची भी थी.
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पुलिस ने पूछताछ शुरू की. सवाल-जवाब बढ़े तो कथित सौदे की कहानी सामने आई. पुलिस के मुताबिक, बच्ची को मुंबई ले जाया जा रहा था. वहां उसे कविता नाम की महिला को सौंपा जाना था. इसके लिए डेढ़ लाख रुपये का सौदा तय हुआ था. यानी बच्ची अभी मां की गोद से दुनिया को पहचान भी नहीं पाई थी और कुछ लोगों के लिए उसकी 'कीमत' तय हो चुकी थी.
ये सौदा पूरा होने से पहले पुलिस पहुंच गई. कार रुक गई. बच्ची बरामद हो गई. और पांच लोग गिरफ्तार कर लिए गए. अगर पुलिस को सूचना कुछ देर से मिलती तो क्या होता? बच्ची मुंबई पहुंच जाती तो किसके हवाले की जाती? उसे आगे कहां ले जाया जाता? इन सवालों का जवाब अभी जांच में तलाशा जा रहा है.

इस कहानी में एक नाम सामने आ रहा है- कविता. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में कविता का नाम उस महिला के तौर पर सामने आया, जिसे बच्ची मुंबई में सौंपी जानी थी. पुलिस को शक है कि कहानी इससे बड़ी हो सकती है. पूछताछ में पता चला कि एक महिला दलाल पहले भी अलग-अलग शहरों में करीब 12 बच्चों को बेच चुकी है. अब पुलिस इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है.

क्या कविता इसी नेटवर्क की अहम कड़ी है? क्या वह सिर्फ बच्ची को लेने वाली थी या उसके पीछे कोई और बड़ा नेटवर्क है? क्या पहले बेचे गए बच्चों का भी मुंबई से कनेक्शन था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे. फिलहाल पुलिस के लिए कविता अब इस केस की अहम कड़ी बन गई है.
मामला और भी ज्यादा चौंकाने वाला तब हो जाता है जब पुलिस की जांच परिवार तक पहुंचती है. पुलिस के मुताबिक, बबीबेन और पोपटभाई नाम के कपल पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही छोटे भाई की एक महीने की बच्ची को डेढ़ लाख रुपये में मुंबई बेचने की साजिश रची. इसके बाद दलालों की कथित एंट्री होती है.

पुलिस के मुताबिक देवीलाल और सीताराम मुख्य दलाल थे. वहीं प्रवीण डांगी और दिनेश डांगी पर परिवार और दलालों के बीच संपर्क कराने का आरोप है. यानी पुलिस की शुरुआती जांच में एक पूरी चेन सामने आती दिखाई दे रही है.
एक तरफ बच्ची से जुड़े लोग. फिर संपर्क कराने वाले. फिर कथित दलाल. और आखिर में मुंबई की महिला. पुलिस अब इस पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है. इस मामले में कुल सात आरोपियों की बात सामने आई है. इनमें से पांच को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के मुताबिक, एक महिला दलाल और एक अन्य आरोपी फरार हैं. वहीं गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है.
12 बच्चों का जिक्र क्यों आया?
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में पता चला कि महिला दलाल पहले भी करीब 12 बच्चों को अलग-अलग शहरों में बेच चुकी थी. सवाल है कि ये बच्चे कौन थे? कहां से आए थे? किसे बेचे गए? किस कीमत पर? और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे? गुजरात के साबरकांठा में नवजात की बिक्री का मामला पहली बार सामने नहीं आया है. पिछले मार्च में खेड़ब्रह्मा इलाके में भी नवजात बच्चे को बेचने का मामला सामने आया था. अब पोशीना इलाके से एक महीने की बच्ची को मुंबई बेचने के लिए ले जाने का मामला सामने आया है.