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10वीं पास चला रहा था 33 साल से क्लिनिक, सूरत में पकड़े गए 16 फर्जी डॉक्टर, मरीजों को चढ़ा रहे थे ड्रिप

रत के पांडेसरा इलाके में SOG और जिला स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी कर 16 कथित फर्जी डॉक्टरों को पकड़ा है. आरोप है कि ये बिना मेडिकल डिग्री के मरीजों को दवाएं, इंजेक्शन और ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ा रहे थे. इनमें एक 10वीं पास व्यक्ति 33 साल से क्लिनिक चला रहा था, जबकि तीन आरोपी पहले भी पकड़े जा चुके हैं.

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बुखार-मलेरिया का इलाज कर रहे थे फर्जी डॉक्टर. (Photo: Screengrab)
बुखार-मलेरिया का इलाज कर रहे थे फर्जी डॉक्टर. (Photo: Screengrab)

गुजरात के सूरत में मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है. यहां पांडेसरा के औद्योगिक इलाके में SOG और जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 16 कथित फर्जी डॉक्टरों को पकड़ा है. आरोप है कि इन लोगों के पास इलाज करने के लिए जरूरी मेडिकल डिग्री नहीं थी, फिर भी वे क्लिनिक चलाकर मरीजों को एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन और ग्लूकोज की बोतलें चढ़ा रहे थे.

पकड़े गए लोगों में कुछ 10वीं और 12वीं पास हैं, जबकि कुछ ने बीए या बीएससी तक पढ़ाई की है. इसके बावजूद वे मरीजों का इलाज कर रहे थे. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें एक व्यक्ति केवल 10वीं पास होने के बावजूद पिछले 33 साल से अलग-अलग जगहों पर क्लिनिक चला रहा था. कार्रवाई में ऐसे तीन आरोपी भी पकड़े गए हैं, जो पहले भी इसी तरह के मामलों में पुलिस के हाथ लग चुके हैं.

सुबह 8 से 11 बजे तक चल रहे थे क्लिनिक

पुलिस के मुताबिक, SOG को सूचना मिली थी कि पांडेसरा इलाके में कुछ लोग बिना जरूरी योग्यता के डॉक्टर बनकर क्लिनिक चला रहे हैं. ये क्लिनिक सुबह 8 बजे से 11 बजे तक संचालित किए जा रहे थे. सूचना की पुष्टि करने के लिए SOG की टीम ने अलग-अलग संदिग्ध क्लिनिकों में डमी मरीज भेजे. जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल बी. पटेल के साथ टीमें बनाई गईं. इसके बाद तड़के पांडेसरा इलाके में एक साथ कार्रवाई करते हुए 16 क्लिनिकों पर छापेमारी की गई. इस दौरान कथित फर्जी डॉक्टरों के इलाज करने का मामला सामने आया. क्लिनिकों की हालत भी बेहद खराब बताई गई है.

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पांडेसरा की श्रमिक बस्तियों और लेबर कॉलोनियों में दूसरे राज्यों से आए बड़ी संख्या में मजदूर रहते हैं. पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए कई लोग मूल रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं. ये लोग अपने गृह राज्यों में किसी अस्पताल या डॉक्टर के यहां कंपाउंडर अथवा हेल्पर के तौर पर काम कर चुके थे. सूरत आने के बाद आरोपियों ने स्थानीय मजदूरों को अपना निशाना बनाया और बुखार, मलेरिया जैसी बीमारियों का इलाज करने लगे. आरोप है कि बिना किसी मान्यता या पंजीकरण के वे एलोपैथिक दवाएं, पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स और ग्लूकोज की ड्रिप दे रहे थे. इस तरह इलाज के नाम पर मरीजों की सेहत को जोखिम में डाला जा रहा था.

इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला मामला फ्री सेवा सदन चलाने वाले 58 वर्षीय कपिलकुमार अर्जुनप्रसाद वर्मा का है. वह केवल 10वीं पास है, लेकिन पिछले 33 साल से अलग-अलग जगहों पर क्लिनिक चलाने का आरोप है. इसके अलावा साईं धाम क्लिनिक चलाने वाला 54 वर्षीय सियाराम मौर्य भी पकड़ा गया. वह 24 साल से प्रैक्टिस कर रहा था और साल 2002 में भी पांडेसरा में पकड़ा गया था. चानसी क्लिनिक चलाने वाला 58 वर्षीय विनोद विश्वास 12वीं पास है. वह करीब 30 साल से प्रैक्टिस कर रहा था और 2008 में भी पकड़ा गया था. नीर क्लिनिक चलाने वाला 31 वर्षीय सद्दाम बनखान भी 12वीं पास है और पहले SOG के हाथों पकड़ा जा चुका है. इस तरह कार्रवाई में तीन ऐसे आरोपी सामने आए, जिनके खिलाफ पहले भी इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं.

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छापेमारी में पकड़े गए अन्य आरोपियों में भारत क्लिनिक का 53 वर्षीय महेंद्रसिंह यादव शामिल है, जिसने बीए ऑनर्स किया है. प्रोबीर क्लिनिक चलाने वाला 57 वर्षीय परितोष रॉय 10वीं पास है, जबकि नवदीप क्लिनिक का 38 वर्षीय आलोक सिंह बीएससी पास है. प्रतिमा क्लिनिक चलाने वाला 30 वर्षीय अजीत कुमार सिंह बीए पास है. गुरुकृपा क्लिनिक का 45 वर्षीय जितेंद्र वर्मा 10वीं पास है. रणछोड़ नगर में बिना नाम का क्लिनिक चलाने वाला 23 वर्षीय गौतम प्रसाद 12वीं पास है.

इसके अलावा राधा क्लिनिक का 42 वर्षीय पलाश भक्ता, साई क्लिनिक का 45 वर्षीय महेश्वर विश्वास और नारायण क्लिनिक का 52 वर्षीय सत्येंद्र यादव भी पकड़े गए हैं. ये तीनों 12वीं पास बताए गए हैं. मेहता क्लिनिक चलाने वाला 51 वर्षीय सुरेंद्र प्रसाद मेहता बीएससी पास है. सुरेंद्र क्लिनिक का 49 वर्षीय सुनीति कुमार विश्वास और श्री कृष्णा क्लिनिक चलाने वाला 44 वर्षीय संजीत कुमार सिंह भी कार्रवाई में पकड़े गए. संजीत कुमार सिंह 12वीं पास है.

मजदूरों के इलाज के नाम पर जोखिम में डाल रहे थे जान

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई में कुल 16 क्लिनिकों पर छापेमारी की गई. आरोप है कि इन क्लिनिकों में बिना जरूरी मेडिकल योग्यता के मरीजों का इलाज किया जा रहा था. कई आरोपी सामान्य पढ़ाई करने के बाद डॉक्टर बनकर काम कर रहे थे, जबकि कुछ लंबे समय से क्लिनिक चला रहे थे. पांडेसरा जैसे औद्योगिक इलाके में बड़ी संख्या में मजदूर रहते हैं. ऐसे में बिना जरूरी योग्यता वाले लोगों के हाथों इलाज कराना मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है. इस कार्रवाई में तीन ऐसे आरोपी भी पकड़े गए हैं, जो पहले इसी तरह के मामलों में सामने आ चुके थे.
 

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