मिडिल-ईस्ट जंग का असर अब सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भी पड़ता नजर आ रहा है. कोयले की किल्लत और दूसरी परेशानियों की वजह से साउथ गुजरात की करीबन सवा चार सौ कपड़ा मिलें अब सप्ताह में दो दिन बंद रहेंगी. वहीं, एलपीजी संकट की वजह से जामनगर में ब्रास इंडस्ट्री पर भी ब्रेक लग गया है.
आजतक से बातचीत में साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतूभाई बखारिया ने बताया कि आज की बैठक के दो-तीन मुख्य उद्देश्य हैं. जिस तरह से समुद्री मार्ग लगभग ठप हैं या सिर्फ नाम के लिए चल रहे हैं, उसका सीधा असर कच्चे माल की आपूर्ति पर पड़ा है.
बखारिया ने कहा, 'इंडोनेशिया से आने वाला कोयला जो अब तक ठीक था, अब उसकी किल्लत शुरू हो गई है. हमारे पास जितना स्टॉक है, उसे संभलकर इस्तेमाल करना और लंबे समय तक खींचना बहुत जरूरी है.'
एसोसिएशन के अध्यक्ष के मुताबिक, बेढंगे तरीके से या कम उत्पादन पर पूरी फैक्ट्री चलाने के बजाय, इकाइयों को सप्ताह में दो दिन बंद रखने का फैसला लिया गया है. इससे ऊर्जा संसाधनों की बचत होगी और ज्यादा आउटपुट मिलेगा.
जीतूभाई बखारिया ने आगे बताया कि सभी मिलें 'कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट' जैसे पांडेसरा, सचिन, पलसाना, और कडोदरा से जुड़ी हैं. ऐसे में सभी मीलों एक साथ बंद नहीं किया जा सकता है. इसलिए सप्ताह के सात दिनों को अलग-अलग क्षेत्रों के मुताबिक बांटा गया है, ताकि किसी एक क्षेत्र या इकाई को नुकसान न हो और संतुलन बना रहे.
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मिल चलाने के लिए पानी, कोयला, बिजली, लेबर फोर्स और डाइज़ केमिकल्स की निरंतर जरूरत होती है. जब ये सभी पर्याप्त मात्रा में होंगे, तभी प्रोसेसिंग हाउस सुचारू रूप से चल सकता है. बखारिया ने कहा कि इन दो दिनों की बंदी से हम भविष्य की योजना बना सकेंगे. इस संकट के समय में हमें अपनी इंडस्ट्री और अपने कामगारों को बचाए रखना है, ताकि जब बाजार में फिर से तेजी आए, तो हम तुरंत उसका फायदा उठा सकें और ग्राहकों को माल भेज सकें.
सूरत में लगभग 400 से 425 टेक्सटाइल प्रोसेसिंग इकाइयां हैं. ये सभी सप्ताह में अलग-अलग समय पर दो-दो दिन बंद रहेंगी. बखारिया का कहना है कि उनका लक्ष्य कोयले और अन्य रसायनों के स्टॉक को 3-4 हफ्तों तक चलाना है. अगर ऐसा नहीं किया गया तो अगले 10-15 दिनों में सब कुछ पूरी तरह बंद हो सकता है.
जामनगर में भी संकट गहराया
दूसरी तरफ, जामनगर की प्रसिद्ध ब्रास इंडस्ट्री एलपीजी गैस की भारी कमी का सामना कर रही है. इसकी वजह से उद्योग की आर्थिक गतिविधियों पर ब्रेक लग गया है और उत्पादन पर गहरा असर देखने को मिल रहा है. पिछले लगभग 10 दिनों से एलपीजी गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के चलते ब्रास इंडस्ट्री से जुड़ी कई मशीनें बंद पड़ी हैं.
जामनगर को 'ब्रास सिटी' के नाम से जाना जाता है. यहां छोटे-बड़े मिलाकर करीब 8000 से ज्यादा यूनिट्स हैं. इनमें से लगभग 2000 यूनिट्स पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जबकि कई बड़े उद्योगों में 30 से 40 प्रतिशत तक कामकाज प्रभावित हुआ है.
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इस उद्योग में काम करने वाले मजदूरों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है. बाहर के राज्यों से आने वाले मजदूरों को एलपीजी गैस नहीं मिलने के कारण खाना बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसी स्थिति में कई मजदूर जामनगर छोड़कर अपने-अपने गावों की ओर लौटने लगे हैं.
(इनपुट- दर्शन ठक्कर)