गुजरात में जल क्रांति और कृषि क्रांति की जीवनरेखा मानी जाने वाली नर्मदा परियोजना के सरदार सरोवर बांध का जलस्तर बुधवार को अपने अधिकतम स्तर 138.68 मीटर (455 फीट) तक पहुंच गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने एकता नगर स्थित सरदार सरोवर बांध स्थल पहुंचकर लोकमाता नर्मदा के पावन जल का जल-पूजन और स्वागत-अभिनंदन किया.
ये विशाल जलाशय 10,453 गांवों, 191 शहरों और 7 महानगर पालिकाओं समेत राज्य की लगभग 4 करोड़ से ज्यादा आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराता है.
7वीं बार भरा डैम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2017 को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के बाद से यह बांध अब तक कुल 7 बार अपने अधिकतम जलस्तर तक भरा है. ये उपलब्धि साल 2019, 2020, 2022, 2023, 2024, 2025 और 2026 में हासिल हुई है.
नर्मदा बांध की 138.68 मीटर यानी 455 फीट की सतह पर कुल जल भंडारण क्षमता 9460 मिलियन घन मीटर है. प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के केवल 17 दिनों के अंदर ही बांध के शेष कार्यों को पूरा करने और गेट लगाने की मंजूरी दी गई थी. मुख्यमंत्री ने लगातार तीसरे साल जल-पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाया है.
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बताया कि पूरे नर्मदा बेसिन में उपलब्ध कुल जल को देखते हुए सामान्य वर्षों में राज्य को आवंटित 9 मिलियन एकड़-फीट (MAF) पानी की तुलना में वर्तमान में लगभग 7.9 MAF पानी उपलब्ध है. उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि उपलब्ध इस अमूल्य जल का किफायती, समझदारीपूर्ण और सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल करें. पानी की हर बूंद का अधिकतम सदुपयोग सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.
चालू मानसून के दौरान सुजलाम-सुफलाम और सौनी योजना के जरिए उत्तर गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में व्यापक जल वितरण किया गया है. सुजलाम-सुफलाम योजना के तहत चालू जल वर्ष में 201 MCM यानी 7118 MCFT पानी उपलब्ध कराकर 1028 तालाब भरे गए हैं. वहीं, सौनी योजना के तहत 288 MCM यानी 10189 MCFT पानी देकर 167 तालाब, 1014 चेक-डैम और 45 बांध लबालब किए गए हैं.