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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले PM मोदी, कहा- विवाद में न बदले मतभेद, बताए तीन 'म्यूचुअल' मंत्र

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता ही आपसी संबंधों के लगातार विकास के लिए ज़रूरी आधार है. उन्होंने कहा कि दोनों ही देश तीन 'म्यूचुअल' का पालन करें.

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PM मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. (Photo:AFP)
PM मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. (Photo:AFP)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भरोसे के तीन 'म्यूचुअल' पर जोर दिया है. ये तीन  'म्यूचुअल' हैं- पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित.  इसके अलावा भारत ने कहा है कि दोनों देशों के बीच मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए.

पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच ये मुलाकात ब्रिक्स दिल्ली 2026 के बैनर तले हुई है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 50 मिनट तक द्विपक्षीय बात की. गलवान टकराव के बाद ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पहली द्विपक्षीय मुलाकात थी. दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे वक्त हुई है. जब भारत-चीन संबंधों में पिछले कुछ समय से धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं. मुलाकात में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया.

मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए

दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन के आपसी संबंधों में हुई लगातार प्रगति का स्वागत किया. उन्होंने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और लंबे समय के नज़रिए से देखना चाहिए. मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए. प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन  'म्यूचुअल'  का पालन करना चाहिए -  'म्यूचुअल'  सम्मान,  'म्यूचुअल'  संवेदनशीलता और  'म्यूचुअल'  हित.

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बॉर्डर पर शांति ही विकास का आधार

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता आपसी संबंधों के लगातार विकास के लिए ज़रूरी आधार है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों पक्षों को सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और समझ का पालन करना चाहिए. दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और आपसी सहमति वाले समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई, जो उनके समग्र आपसी संबंधों के राजनीतिक नज़रिए और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों पर आधारित हो. 

व्यापार असंतुलन की ओर ध्यान

पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने लोगों के बीच आपसी संबंधों में हुई प्रगति पर ध्यान दिया और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों और लोगों की आवाजाही को और बढ़ावा देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर, उन्होंने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसमें व्यापार में संरचनात्मक असंतुलन और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं, साथ ही सार्थक और भरोसेमंद बाज़ार तक पहुंच को आसान बनाना भी ज़रूरी है. 

बता दें कि चीन के साथ भारत का व्यापार संतुलन निगेटिव है. यानी कि भारत चीन से आयात ज्यादा करता है और निर्यात कम. 

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दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी सहमति बढ़ानी चाहिए और चुनौतियों का मिलकर सामना करना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और BRICS समिट-2026 की सफलता में उसके योगदान की सराहना की.

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