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धूल, धुआं और प्रदूषण... सर्दियों में दिल्ली की हवा सुधारने के लिए जानिए MCD का पूरा प्लान

सर्दियों में दिल्ली की हवा खराब न हो, इसके लिए एमसीडी ने अभी से कमर कस ली है. जानिए इस बार प्रदूषण से निपटने के लिए क्या-क्या खास तैयारी की गई है.

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सर्दियों में दिल्ली की हवा सुधारने के लिए MCD की तैयारी. (Photo: ITG)
सर्दियों में दिल्ली की हवा सुधारने के लिए MCD की तैयारी. (Photo: ITG)

सर्दियां आते ही दिल्ली की हवा फिर चिंता बढ़ाने लगती है. इस बार MCD ने इसका इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी शुरू कर दी है. करीब 6,127 किलोमीटर सड़कों की सफाई से लेकर 46 प्रदूषण हॉटस्पॉट की निगरानी तक, कई मोर्चों पर काम किया जा रहा है. मकसद साफ है कि सड़क की धूल कम हो, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर नजर रहे, ताकि सर्दियों में हालात बिगड़ने से पहले ही कदम उठाए जा सकें.

MCD के मुताबिक सिर्फ GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू होने के बाद कार्रवाई करना काफी नहीं है. इसी वजह से सड़क की सफाई, गड्ढों की मरम्मत, धूल हटाने, पानी के छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल से लेकर हरित क्षेत्र बढ़ाने तक पर काम चल रहा है. अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 4 लाख से ज्यादा पौधे भी लगाए गए हैं.

6,127 किमी सड़कों पर सफाई

MCD के अधिकार क्षेत्र में करीब 6,127 किलोमीटर सड़कों पर लगभग 57 हजार सफाई मित्र नियमित मैनुअल स्वीपिंग कर रहे हैं. साल 2026 में करीब 1,202 किलोमीटर सड़कों की री-सर्फेसिंग और स्ट्रेंथनिंग का काम भी लिया गया है. सड़कों की खराब सतह से धूल ज्यादा उड़ती है. इसे रोकने के लिए अप्रैल से अगस्त के बीच 6,797 गड्ढों की मरम्मत की गई. MCD का कहना है कि सड़क की बेहतर सतह धूल प्रदूषण को कम करने में मदद करती है.

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2,900 मीट्रिक टन सिल्ट हटाई

धूल पर लगाम लगाने के लिए MCD ने 18 मई 2026 से डीप क्लीन ड्राइव शुरू की. इस दौरान सड़कों पर लंबे समय से जमा धूल और सिल्ट हटाई जा रही है. अब तक करीब 2,900 मीट्रिक टन सिल्ट हटाई जा चुकी है. करीब 1,200 किलोमीटर सड़क की डीप क्लीनिंग भी पूरी हो गई है. प्रमुख सड़कों पर 66 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों से सफाई हो रही है. इनसे रोज करीब 180 टन धूल जमा की जा रही है. MCD 70 नई मशीनें चरणबद्ध तरीके से लगाने की तैयारी में है. 40 अतिरिक्त मशीनें किराये पर लेने के लिए टेंडर भी जारी किया गया है.

सड़क से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए MCD ने 167 वाटर स्प्रिंकलर तैनात किए हैं, जबकि 28 मोबाइल एंटी-स्मॉग गन भी काम कर रही हैं. GRAP के अलग-अलग चरणों के अनुसार इनका इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा. इसके अलावा, C&D सुविधाओं, डंपसाइट और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों पर 20 एंटी-स्मॉग गन लगी हैं. निगम की हाई-राइज इमारतों पर भी 15 एंटी-स्मॉग गन स्थापित हैं. हाल ही में 12 नई वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन खरीदी गई हैं, जिन्हें जरूरत के मुताबिक अलग-अलग जगहों पर लगाया जाएगा.

46 हॉटस्पॉट पर खास नजर

सर्दियों के एक्शन प्लान के तहत MCD ने संयुक्त प्रवर्तन टीमें बनाई हैं. ये टीमें बायोमास जलाने, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से निकलने वाली धूल, अनधिकृत ईंधन, अवैध C&D वेस्ट और कूड़ा डंपिंग पर नजर रखेंगी. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति यानी DPCC ने 46 प्रदूषण हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं. MCD इन इलाकों में प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर रहा है. संबंधित जोन के उपायुक्तों को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है. 11 राजस्व जिलों की निगरानी समितियां भी इन जगहों का निरीक्षण कर रही हैं.

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4 लाख से ज्यादा पौधे लगाए

प्रदूषण से निपटने की तैयारी सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है. MCD ने हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी जोर दिया है. अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 4,00,282 पौधे लगाए गए. इनमें 1,26,866 पेड़, 2,69,882 झाड़ियां और 3,534 बांस शामिल हैं. इसके अलावा, 2026 के लिए चिन्हित 8,68,958 वर्गमीटर ब्राउन पैच के विकास का लक्ष्य भी पूरा किया जा चुका है.

स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली के प्रदूषण से निपटने के लिए सिर्फ आपातकालीन कदम काफी नहीं हैं. सड़क रखरखाव, नियमित सफाई, धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार नजर रखना जरूरी है.
 

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