
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. इस हादसे के बाद दिल्ली के पीजी क्लस्टरों और अवैध निर्माणों की पोल खुल गई है. दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में यूनिवर्सिटी में हॉस्टलों की भारी कमी पर चिंता जताई थी, जिसकी वजह से छात्र प्राइवेट पीजी में रहने को मजबूर हैं.
वहीं दूसरी ओर, MCD के ढीले रवैये का आलम ये है कि इस साल जून में लगभग 28 लाख इमारतों के सर्वे में उसने सिर्फ 19 इमारतों को ही खतरनाक घोषित किया था.
इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने गूगल के सैटेलाइट डेटा ('गूगल रिसर्च ओपन बिल्डिंग्स टेम्पोरल V1') और मैपिंग टेक्नीक का एनालिसिस किया है. इसका मकसद इलाके में बढ़ती छात्र आबादी और अवैध निर्माण के इस सिलसिले को समझना है. इस डेटा से सामने आए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं.
सत्य निकेतन: फैलने की जगह नहीं, तो ऊपर उठाने लगे इमारतें
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन छात्रों का एक बड़ा रेसिडेंशियल हब है. सैटेलाइट डेटा के मुताबिक, जिस स्टडी सेक्टर का एनालिसिस किया गया, उसमें इमारतों की अनुमानित संख्या 2016 में 179 थी, जो 2023 तक बढ़कर 204 हो गई.


साल 2016 में ही ये इलाका पूरी तरह से घना बसा हुआ था. जमीन पर नए निर्माण के लिए जगह न के बराबर बची थी। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी था कि बिना जगह के अतिरिक्त आवास कहां से तैयार हो रहे हैं? सैटेलाइट डेटा इसका सीधा जवाब देता है. इलाके की पुरानी इमारतों के ऊपर अवैध तरीके से एक्स्ट्रा फ्लोर खड़े किए जा रहे थे.
38% हिस्सों में बढ़ी इमारतों की ऊंचाई
सैटेलाइट डेटा में रिमोट सेंसिंग के जरिए 2016 और 2023 के बीच सत्य निकेतन की इमारतों की ऊंचाई का तुलनात्मक अध्ययन किया गया. आंकड़ों के मुताबिक, इलाके के लगभग 38% ग्रिड में इमारतों की ऊंचाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इतना ही नहीं, अध्ययन क्षेत्र के लगभग 12% हिस्सों में इमारतों की ऊंचाई 3 मीटर से भी ज्यादा बढ़ी पाई गई. स्थापत्य कला और निर्माण मानकों के हिसाब से 3 मीटर का मतलब सीधी एक अतिरिक्त मंजिल या फ्लोर जोड़ना होता है. ये डेटा साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे सत्य निकेतन में बिना किसी सुरक्षा जांच या स्ट्रक्चरल मजबूती के बहुमंजिला अवैध निर्माण का खेल चल रहा है.
साउथ कैंपस बेल्ट के दो-तिहाई पीजी अकेले सत्य निकेतन में
छात्रों के हॉस्टल और पीजी बाजार की स्थिति समझने के लिए दिल्ली के छह बड़े छात्र इलाकों का मैपिंग सर्वे भी किया गया. गूगल मैप्स और ऑनलाइन लिस्टिंग के जरिए छह बेल्ट्स में कम से कम 1,275 पीजी और हॉस्टलों की लिस्टिंग पाई गई.
लेकिन इस पूरे सर्वे में सत्य निकेतन का आंकड़ा सबसे अलग और खतरनाक तस्वीर पेश करता है. पूरे साउथ कैंपस बेल्ट में पीजी और हॉस्टलों की कुल 72 लिस्टिंग मिलीं, जिनमें से 47 लिस्टिंग अकेले सत्य निकेतन इलाके की हैं. यानी साउथ कैंपस के टोटल रजिस्टर्ड पीजी बाजार का लगभग दो-तिहाई (65% से ज्यादा) हिस्सा उसी छोटे से सत्य निकेतन इलाके में सिमटा हुआ है, जहां ये दर्दनाक इमारत हादसा हुआ है.
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अवैध बाजार का बड़ा जाल
विशेषज्ञों का मानना है कि ये तो सिर्फ वो आंकड़े हैं जो ऑनलाइन या विज्ञापनों में मौजूद हैं. असल में दिल्ली के इन छात्र इलाकों में बिना किसी रजिस्ट्रेशन और बिना विज्ञापन के हजारों अनधिकृत पीजी चल रहे हैं.
हॉस्टलों की कमी के चलते बेबस छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर इन बहुमंजिला जर्जर इमारतों में रहने को मजबूर हैं, जबकि मकान मालिक और प्रशासनिक तंत्र आंखें मूंदकर किसी बड़े हादसे का इंतजार करते रहते हैं.