दिल्ली यूनिवर्सिटी
दिल्ली युनिवर्सिटी (DU), भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित एक कॉलेजिएट सेंट्रल यूनिवर्सिटी है. इसकी स्थापना 1922 में केंद्रीय विधानसभा के एक अधिनियम द्वारा की गई थी और इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) प्रतिष्ठित संस्थान (IoE) के रूप में मान्यता दी (Delhi University Foundation) . एक कॉलेजिएट विश्वविद्यालय के रूप में, इसके मुख्य कार्यों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विभागों और इसके कॉलेजों के बीच विभाजित किया गया है. इसकी स्थापना के समय तीन कॉलेजों, दो संकायों और 750 छात्र हुआ करते थे. दिल्ली विश्वविद्यालय तब से भारत का सबसे बड़ा उच्च शिक्षा संस्थान और दुनिया में सबसे बड़ा संस्थान बन गया है.
डीयू के 16 संकाय और 86 विभाग अपने उत्तर और दक्षिण कैपंसों में बांटा गया हैं. इसमें 77 घटक कॉलेज और पांच अन्य संस्थान हैं (DU North and South Campuses). भारत के उपराष्ट्रपति (Vice President of India) विश्वविद्यालय के कुलपति (University Chancellor) के रूप में कार्य करते हैं और भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर (Pro Chancellor) हैं.
डीयू में 132,435 नियमित छात्र, जिनमे 114,494 स्नातक और 17,941 स्नातकोत्तर के हैं. गैर-औपचारिक शिक्षा कार्यक्रमों में 261,169 छात्र हैं (DU Students). दिल्ली युनिवर्सिटी के केमिस्ट्री, जियोलॉजी, जूलॉजी, सोशियोलॉजी और हिस्ट्री विभागों को सेंटर्स ऑफ एडवांस्ड स्टडीज का दर्जा दिया गया है. इसके अलावा, विश्वविद्यालय के कई विभागों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्य के सम्मान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विशेष सहायता कार्यक्रम के तहत अनुदान प्राप्त होता है (Delhi University Departments).
वर्ष 2022 से DU ने CUET यानी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर प्रवेश देगा. पहले 12वीं प्रतिशत अंक के आधार पर प्रवेश दिया जाता था और अब 12वीं कक्षा के प्रतिशत अंक समान CUET स्कोर हासिल करने वाले छात्रों के लिए टाई-ब्रेकर के रूप में कार्य करेंगे (Entrance Exam DU Admission 2022).
दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध 91 कॉलेज हैं, जो पूरे दिल्ली में फैले हुए हैं. नई दिल्ली के मध्य भाग में स्थित जाकिर हुसैन कॉलेज 300 साल की विरासत के साथ दिल्ली का सबसे पुराना कॉलेज है (Zakir Hussain College, Delhi).
दिल्ली विश्वविद्यालय के 20 कॉलेज छात्रों को छात्रावास की सुविधा प्रदान करते हैं लेकिन यह सुविधा एक खास संख्या में कॉलेजों तक सीमित है. छात्रावासों का आवंटन भी योग्यता के आधार पर किया जाता है (DU Hostels).
डूसू चुनाव में मतदान खत्म हो चुका है. इस बार मुकाबला ABVP, NSUI और वामपंथी छात्र संगठनों (AISA-SFI) के बीच रहा. वोटिंग दो पारियों, मॉर्निंग और इवनिंग, में हुई. चुनाव के दौरान किसी तरह की हिंसा न हो, इसके लिए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री के जवान तैनात रहे.
दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनावों के बीच माहौल गरमा गया है. यूनिवर्सिटी कैंपस में चुनावी सरगर्मी के बीच दो छात्र गुट आपस में भिड़ गए और जमकर बवाल हुआ. यह घटना फैकल्टी गेट के पास की है, जहां दोनों गुटों के बीच जमकर लात-घूसे और लाठी-डंडे चले. इस हिंसक झड़प में एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का आरोप है कि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने हरिमंदिर के पास उन पर हमला किया. एबीवीपी ने दावा किया है कि एनएसयूआई के लोगों ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ बेरहमी से मारपीट की.
चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल जॉइंट मीटिंग हुई, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कॉलेजों के प्राचार्यों, हॉस्टल प्रोवोस्ट-वार्डन और दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया.जानिए- क्या तय हुआ?
हजारों युवा का सपना होता है दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने का, जिसके लिए वह बहुत मेहनत भी करते हैं. डीयू के कई कॉलेजों में एडमिशन के लिए 12वीं के नंबरों के आधार पर एडमिशन देने की बात सामने आई थी, इसके बाद डीयू ने 4 साल का ग्रेजुएशन पूरा करने वाले छात्रों को सीधा पीएचडी में एडमिशन देने की बात कही थी, जिसकी लास्ट डेट बढ़ा दी गई है.
कैंपस की असली बहसों को दरकिनार कर उम्मीदवारों के निजी अकादमिक बैकग्राउंड, वायरल मार्कशीट और आरोप-प्रत्यारोप के जरिए वोट साधने की होड़ लगी है. छात्र संगठन प्रत्याशियों पर निजी हमले कर रहे हैं, जिसे आम छात्र कतई पसंद नहीं कर रहा है.
डीयू छात्रसंघ चुनाव 2026 में इस बार परंपरागत नारों और बुनियादी मुद्दों से इतर एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है. ABVP और NSUI दोनों के मेनिफेस्टो में जेन जी की प्राथमिकताओं का खास ख्याल रखा गया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लेकर 24×7 लाइब्रेरी, मेंस्ट्रुअल लीव, पिंक बूथ और सत्य निकेतन हादसे के बाद सुरक्षित हॉस्टल का मुद्दा इस बार चुनाव के केंद्र में है, जो डीयू की छात्र राजनीति में एक नया मोड़ दिखा रहा है.
ABVP और NSUI ने अपने घोषणापत्र दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 के लिए जारी कर दिए हैं. ABVP ने सुरक्षित और किफायती छात्र आवास, नए हॉस्टल, महिला सुरक्षा, समय पर परीक्षा परिणाम सहित कई मुद्दों को प्राथमिकता दी है. वहीं, NSUI ने जवाबदेही, छात्र अधिकार, किफायती PG, किराया नियंत्रण, सस्ता मेट्रो पास का वादा किया है.
जेल जाने का खौफ, परिवार का पेट पालने की चिंता और कर्मचारियों की रोजी-रोटी का सवाल... लेकिन इसके बावजूद धर्मपाल ने घुटने टेकने से इनकार कर दिया. यह कहानी सिर्फ एक दुकान बचाने की नहीं, बल्कि भारत में 'सस्ती शिक्षा और ज्ञान के अधिकार' की सबसे बड़ी मिसाल है. जानें पूरी कहानी...
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 की तैयारी पूरी कर ली गई है और साथ ही उम्मीदवारों के नाम की घोषणा भी कर दी गई है. डीयू का छात्रसंघ चुनाव बेहद फेमस हैं, लेकिन इस बीच लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि DUSU अध्यक्ष को क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं और क्या उनको सैलरी भी मिलती है?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के लिए केंद्रीय पैनल घोषित करने के बाद कॉलेजों और छात्रावासों में प्रचार तेज कर दिया है. महिला सुरक्षा, सुरक्षित आवास और हॉस्टल की सीटें बढ़ाने के प्रमुख मुद्दों के साथ संगठन सभी चार सीटों पर जीत का दावा कर रहा है.
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग दिल्ली विश्वविद्यालय के अंदर यूजीसी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी करने लगे. एक वीडियो में किसी ऑडिटोरियम के अंदर से कुछ लोग एक शख्स को घसीटते हुए बाहर निकालते नजर आ रहे हैं. कई लोग 'गो बैक' के नारे लगा रहे हैं.
ABVP ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026-27 के लिए चार उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं. अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, उपाध्यक्ष के लिए इशु मौर्य, सचिव के लिए रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव के लिए लक्ष्य राज सिंह को मैदान में उतारा गया है. ये उम्मीदवार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट तथा कानूनी पढ़ाई कर रहे छात्र हैं, जो खेल और शिक्षा के संगम को दर्शाते हैं.
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026-27 के लिए NSUI ने अपने अधिकृत 'सेंट्रल 4' पैनल का ऐलान किया है जिसमें विजय शंकर मीणा अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हैं. NSUI का यह पैनल फीस वृद्धि रोकने, हॉस्टल सुविधाओं का विस्तार, महिला सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार जैसे मुद्दों पर चुनावी लड़ाई लड़ रहा है.
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026-27 के लिए ABVP ने अपने चार केंद्रीय पदों के उम्मीदवारों का पैनल घोषित कर दिया है. यश डबास को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया है. चुनाव 18 सितंबर को होगा और नतीजे 19 सितंबर को घोषित किए जाएंगे. ABVP और NSUI के बीच यह मुकाबला सुरक्षा, हॉस्टल सुविधाओं और कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर केंद्रित है.
कॉलेजों को मौजूदा छात्रावासों की क्षमता और सुविधाओं का आकलन करने के साथ-साथ निर्माणाधीन हॉस्टलों को जल्द पूरा कराने की दिशा में काम करने को कहा गया है. विश्वविद्यालय का जोर यह है कि तैयार होने वाली आवासीय सुविधाएं बिना अनावश्यक देरी के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएं.
दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला तो मिल जाता है, लेकिन सुरक्षित सिर छुपाने की जगह नहीं मिलती. 90 से ज्यादा कॉलेजों में से महज 19 के पास हॉस्टल हैं. सत्या निकेतन में पीजी ढहने के बाद अब कॉर्पोरेट वर्ल्ड से अशनीर ग्रोवर ने सिस्टम पर सवाल उठाए हैं. ग्रोवर का कहना है कि DU को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए 20,000 करोड़ के फंड की जरूरत है, वरना छात्र ऐसे ही विदेशों का रुख करते रहेंगे.
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद इस इलाके में अवैध बहुमंजिला निर्माण और पीजी की बढ़ती संख्या की समस्या सामने आई है. गूगल सैटेलाइट डेटा से पता चला है कि 2016 से 2023 के बीच इमारतों की ऊंचाई में 38% बढ़ोतरी हुई है. वहीं दिल्ली के छात्र पीजी की भारी कमी के चलते जोखिम भरे अवैध निर्माणों में रहने को मजबूर हैं.
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत ढहने से हुई 7 मौतों ने पूरे साउथ कैंपस को खौफ में डाल दिया है. ₹25 हजार तक भारी-भरकम किराया वसूलने वाले प्राइवेट हॉस्टलों की असलियत सामने आते ही दिल्ली विश्वविद्यालय के आउटस्टेशन छात्रों में पलायन मच गया है. मलबे का डर, जर्जर छतें और घर से रोते माता-पिता के फोन, हादसे के बाद छात्र सूटकेस समेटकर वापस लखनऊ, राजस्थान और हरियाणा लौटने को मजबूर हैं.
सत्य निकेतन में जर्जर इमारत ढहने से हुए हादसे ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का गुस्सा भड़का दिया है. पर्याप्त हॉस्टल न मिलने के कारण असुरक्षित और महंगे प्राइवेट पीजी में रहने को मजबूर छात्रों ने अब सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोल दिया है. "यह हादसा नहीं, हत्या है" के नारों के साथ छात्र मुआवजे, पीजी के सेफ्टी ऑडिट और यूनिवर्सिटी प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.
दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग हादसे के बाद आसपास के PG में रहने वाले छात्रों में डर बढ़ गया है. परिवारों के लगातार फोन के बाद कई छात्र लखनऊ, राजस्थान और चंडीगढ़ लौट रहे हैं. कुछ छात्र रिश्तेदारों और कॉलेजों में अस्थायी तौर पर रुक रहे हैं. इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की जानकारी है और पुलिस ने इमारत मालिक हरिराम को गिरफ्तार किया है.
कई छात्रों का दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ना किसी सपने से कम नहीं है. लेकिन वहां रहने की समस्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. मान लीजिए कि अगर डीयू में छात्रों की संख्या 7 लाख से ज्यादा है, तो हॉस्टल केवल 7 हजार छात्रों को ही मिल पाता है. इसकी वजह से छात्रों को पीजी या फ्लैट के भरोसे रहने रहता है, जिससे उन्हें कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है.