
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत के ढहने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है. दिल्ली पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी बिल्डिंग मालिक हरिराम, उसकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. वहीं, कई अफसरों को भी सस्पेंड कर दिया गया है.
अदालत ने आरोपी हरिराम और उसकी पत्नी उर्मिला गुप्ता को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. वहीं, उसके बेटे महेश गुप्ता को दो दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है. लेकिन इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी और सस्पेंशन से व्यवस्था सुधर जाएगी?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस हादसे के बाद सत्य निकेतन में जर्जर इमारतों को गिराने का आदेश दिया है. बुधवार को प्रशासन इन इमारतों को डिमोलिश करेगा. इसके साथ ही सीएम रेखा मंगलवार को एक बार फिर घायलों से मिलने एम्स पहुंची जहां उन्होंने घायलों के परिजनों को 5-5 लाख के मुआवजे का चेक सौंपा.

अब तक 5 अधिकारी सस्पेंड
इस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया और इसी कड़ी में MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. सस्पेंड होने वाले अधिकारियों में राकेश कुमार (डिप्टी कमिश्नर), रणवीर सिंह- (सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर), ललित कुमार गोयल (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर), सुनील चौहान (असिस्टेंट इंजीनियर) और आशीष कुमार राय (जूनियर इंजीनियर) शामिल हैं.
दिलचस्प और हैरान करने वाली बात ये है कि इनमें से तीन अधिकारी- DC राकेश कुमार, SE रणवीर सिंह और JE आशीष कुमार राय, मालवीय नगर के हौजरानी इलाके में हुए रेस्टोरेंट अग्निकांड के समय भी MCD के दक्षिण जोन में ही तैनात थे. मालवीय नगर हादसे के दौरान बिल्डिंग विभाग के इन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. लेकिन सत्य निकेतन हादसे के बाद इन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया गया.
हॉस्टलों के 'स्ट्रक्चरल ऑडिट' के आदेश
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सख्त निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने दिल्ली के तमाम पेइंग गेस्ट हॉस्टलों के 'स्ट्रक्चरल ऑडिट' के आदेश दिए हैं. छात्रों के गढ़ माने जाने वाले इलाकों जैसे- मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, साकेत और सत्य निकेतन पर कड़ी नजर रखने और चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं.
जमींदोज हुई इस इमारत के बराबर वाली बिल्डिंग का हाल भी उससे कुछ अलग नहीं है. बिना किसी पिलर के खड़ी इस इमारत की दीवारें जर्जर हाल में हैं. ऐसे में अब प्रशासन ने इसे गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी है.
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गिरफ्तारी-सस्पेंशन के बीच ये बड़े सवाल बरकरार
इमारत हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत होने की खबर है. इनमें 5 छात्र और दो मजदूर शामिल हैं. इसके साथ ही कई लोग घायल हैं जिनका एम्स में इलाज चल रहा है. ऐसे में ये सवाल अब भी बरकरार है कि क्या आधिकारियों को सिर्फ सस्पेंड कर देने से आगे इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है?
इन सवालों के जवाब मिलना बाकी
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने कई सवाल खड़े किए हैं, इससे पहले मालवीय नगर अग्निकांड और राजेंद्र नगर कोचिंग हादसे ने लोगों की सुरक्षा के सवाल को बड़ा बना दिया था. अब सवाल उठता है कि हर बार अधिकारियों के सस्पेंशन, कुछ दिनों तक सीलिंग की कार्रवाई और फिर जस का तस वाले हालात कब तक बने रहेंगे? क्या कोई ठोस नीति या एक्शन होगा. ताकि आगे ऐसा कोई हादसा न हो, सिस्टम की लापरवाही फिर जानलेवा साबित न हो? क्या अफसरों ऐसी खतरनाक इमारतों को बनने से पहले रोकेंगे, या उसपर हादसे से पहले कार्रवाई करेंगे या जानलेवा हालात ऐसे ही बने रहेंगे?
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
इमारत गिरने का ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. इस मामले में एमिकस क्यूरी अजीत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर सत्य निकेतन में बार-बार होने वाली ऐसे हादसों पर चिंता जताई है. उन्होंने बताया कि इस इलाके में अप्रैल 2022 में भी एक इमारत गिरी थी. बार-बार हो रहे इन हादसों ने नियमों के पालन और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
एमिकस क्यूरी ने सिफारिश की है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) समेत शहर के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास बने पेइंग गेस्ट (PG), निजी हॉस्टलों और छात्र आवासों का तुरंत सुरक्षा जांच और नियमित सेफ्टी ऑडिट कराया जाए. इस ऑडिट के तहत इमारतों के नक्शे, निर्माण गुणवत्ता, बेसमेंट के उपयोग, ढांचागत मजबूती, फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास मार्गों की बारीकी से जांच होगी.
दूसरी ओर, दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस हादसे में 7 लोगों की मौत पर कड़ा रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने MCD और DU को फटकार लगाते हुए केंद्र, दिल्ली सरकार, पुलिस और एमसीडी से 10 दिनों में जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी.