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कमर तक पानी, कंधे पर अर्थी और कीचड़ में फिसलते कदम... दुर्ग के गांव की दर्दनाक तस्वीर

दुर्ग के सेमरिया गांव में भारी बारिश के बाद रास्ते कमर तक पानी और कीचड़ से भर गए. ऐसे मुश्किल हालात में ग्रामीणों को शव यात्रा निकालनी पड़ी. 30-40 लोगों ने पानी और कीचड़ के बीच अर्थी को कंधा दिया. यह तस्वीर गांव की बदहाल सड़क और बारिश में ग्रामीणों की परेशानी को बयां करती है.

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पूरी घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें ग्रामीण कीचड़ में अर्थी लेकर जाते दिख रहे हैं (Photo- ITG)
पूरी घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें ग्रामीण कीचड़ में अर्थी लेकर जाते दिख रहे हैं (Photo- ITG)

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के सेमरिया गांव में बारिश के मौसम में बदहाल सड़क ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. हालात ऐसे हैं कि यहां किसी की मौत होने पर शव को श्मशान घाट तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है. हाल ही में 28 वर्षीय युवक बलराम मरकाम की अंतिम यात्रा के दौरान करीब 30-40 ग्रामीणों को अर्थी को कंधा देना पड़ा. कमर तक भरे पानी और दलदल जैसे रास्ते से ग्रामीण शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे. इस दौरान कई लोग फिसले, जबकि कुछ ग्रामीण रास्ते की मुश्किलों के चलते पीछे रह गए.

इस पूरी घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें ग्रामीण बारिश के पानी और कीचड़ से भरे रास्ते के बीच अर्थी को लेकर जाते दिखाई दे रहे हैं. रास्ते में एक नाला भी पड़ता है, जहां पानी का स्तर काफी बढ़ गया था. ग्रामीणों को इसी नाले से होकर श्मशान घाट तक जाना पड़ा.

ग्रामीणों के मुताबिक, अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के बागडूमर से आश्रित गांव सेमरिया तक करीब चार किलोमीटर का रास्ता बारिश के मौसम में बेहद खराब हो जाता है. सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं, जिनमें पानी भरने के बाद पूरा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है. गांव से श्मशान घाट तक करीब डेढ़ किलोमीटर के रास्ते की हालत भी बेहद खराब है.

ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी इस रास्ते से आवाजाही मुश्किल रहती है, लेकिन बारिश में स्थिति और खराब हो जाती है. खासकर किसी की मौत होने पर शव को श्मशान घाट तक ले जाने में लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है.

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'चार लोगों की जगह 20-30 लोगों को देना पड़ता है कंधा'

सेमरिया की रहने वाली आशा निषाद ने आजतक से बातचीत में कहा कि वह पिछले 12 साल से गांव में रह रही हैं और इतने वर्षों में सड़क की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में किसी की मौत होने पर शव ले जाना बहुत मुश्किल हो जाता है और अर्थी के गिरने तक का खतरा रहता है.

आशा निषाद ने बताया कि हाल ही में एक शव को ले जाते समय लोग फिसलते-फिसलते बचे. उन्होंने कहा कि जहां सामान्य तौर पर छह लोगों को अर्थी उठानी चाहिए, वहीं खराब रास्ते की वजह से 20-30 लोगों को साथ लगना पड़ता है. उन्होंने सरकार से सड़क बनवाने की मांग की.

सरपंच बोलीं- हर साल बारिश में यही हाल

बागडूमर-सेमरिया की सरपंच दामनी साहू ने कहा कि मुक्ति धाम तक जाने वाली सड़क की स्थिति बेहद खराब है और हर साल बारिश के मौसम में ग्रामीणों को इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है. उन्होंने कहा कि वीडियो वायरल होने के बाद लोगों को इस समस्या की जानकारी हुई.

सरपंच के मुताबिक, गांव में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग रहते हैं और गांव को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा गोद लिए जाने की बात भी कही जाती है. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को गांव की समस्या से अवगत कराया गया है और कलेक्टर को भी इसकी जानकारी दी गई है. उनका कहना है कि गांव के इस दर्द को समझते हुए सड़क का निर्माण कराया जाना चाहिए.

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कलेक्टर बोले- सड़क के लिए भेजा गया है प्रस्ताव

दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका है. उन्होंने कहा कि श्मशान घाट तक जाने वाली सड़क के लिए ग्रामीण सड़क योजना के अभियंता को सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं. सर्वे के बाद सड़क को योजना के नेटवर्क में शामिल करने के लिए जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा.

सेमरिया गांव दुर्ग जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर और भिलाई स्टील प्लांट से करीब 20 किलोमीटर दूर है. यह अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के धमधा जनपद पंचायत के अंतर्गत बागडूमर ग्राम पंचायत का आश्रित गांव है. बारिश के मौसम में सड़क की बदहाली ने यहां ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी के साथ-साथ अंतिम यात्रा तक को मुश्किल बना दिया है.

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