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कौन है नक्सल कमांडर हिडमा, जिसे माना जा रहा है बीजापुर हमले का मास्टरमाइंड

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि माओवादियों के मिलिट्री कमीशन का वह चीफ भी नियुक्त किया गया है. हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. हिडमा हमेशा छिपकर रहता है. उसकी हाल की कोई तस्वीर भी उपलब्ध नहीं है.

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टॉप नक्सल कमांडर हिडमा. (फाइल फोटो)
टॉप नक्सल कमांडर हिडमा. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हिडमा के सिर है 40 लाख का इनाम
  • हिडमा की टीम में महिला नक्सली भी शामिल
  • NIA दर्ज कर चुकी है हिडमा पर हत्या का केस

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुए नक्सली हमले में अबतक 22 जवानों के शव बरामद हुए हैं और एक जवान अब भी लापता है. इस हमले के पीछे टॉप नक्सल कमांडर हिडमा का नाम सामने आ रहा है. वह कई हमलों में शामिल रहा है और निर्मम हत्याओं के लिए कुख्यात है. यह हमला अचानक नहीं हुआ. इस हमले के पीछे सोची-समझी साजिश बताई जा रही है.

कौन है टॉप नक्सली कमांडर हिडमा

हिडमा की उम्र करीब चालीस साल है. वो सुकमा जिले के पुवार्ती गांव का रहने वाला है.उसने 90 के दशक में नक्सली हिंसा का रास्ता चुना और तबसे कई निर्दोष लोगों की जान ले चुका है. वह माओवादियों की पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीजीएलए) बटालियन-1 का हेड है और ऐसे घातक हमले करता रहता है. वह माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZ)  का सदस्य है. वह सीपीआई (माओवादी) की 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी  का युवा सदस्य है. 

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि माओवादियों के मिलिट्री कमीशन का वह चीफ भी नियुक्त किया गया है. हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. हिडमा हमेशा छिपकर रहता है. उसकी हाल की कोई तस्वीर भी उपलब्ध नहीं है. उसे सिर पर 40 लाख का इनाम है.हिडमा के पास एके-47 जैसे खतरनाक हथियार हैं और उसकी टीम में 180-250 नक्सली हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं. भीम मांडवी की हत्या के मामले में एनआईए ने उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है.

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जनवरी से जून तक के महीने में नक्सलियों का खास अभियान

दरअसल, जनवरी से जून के महीने के बीच में नक्सली टैक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (TCOC) चलाते हैं. इस दौरान सुरक्षाबलों को खतरनाक हमलों के जरिए निशाना बनाते हैं. इन महीनों के दौरान पेड़ों से पत्ते गिर चुके होते हैं. ऐसे में सुरक्षबलों की गतिविधियां नक्सलियों को साफ नजर आती हैं. दूर बैठकर ही नक्सली सुरक्षाबलों की गतिविधियां भांप लेते हैं. पिछले कई बार से इन महीनों में नक्सलियों ने टीसीओसी ऑपरेशन किए हैं और जवानों की जान ली है.

बीते साल मार्च में सुकमा में नक्सलियों ने 17 लोगों की जान ली थी. अप्रैल 2019 में बीजेपी विधायक भीमा माडवी, उनके ड्राइवर और तीन सुरक्षाकर्मियों की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी. साल 2010 के अप्रैल महीने में तडमेटला में 76 जवानों की नक्सलियों ने जान ले ली थी.

 

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