महज दो साल की उम्र में खुशी ने अपने बड़े भाई सोम को स्टेम सेल डोनेट किया था. बहन के इस दान से भाई को नई जिंदगी मिली है. सोम को थैलेसीमिया नाम की खतरनाक बीमारी थी. इस बीमारी की वजह से बार- बार उसको खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती थी. एक छोटे से गांव में रहने वाले गरीब परिवार के लिए हर महीने खून और दवाइयों का इंतजाम करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी.
सोम यादव जब सिर्फ पांच महीने का था तब उसके माता- पिता को पता चला कि वो थैलेसीमिया नाम की खतरनाक बीमारी से पीड़ित है. इस बीमारी की वजह से बार- बार दोनों बच्चों को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती थी. परिवार में एक और बेटी, खुशी ने जन्म लिया. डॉक्टरों ने सलाह दी कि सोम की बीमारी को ठीक करने के लिए स्टेम सेल डोनेशन चाहिए, लेकिन उसके लिए कोई मैचिंग डोनर नहीं मिल रहा था. डॉक्टरों ने भी कह दिया था कि बिना मैच के ट्रांसप्लांट मुश्किल है. ऐसे में एक दिन परिवार एक हेल्थ कैंप में गया. जहां उनको मुफ्त HLA टाइपिंग की सुविधा मिली, इत्तेफाक से, खुशी अपने भाई सोम के लिए बिल्कुल सही डोनर साबित हुई और फिर स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया.
आम बच्चों की तरह जिंदगी जी रहा सोम
महज दो साल की उम्र में खुशी ने अपने भाई सोम को स्टेम सेल डोनेट किया. आज सोम पूरी तरह स्वस्थ है. वह आम बच्चों की तरह अपनी ज़िंदगी जी रहा है और वो स्कूल भी जाता है. इस मामले में डोनेशन के बाद सोम का लगातार फॉलो अप किया गया और अब करीब तीन साल की निगरानी के बाद डॉक्टरों ने उसको फिट घोषित कर दिया है.
डॉ. अजय कुमार के मुताबिक, स्टेल सेल डोनेशन के बाद करीब 2 साल मरीज के इम्यून सिस्टम को पूरी तरह से रीबूट और मजबूत होने में लग सकते हैं. इस दौरान ये भी देखा जाता है कि बीमारी का वापस न आना आए. अगर ट्रांसप्लांट के कुछ सालों बाद तक बीमारी दोबारा नहीं लौटती है, तो ही ट्रांसप्लांट को सफल माना जाता है. इस मामले में सोम का वह समय बीत गया है और वह एकदम फिट है.
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क्या होता है स्टेम सेल डोनेश
स्टेम सेल डोनेशन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर से रक्त बनाने वाल स्टेम सेल्स को निकालकर ब्लड कैंसर, थैलेसीमिया या एप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज को नया जीवन दिया जाता है. जो व्यक्ति स्टेम सेल डोनेट करता है उसके शरीर में कुछ समय बाद ये फिर से पर्याप्त मात्रा में बन जाती हैं. सोम के परिवार के
DKMS फ़ाउंडेशन इंडिया ने इस पूरे मामले में मदद की थी.
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क्या होती है थैलेसीमिया की बीमारी
थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है जिसमें शरीर में जरूरत के हिसाब से हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता है.हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में पाया जाने वाला प्रोटीन है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता है. इसकी कमी के कारण मरीज के शरीर में खून की खतरनाक बीमारी हो जाती है. यह दो प्रकार का होता है थैलेसीमिया मेजर और थैलेसीमिया माइनर, थैलेसीमिया मेजर में हर कुछ दिनों में खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है. इसका इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट है.