आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव और चिंता होना आम बात है, लेकिन जब यही चिंता बार-बार होने लगे, दिल की धड़कन तेज हो जाए, घबराहट होने लगे या बिना किसी साफ वजह के डर महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह एंग्जाइटी का संकेत हो सकता है. एंजाइटी का लंबे समय तक बने रहना खराब मेंटल हेल्थ का संकेत है. एक्सपर्ट का कहना है कि बीते कुछ सालों में डिजिटल डिवाइस का यूज बहुत बढ़ गया है. ये भी मेंटल हल्थ खराब होने का कारण बन रहा है.
अध्यक्ष - फोर्टिस हेल्थकेयर और अदायू माइंडफुलनेस
फोर्टिस हेल्थकेयर के मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेज विभाग और अदायू माइंडफुलनेस के डायरेक्टर डॉ. समीर पारिख ने मानसिक समस्याओं के बारे में Aajtak.in को बताया है. वह कहते हैं कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनियाभर में डिप्रेशन और एंग्जाइटी के मामलों में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बढ़ोतरी की बात कही थी. उनके मुताबिक, बीते कुछ सालों में डिजिटल डिवाइस का बढ़ता इस्तेमाल, नशे की लत और अकेलापन ऐसे कारण बनकर उभरे हैं, जो लोगों की मानसिक सेहत को खराब कर सकते हैं.
डिजिटल इस्तेमाल, नशा और अकेलापन बढ़ा रहे परेशानी
डॉ. समीर पारिख बताते हैं कि आज लोगों की जिंदगी में डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है. लोग घंटों मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं. इससे आपसी रिश्तों पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, नशे की आदत भी मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है.
अकेलापन भी एक बड़ी समस्या है. कई बार लोगों के आसपास परिवार और दोस्त होते हैं, लेकिन वे अपनी परेशानियां किसी से साझा नहीं कर पाते. लगातार अकेलापन महसूस करना तनाव और मानसिक समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसमें सबसे बड़ी चिंता ये है कि लोग मानसिक परेशानी होने के बावजूद कई लोग इलाज के लिए डॉक्टर के पास नहीं जाते है.
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क्या होती है एंग्जाइटी?
एंग्जाइटी का मतलब है चिंता या घबराहट महसूस करना. कभी कभी ये होना कोई चिंता की बात नहीं है, लेकिन अगर ये जरूरत से ज्यादा हो जाए, लंबे समय तक बनी रहे, आप रोज इसको महसूस करें, ये आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे तो यह एंग्जाइटी डिसऑर्डर का संकेत हो सकती है. एंग्जाइटी होने पर व्यक्ति को बेचैनी, डर, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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इलाज से ठीक हो सकती है समस्या
डॉ. समीर पारिख के मुताबिक, एंग्जाइटी की समस्या के इलाज के लिए मदद उपलब्ध है. हर व्यक्ति की परेशानी और लक्षण अलग हो सकते हैं, इसलिए इलाज भी उसी के अनुसार तय किया जाता है। कुछ लोगों को काउंसलिंग या साइकोथेरेपी से फायदा होता है, जबकि कुछ को दवाओं की जरूरत पड़ सकती है. कई मामलों में दोनों तरीकों से इलाज किया जाता है. ये सब मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है.