नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ से अब तक 300 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं. करीब 1000 लोगों की तलाश जारी है. दोबारा बाढ़ आने का खतरा भी है. राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन इस बीच एक और डर है. वह है बाढ़ वाले इलाकों में एक साथ कई बीमारियों के फैलने का. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाढ़ जैसी आपदाओं के बाद कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें पानी और भोजन से होने वाली बीमारियां, सांस से जुड़ी बीमारियां और स्किन के इंफेक्शन शामिल हैं.
बाढ़ के दषित पानी पीने से पेट और आंतों की बीमारियां हो सकती हैं, जैसे हेपेटाइटिस ए वायरस ,एंटरिक फीवर, शिगेलोसिस और हैजा. बाढ़ से लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी का भी रिस्क है. यह संक्रमित जानवरों के पेशाब से दूषित बाढ़ के पानी के संपर्क में आने से होती है. जिन इलाकों में बाढ़ का सबसे भयनक रूप देखने को मिला है वहां इस बीमारी का सबसे अधिक रिस्क है. इसमें लोगों को तेज बुखार से लेकर स्किन पर दाने निकल सकते हैं.
बाढ़ के बाद क्यों फैल सकती हैं बीमारियां
दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. एल.एच कुमार ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि बाढ़ के दौरान एक नई बल्कि कई बीमारियां एक साथ फैल सकती हैं. ऐसा गंदा पानी आने के बाद पैथोजन और बैक्टीरिया के एक्टिव होने से होता है. गंदे पानी से ई. कोलाई, रोटावायरस और नोरोवायरस एक्टिव हो जाते हैं. ये बीमारियां खराब साफ-सफ़ाई, बाढ़ के पानी का घरों में आना और विस्थापन के कारण होने वाली भीड़-भाड़ के कारण भी फैलती है. बाढ़ वाले इलाकों में हेपेटाइटिस ए वायरस ,एंटरिक फीवर, शिगेलोसिस और हैजा फैलने का रिस्क रहता है.
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एंटरिक फीवर, शिगेलोसिस और हैजा क्या बीमारियां होती हैं
डॉ. घोटेकर बताते हैं कि एंटेरिक फ़ीवर की बात करें तो इसको आम भाषा में मियादी बुखार कहते हैं. यह बुखार धीरे- धीर बढ़ता है और 100 से अधिक हो सकता है, साथ ही पेट और आंतों से जुड़े लक्षण भी हो सकते हैं. पेट और आंतों से जुड़े ये लक्षण बच्चों और बड़ों दोनों में हो सकते हैं और इनमें पेट दर्द या मरोड़, जी मिचलाना, उल्टी और दस्त शामिल हैं, कब्ज़ भी हो सकता है, खासकर बड़ों में ज्यादा रिस्क है.
शिगेलोसिस भी बाढ़ वाले इलाकों में होने वाली एक आम बीमारी है. इसमें बुखार, सिरदर्द, बेचैनी, उल्टी और पानी जैसे दस्त हो सकते हैं. हैजा को कोलेरा कहते हैं ये बीमारी भी दूषित पानी से होती है. इससे पेट संबंधी समस्याएं होने लगती है. स्किन के इंफेक्शन होने का भी रिस्क होता है. इसमें चोट लगने और दूषित पानी के संपर्क में आने से सॉफ्ट टिश्यू और स्किन में इन्फेक्शन हो सकते हैं, सॉफ्ट टिश्यू और स्किन के इन्फेक्शन के लिए आम तौर पर ज़म्मेदार बैक्टीरिया में स्टैफिलोकोकस ऑरियस, स्ट्रेप्टोकोकस पाइोजेन्स और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा हो सकता है.
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बाढ़ के दौरान और उसके बाद बीमार होने से बचने के लिए क्या करें
अगर पीने के लिए उपलब्ध पानी की क्वालिटी पर शक हो, तो पानी को 1 मिनट तक उबालकर पीएं
हाथों को साबुन और साफ पानी से धोना चाहिए:
कच्चे खाने को पके हुए खाने से अलग रखें
खाने को सुरक्षित तापमान पर स्टोर करके रखना जरूरी है
मृत लोगों के शवों की जल्द से जल्द पहचान भी जरूरी है