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National Doctors' Day 2026: बेझिझक शराब पीने से लेकर झटपट एंटीबायोटिक लेने तक... डॉक्टरों की चिंता बढ़ा रही मरीजों की ये आदतें

'नेशनल डॉक्टर डे' 2026 पर डॉक्टरों ने सेहत से जुड़े आम मिथकों को उजागर किया है. डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया या घरेलू सलाह की बजाय सही मेडिकल जानकारी पर भरोसा करें. ये मिथक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं और बीमारियों का कारण बन सकते हैं.

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 'राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे'
'राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे'

हर साल 1 जुलाई को National Doctors' Day मनाया जाता है. इस दिन समाज में डॉक्टरों के योगदान को याद किया जाता है. बुधवार को देशभर में यह दिवस मनाया जाएगा. इसी कड़ी में डॉक्टरों ने हेल्थ से जुड़े कुछ मिथक के बारे में बताया है. डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया, सुनी-सुनाई बातों या घरेलू सलाह की बजाय सही मेडिकल जानकारी पर भरोसा करना चाहिए. ऐसे में आपको इन मिथक के बारे में जानना जरूरी है. 

मिथक 1: थोड़ी मात्रा में शराब पीना सेहत के लिए खराब नहीं होता है

सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि शराब को लेकर आज भी सबसे बड़ा मिथक यही है कि यह कम मात्रा में पीने से नुकसान नहीं करती है, लेकिन ऐसा नहीं है.  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी कह चुका है कि शराब की कोई भी मात्रा पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती. शराब सबसे पहले लिवर को नुकसान पहुंचाती है.  लंबे समय तक सेवन करने पर फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस और यहां तक कि लिवर फेल होने का खतरा भी बढ़ सकता है.

मिथक 2: मानसिक तनाव कोई बीमारी नहीं है

कई लोग आज भी मानसिक तनाव, चिंता या लगातार घबराहट को सिर्फ सोचने की आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यह सोच गलत है. लगातार तनाव और एंग्जायटी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं, जो हाई ब्लड प्रेशर, नींद की कमी, डिप्रेशन और दिल की बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकती हैं. अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे तो विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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मिथक 3: कभी-कभार बीड़ी, सिगरेट या हुक्का पीने से नुकसान नहीं होता

डॉ. जुगल बताते हैं कि कई मरीज यह तर्क देते हैं कि उनके परिवार में लोग वर्षों तक धूम्रपान करते रहे और उन्हें कुछ नहीं हुआ, लेकिन यह वैज्ञानिक तथ्य नहीं है. सैकड़ों रिसर्च में साबित हो चुका है कि तंबाकू का कोई भी रूप सुरक्षित नहीं है. चाहे बीड़ी हो, सिगरेट या हुक्का, इनसे कैंसर, हार्ट अटैक और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

मिथक- 4 : मीठा खाने से डायबिटीज होती है

डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि आजकल लोगों में मीठा छोड़ने का एक ट्रेंड चल रहा है. उनका मानना है कि मीठा खाने से डायबिटीज हो जाती है, लेकिन मीठे और डायबिटीज का कोई सीधा संबंध नहीं है, हां ये है कि अगर आप ज्यादा मात्रा में मीठा खाते हैं और उससे वजन बढ़ता है तो डायबिटीज का रिस्क हो सकता है, लेकिन अगर आप सीमित मात्रा में मीठा खाते हैं तो इससे डायबिटीज नहीं होती है.  

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मिथक- 5: एंटीबायोटिक दवा से कोई नुकसान नहीं होता है

डॉ सुभाष कहते हैं कि अब लोग पहले की तुलना में ज्यादा एंटीबायोटिक खाने लगे हैं. बुखार हो या कोई इंफेक्शन लोग इन दवाओं को खुद से लाकर खा लेते हैं, लेकिन यह ठीक नहीं है. कई मामलों में संक्रमण वायरस के कारण होता है. इसमें  एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं. बिना डॉक्टर की सलाह बार-बार एंटीबायोटिक लेने से दवाओं का असर कम होने (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) का खतरा बढ़ जाता है. इस वजह से होता यह है कि कुछ समय बाद ये दवाएं शरीर पर असर नहीं करती हैं. 
 

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