डेंगू का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं. आम तौर पर यह माना जाता है कि कमजोर या पहले से बीमार लोगों को ही गंभीर डेंगू होता है, लेकिन अगर आप यह सोचते हैं कि युवा और पूरी तरह फिट (फिजिकली फिट) लोग इससे सुरक्षित हैं, तो यह आपकी बहुत बड़ी भूल है!
आजतक हेल्थ वेल्थ समिट के बेहद महत्वपूर्ण सत्र 'ऑपरेशन ऑल आउट' में प्रसिद्ध विशेषज्ञ प्रो. डॉ. संजीव बगाई और डॉ. सुशीला कटारिया ने डेंगू के लक्षणों, जटिलताओं, वैक्सीन और बचाव के उपायों पर खुलकर चर्चा की. आइए जानते हैं कि इस सत्र में डॉक्टरों ने डेंगू को लेकर कौन-कौन सी बड़ी और बेहद जरूरी बातें बताईं.
युवा और फिट लोग भी हो सकते हैं गंभीर डेंगू का शिकार
डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि गंभीर डेंगू किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है, यहां तक कि उन युवाओं को भी जिन्हें कोई पुरानी बीमारी नहीं है. डॉ. सुशीला कटारिया ने डेंगू के बेहद अनिश्चित स्वभाव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें बहुत तेजी से कॉम्प्लिकेशंस पैदा हो सकते हैं.
डेंगू का सबसे खतरनाक दौर तब शुरू होता है जब बुखार उतर जाता है. इस दौरान प्लेटलेट काउंट तेजी से गिर सकता है और प्लाज्मा लीकेज जैसी गंभीर समस्या हो सकती है. यदि पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, ब्लीडिंग या अत्यधिक सुस्ती जैसे चेतावनी संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.
इन नुस्खों और दवाइयों से तौबा कीजिए!
आम तौर पर डेंगू होने पर लोग तरह-तरह के घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं या खुद से दवाइयां खाने लगते हैं. डॉक्टरों ने इसे लेकर कड़ी हिदायत दी है. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक दवाइयां (जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन और निमेसुलाइड) बिल्कुल न लें.
डॉक्टरों ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें कहा जाता है कि पपीते के पत्ते का जूस, करेले का जूस या बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं. इन सबका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसके बजाय, पर्याप्त मात्रा में हाइड्रेशन (पानी और तरल पदार्थ), पूरा आराम और लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग पर ध्यान दें.
डेंगू वैक्सीन और मच्छर नियंत्रण पर क्या बोले विशेषज्ञ?
वैक्सीनेशन: टीकाकरण पर बात करते हुए डॉ. संजीव बगाई ने क्लीनिकल एविडेंस और लंबी अवधि की सुरक्षा को लेकर कुछ चिंताएं जताईं. वहीं, डॉ. कटारिया ने जोर देकर कहा कि वैक्सीन सुरक्षा की एक एडिशनल लेयर है, लेकिन यह मच्छर नियंत्रण का विकल्प नहीं हो सकती.
ऑपरेशन ऑल आउट: डॉक्टरों ने वाराणसी के पास पंडितपुर में चलाए गए 'ऑपरेशन ऑल आउट' अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि डेंगू से निपटने के लिए सालभर मच्छर नियंत्रण, जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी की बहुत जरूरत है.
डॉक्टरों का सीधा और स्पष्ट संदेश यही है कि डेंगू को हल्के में बिल्कुल न लें. फिट होने का मतलब यह नहीं है कि आप डेंगू के गंभीर प्रभावों से सुरक्षित हैं. सही समय पर आराम, हाइड्रेशन और डॉक्टर की निगरानी ही इस बीमारी से बचने का सबसे पक्का रास्ता है.