ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) दिल्ली सिर्फ एक अस्पताल या इमारत भर नहीं है, बल्कि यह समर्पण, निष्ठा और 'मरीज सबसे पहले' (पेशेंट फर्स्ट) की भावना पर टिकी एक संस्कृति है.
आजतक हेल्थ वेल्थ समिट के बेहद खास सेशन ‘AIIMS: नाम ही काफी है’ में एम्स दिल्ली के दो दिग्गजों कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राकेश यादव और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेज की प्रमुख व प्रोफेसर डॉ. राधिका टंडन ने हिस्सा लिया.
इस दौरान दोनों डॉक्टरों ने एम्स की सफलता के राज, डॉक्टरों के सामने आने वाली चुनौतियों और देश भर के अन्य नए एम्स संस्थानों को मजबूत करने की जरूरत पर विस्तार से बात की. आइए जानते हैं इस सत्र में एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने क्या कहा.
'एम्स का मतलब बिना व्यावसायिक स्वार्थ के इलाज पर अटूट भरोसा'
एम्स की साख पर बोलते हुए डॉ. राकेश यादव ने कहा कि एम्स सिर्फ एक नाम या कोई बड़ी इमारत नहीं है, यह एक संस्कृति (कल्चर) है. यह डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल छात्रों के दशकों के समर्पण से बनी है. उन्होंने कहा कि देश भर के मरीज एम्स पर इसलिए आंख बंद करके भरोसा करते हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास होता है कि यहां बिना किसी कमर्शियल या व्यावसायिक स्वार्थ के उनका सबसे सही इलाज होगा.
डॉक्टरों पर बढ़ते दबाव पर बात करते हुए डॉ. यादव ने स्वीकार किया कि जब किसी डॉक्टर का नाम बनता है, तो काम के घंटे निश्चित नहीं रह जाते. डॉक्टरों को मरीज की देखभाल के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ती हैं. उन्होंने मरीजों से अपील की कि सामान्य बीमारियों के लिए एम्स दिल्ली की इमरजेंसी में भीड़ लगाने के बजाय अपने आसपास के अस्पतालों में भी इलाज कराना चाहिए.
एम्स का 70 साल का सफर
डॉ. राधिका टंडन ने एम्स के इतिहास को याद करते हुए बताया कि इसकी शुरुआत साल 1956 में देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर के दूरदर्शी दृष्टिकोण से हुई थी. उन्होंने बताया कि उस दौर में भारतीयों को उच्च चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञता के लिए विदेशों में जाना पड़ता था. एम्स की स्थापना देश में ही विश्वस्तरीय मेडिकल ट्रेनिंग और रिसर्च विकसित करने के लिए की गई थी.
डॉ. टंडन ने कहा कि एम्स की सात दशकों की प्रतिष्ठा अनुसंधान (Research), नवाचार (Innovation) और शिक्षकों के समर्पण का नतीजा है. एम्स में डॉक्टर बिना किसी झिझक के एक-दूसरे के विभागों से सलाह लेते हैं, ताकि मरीज को सबसे बेहतरीन इलाज मिल सके.
'देश के अन्य नए एम्स को मजबूत करना बेहद जरूरी'
सत्र के दौरान दोनों विशेषज्ञों ने देश में खुले नए एम्स संस्थानों के विकास पर जोर दिया. डॉ. राधिका टंडन ने कहा कि देश भर में खुले नए एम्स संस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक उपकरणों और डॉक्टरों की विशेषज्ञता के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
उन्होंने सलाह दी कि मरीजों को सबसे पहले अपने नजदीकी एम्स में जाना चाहिए. केवल बहुत गंभीर मामलों में ही जब जरूरी हो, तभी दिल्ली एम्स के लिए रेफरल लेना चाहिए. इससे मरीजों को उनके घर के पास ही बेहतर इलाज मिलेगा और दिल्ली एम्स पर मरीजों का अत्यधिक बोझ कम हो सकेगा.
एम्स दिल्ली के डॉक्टरों का साफ संदेश था कि एम्स की पहचान उसकी मशीनों से नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति उसकी निष्ठा और सेवा भावना से है. देश के स्वास्थ्य ढांचे को बेहतर बनाने के लिए क्षेत्रीय एम्स को मजबूत करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है.