वायु प्रदूषण बढ़ने पर आमतौर पर लोगों में फेफड़ों, सांस और दिल से संबंधित बीमारियां बढ़ जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खराब हवा का असर लिवर पर भी हो रहा है. जर्नल Nanotoxicology में प्रकाशित एक रिसर्च में ये जानकारी मिली है. इस रिसर्च में एक मेटा-एनालिसिस में 46 रिसर्च पेपर के नतीजों का आकलन किया गया, इसमें पाया गया कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने का संबंध लिवर एंजाइम के लेवल में बदलाव और मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी के बढ़े हुए रिस्क से जुड़ा हुआ है.
प्रदूषण और लिवर का क्या है कनेक्शन?
रिसर्च में बताया गया है कि प्रदूषण में मौजूद छोटे -छोटे कण सांस के जरिए शरीर में जाते हैं. इनके संपर्क से शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और सूजन जैसे प्रोसेस पर असर पड़ता है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि प्रदूषण के संपर्क में आने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को लिवर की बीमारी हो जाएगी, लेकिन ये रिस्क को बढ़ा सकती है.
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क्या कहती है नई रिसर्च?
रिसर्च में PM2.5 के जाने स शरीर में ALT से लेकर SGPT जैसे मार्कर बढ़े मिले हैं. रिसर्च में वायु प्रदूषण और लिवर कैंसर के रिस्क के बीच भी संबंध देखा गया. हालांकि, यह रिसर्च अभी शुरुआती लेवल पर है, लेकिन इसने बताया है कि प्रदूषण का असर लिवर पर भी हो रहा है. ऐसे में इससे बचाव की जरूरत है. इससे कुछ लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है. खासतौर पर जिन इलाकों में पॉल्यूशन का लेवल खराब श्रेणी में है तो वहां प्रदूषण से बचना जरूरी है.
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किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?
जिन लोगों को पहले से टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा या मेटाबॉलिक समस्याएं हैं, उन्हें अपनी लिवर हेल्थ पर विशेष ध्यान देना चाहिए.लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोगों के लिए भी वायु प्रदूषण से बचाव जरूरी है.हालांकि, अभी यह तय करने के लिए पूरे प्रमाण नहीं हैं कि किसी व्यक्ति को सिर्फ प्रदूषण के संपर्क के कारण कितने अंतराल पर लिवर की जांच करानी चाहिए.