
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 20 जुलाई के ‘संसद मार्च’ के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए. इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला अपने कंधे और इसके निचले हिस्से पर मौजूद जख्म के निशान दिखाती हुई नजर आ रही है.
कुछ लोगों का कहना है कि ये महिला जंतर मंतर के प्रदर्शन में शामिल होने गई थी, जहां उपद्रवियों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की.

वीडियो को शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, 'जंतर मंतर पर सरकार के द्वारा जो गुंडे भेजे जा रहे थे वो महिलाओं को भी नहीं छोड़ रहे है. सबूत देख लीजिए. इसे कोई दलाल मीडिया नहीं दिखाएगा ऐसे हालात.'
कुछ यूजर्स ने तो इस वीडियो को ये कहकर भी शेयर किया कि इसमें नजर आ रही महिला, उनकी दोस्त है, जिसके साथ दिल्ली पुलिस के डीआईजी ने ऐसा बर्ताव किया है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये महिला कंबोडिया की रहने वाली है और उसके शरीर पर दिख रहे निशान, वहां इलाज के लिए अपनाए जाने वाले, एक पारंपरिक नुस्खे की वजह से बने हैं.
कैसे पता की सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये 16 अप्रैल के एक इंस्टाग्राम पोस्ट में मिला. इससे इतनी बात तो यहीं साफ हो गई कि इस वीडियो का सीजेपी के आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का धरना 6 जून से शुरु हुआ था, और ये वीडियो इससे पहले से इंटरनेट पर मौजूद है.

रिवर्स सर्च से ही हमें इस वीडियो का असली वर्जन भी मिल गया. इसे ‘tolakity’ नाम की कंबोडियन इंस्टाग्राम यूजर ने 10 जनवरी को शेयर किया था. कंबोडियाई भाषा में लिखे कैप्शन के मुताबिक वो उस वक्त बीमार थीं.

इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में उन्होंने खुद बताया था कि उन्हें किसी ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था. उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, और सर्दी हो गई थी. कंबोडिया में ये इलाज का एक पारंपरिक तरीका है, जिसे 'स्क्रैचिंग द विंड' कहते हैं, ताकि तबीयत जल्द ठीक हो सके.
इसके अलावा उन्होंने एक और पोस्ट शेयर किया था, जिसमें उनकी पीठ पर भी बिल्कुल इसी तरह के निशान नजर आ रहे थे. इस वीडियो में वो काढ़े जैसी कोई चीज पीते हुए भी दिखाई दे रही हैं.
क्या होता है 'स्क्रेचिंग द विंड'?
‘स्क्रेचिंग द विंड’ दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनाए जाने वाला एक पुराना घरेलू नुस्खा है. इसका इस्तेमाल सर्दी, जुकाम, बुखार और बदन दर्द के इलाज के लिए किया जाता है. इसे कंबोडिया और वियतनाम में 'खाओ गिओ' भी कहते हैं.
इसमें सबसे पहले त्वचा पर बाम या तेल लगाया जाता है, फिर सिक्के या चम्मच जैसी किसी चिकनी चीज से सीने, पीठ या गर्दन पर बार-बार घिसते हैं. ऐसा करने से त्वचा के अंदर की बारीक रक्त वाहिकाएं टूट जाती हैं, जिससे लाल या बैंगनी रंग के निशान पड़ जाते हैं. वहां के लोगों का मानना है कि इससे शरीर के अंदर फंसी ‘बुरी हवा' या ‘नकारात्मक ऊर्जा’ बाहर निकल जाती है और मरीज को आराम मिलता है.
कुल मिलाकर साफ है कि कंबोडिया की एक महिला के इलाज से जुड़े वीडियो को गलत तरीके से जंतर-मंतर के आंदोलन से जोड़कर शेयर किया जा रहा है.