आध्यात्मिक गुरु और स्वयं को देवी का अवतार बताने वाली राधे मां का विवादों से पुराना नाता है. राधे मां पर लोगों से पैसा लेना का आरोप भी लगता आया है. सालों बाद राधे मां ने निजी जिंदगी और उन पर लगे आरोपों पर बात की है. उन्होंने ये भी कहा कि वो संत नहीं हैं और ना ही उन्होंने कभी संत होने का दावा किया.
संत नहीं हैं राधे मां
राधे मां से पूछा गया कि आप बाकी गुरूओं से बहुत अलग हैं. ऐसा क्यों? नयनदीप रक्षित संग बातचीत में उन्होंने कहा- मैंने कभी नहीं कहा कि मैं संत हूं. मैं राधे हूं, दूसरों को राह दिखाने वाली. मेरे पास जो भी आया है. वो कभी खाली हाथ नहीं गया. मेरे भक्तों को शौक है, मेरा श्रृंगार करने का तो मैं इसलिए श्रृंगार करती हूं. मैंने कभी ये मेंशन नहीं किया कि मैं संत हूं, साधु हूं. एक ही जीवन मिला है. मैं इसे जीना चाहती हूं.
उन्होंने कहा कि मैं शादीशुदा हूं. मेरे बच्चे चाहते हैं कि मैं श्रृंगार करूं. मुझे बहुत बुरा लगा, जब मेरे बारे में खबरें छपीं कि मैं पैसा लेती हूं. जबकि मैंने कभी किसी से एक रुपये नहीं मांगा. लोग मुझसे नेचुरली जुड़ते हैं. अब जिसको 13 साल से बच्चा नहीं हो रहा है और मुझसे जुड़ने के बाद बच्चा हुआ. वो पैसा चढ़ाएगा ही ना. जिसका बिजनेस 10 साल से रुका हुआ है. वो चढ़ाएगा ही. इसमें मेरा क्या कसूर है. मैंने नहीं मांगा उससे. एक बंदा खड़ा होकर कह दे कि मैंने इससे पैसा मांगा. अगर कोई अपने मन से पैसा दे रहा है, मैं थोड़े ही बोलूंगी कि मुझे पैसा नहीं लेना है. अब अगर आपको कोई गिफ्ट दे या पैसे चढ़ाए, तो आप उसे मना करोगे.
राधे मां कहती हैं कि धर्म इंसान ने बनाया है और भक्ति भगवान ने बनाई है. मेरे पास हर धर्म के लोग आते हैं. मैं किसी में फर्क नहीं समझती. सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है. इंसानियत बहुत जरूरी है. क्या आपको लगता है कि आज के जमाने में इंसानियत कम हो रही है. उन्होंने कहा कि हां कम हो रही है. लोग पैसे के पीछे ज्यादा हैं. लोग पैसे के पीछे दौड़ रहे हैं. हाय... हाय... ज्यादा है. अगर ये छोड़कर प्रभु के पीछे दौड़े, तो सब कुछ मिलेगा.
मैं फन लविंग हूं. मैं भगवान को गाना गाकर भी सुनाती हूं और म्यूजिक चला कर भी सुनाती हूं. राधे मां कहती हैं कि जब उन्हें लेकर कंट्रोवर्सी हुई, तब वो तीन साल तक डिप्रेशन में रहीं. इलाज के बाद उनका डिप्रेशन ठीक हुआ.