नेटफ्लिक्स खोलते ही नई फिल्मों और सीरीज की लंबी लिस्ट सामने आ जाती है. लेकिन कई बार इतना सब होने के बाद भी मन कुछ नया देखने का नहीं करता. ऐसे में जेन जी अपनी वही पुरानी फेवरेट सीरीज लगा लेती है, जिसके डायलॉग तक उन्हें याद हैं. कभी ‘फ्रेंड्स’ तो कभी बचपन के कार्टून. सवाल है कि जब देखने के लिए इतना कुछ है, तो बार-बार वही पुराना कंटेंट क्यों?
क्या होता है कम्फर्ट कंटेंट?
ऐसे शो, फिल्में या वीडियो जिन्हें देखकर अच्छा महसूस हो और जो मन को सुकून दें, उन्हें कम्फर्ट कंटेंट कहा जाता है. ये कोई नई फिल्म या सीरीज ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार पुराना शो भी आपका मूड बेहतर कर सकता है. इसके किरदार जाने-पहचाने होते हैं और कहानी में आगे क्या होने वाला है, ये भी पता होता है. ऐसे में कुछ नया समझने या कहानी के साथ तालमेल बैठाने की जरूरत नहीं पड़ती.
नई कहानी से ज्यादा पुरानी सीरीज में सुकून क्यों?
नई सीरीज देखने पर मन में उत्सुकता रहती है कि आगे क्या होगा. वहीं, पुरानी सीरीज देखते टाइम ये चिंता नहीं रहती. आपको पता होता है कि कौन-सा किरदार क्या करेगा और कौन-सा सीन हंसाएगा. क्लीवलैंड क्लिनिक की एक रिपोर्ट में मनोवैज्ञानिक ने बताया कि लोग अपनी पसंदीदा सीरीज इसलिए भी देखते हैं, क्योंकि इससे उन्हें रोजमर्रा की परेशानियों से कुछ देर का ब्रेक मिलता है.
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पुरानी यादों से भी है कनेक्शन
जेन जी के लिए बचपन के कार्टून, पुराने टीवी शो और पहले देखी गई फिल्में सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं हैं. इनसे बचपन की यादें भी जुड़ी हो सकती हैं. UCLA के सेंटर फॉर स्कॉलर्स और स्टोरीटेलर्स की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 से 24 साल के युवाओं में 55.3 % ने पुराने शो देखने की बात कही. ये सर्वे अमेरिका में किया गया था.
क्या बार-बार वही देखना गलत है?
ऐसा करना अपने आप में गलत नहीं है. कई बार थकान के बाद पसंदीदा शो देखना आराम करने का एक आसान तरीका हो सकता है. लेकिन अगर इसकी वजह से जरूरी काम छूटने लगें या रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ने लगे, तो अपनी आदत पर ध्यान देना जरूरी है.