मुंबई में गणपति उत्सव शुरू होते ही शहर की तस्वीर बदल जाती है. सड़कों पर भीड़ बढ़ती है, पंडाल सजते हैं, ढोल-ताशे गूंजते हैं और हर तरफ बप्पा के स्वागत की तैयारियां दिखाई देती हैं और इसी के साथ उमड़ता है लालबागचा राजा के दर्शन को उमड़ते बॉलीवुड सितारों का हुजूम. इस साल भी शाहरुख खान से लेकर रणवीर, शिल्पा शेट्टी, रितेश देशमुख-जेनेलिया और सिद्धार्थ मल्होत्रा समेत कई सितारे लालबागचा राजा के दरबार में नजर आए. पर क्या आपने कभी सोचा है कि गणपति और बॉलीवुड का यह रिश्ता इतना गहरा क्यों है?
इसका जवाब सोशल मीडिया पर ढूंढना शायद इस पूरे रिश्ते को बहुत छोटा कर देना होगा. बॉलीवुड और मुंबई का रिश्ता सिर्फ काम का नहीं है. यह इंडस्ट्री जिस शहर में दशकों से पली-बढ़ी, उसी शहर के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सवों में गणपति उत्सव की अपनी अलग जगह है इसलिए फिल्मी सितारों का बप्पा के सामने पहुंचना एक तरफ निजी आस्था और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा हो सकता है, तो दूसरी तरफ वह उन्हें उस शहर की सामूहिक संस्कृति से जोड़ता भी है, जिसने उन्हें स्टार बनाया. इसका सबसे बड़ा उदाहरण लालबागचा राजा है.
दिलचस्प बात यह है कि इसकी कहानी किसी सेलिब्रिटी या ग्लैमर से शुरू नहीं हुई थी. 1930 के दशक में लालबाग इलाके के बाजार और वहां की रोजी-रोटी से जुड़ी परेशानियों के बीच इस गणपति की परंपरा बनी. आज वही लालबागचा राजा मुंबई की पहचान वाली गणपति परंपराओं में शामिल है और यहां आम भक्तों के साथ सेलिब्रिटी भी पहुंचते हैं यानी जिस जगह की शुरुआत स्थानीय लोगों की आस्था और सामुदायिक जरूरतों से हुई थी, वह समय के साथ मुंबई की ऐसी सार्वजनिक सांस्कृतिक जगह बन गई जहां शहर के अलग-अलग वर्ग एक साथ दिखाई देते हैं.

यहीं से बॉलीवुड की मौजूदगी का दूसरा पहलू सामने आता है. स्टार को स्टार बनाए रखने के लिए सिर्फ फिल्म का पर्दा काफी नहीं होता. आज का सेलिब्रिटी लगातार लोगों की नजर में रहता है. फिल्म के प्रमोशन में, एयरपोर्ट पर, सोशल मीडिया पर, फैशन इवेंट में और पब्लिक अपीयरेंस में लेकिन इन तमाम जगहों पर स्टार अक्सर एक तय छवि के साथ दिखाई देता है. गणपति का पंडाल उस छवि से थोड़ा अलग दिखाई देता है. यहां वही अभिनेता परिवार के साथ पूजा करता दिख सकता है, आरती में शामिल होता है और हाथ जोड़कर खड़ा होता है. शाहरुख खान का लालबागचा राजा जाना इसलिए सुर्खी बन जाता है क्योंकि यहां एक स्टार बाद में बप्पा का भक्त पहले है.
इसमें स्टार और मुंबईकर के बीच का फर्क कुछ देर के लिए धुंधला होता दिखाई देता है. यही गणपति की सार्वजनिक संस्कृति की ताकत है. बॉलीवुड का सुपरस्टार सालभर सुरक्षा घेरे में रहता है, उसके आसपास पहुंचना मुश्किल होता है लेकिन गणपति के दौरान वह उसी शहर की धार्मिक-सांस्कृतिक धारा में दिखाई देता है, जिसमें लाखों आम लोग भी शामिल होते हैं. निश्चित तौर पर सितारों की सुरक्षा और उनके लिए अलग व्यवस्थाएं रहती हैं, लेकिन प्रतीकात्मक तौर पर उनका बप्पा के दरबार में पहुंचना उन्हें जनता के उसी साझा उत्सव का हिस्सा बनाता है.

और यही वह जगह है जहां आस्था और स्टार पावर एक-दूसरे से जुड़ते हैं. किसी अभिनेता के लिए गणपति निजी विश्वास हो सकता है, लेकिन जब वह अभिनेता सार्वजनिक जगह पर पूजा करता है तो वह क्षण निजी नहीं रह जाता. कैमरे उसे रिकॉर्ड करते हैं, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, फैन पेज उन्हें शेयर करते हैं और अगले कुछ घंटों में वही दर्शन मनोरंजन की खबर बन जाते हैं यानी जिस क्षण में स्टार के लिए श्रद्धा हो सकती है, मीडिया और ऑडियंस के लिए वह एक सार्वजनिक सेलिब्रिटी मोमेंट भी बन जाता है .
गणपति उत्सव का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू परिवार है. पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड की पब्लिक इमेज में परिवार की मौजूदगी काफी महत्वपूर्ण हुई है. एक्टर या एक्ट्रेस अब अकेले नजर आने के बजाय पति-पत्नी, बच्चों या पूरे परिवार के साथ दिखाई देते हैं. इससे सेलिब्रिटी की छवि सिर्फ फिल्म स्टार की नहीं रहती, बल्कि वह एक पारिवारिक व्यक्ति के रूप में भी सामने आती है. हर साल अंबानी परिवार के गणपति उत्सव में भी यही तस्वीर दिखाई देती है. सलमान खान, रणबीर कपूर-आलिया भट्ट, करीना कपूर-सैफ अली खान, कटरीना कैफ-विक्की कौशल, कियारा आडवाणी-सिद्धार्थ मल्होत्रा समेत कई बड़े सितारे वहां पहुंचे.

अंबानी परिवार का आयोजन इस बदलाव को समझने के लिए खास उदाहरण है. यहां गणपति पूजा एक निजी धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर मुंबई के सबसे चर्चित सोशल गैदरिंग्स में से एक बन चुका है. फिल्म, बिजनेस और क्रिकेट की दुनिया के बड़े नाम एक ही जगह दिखाई देते हैं. ऐसे में गणपति उत्सव के भीतर एक नया सामाजिक नेटवर्क भी दिखाई देता है, जहां आस्था, परिवार, दोस्ती, इंडस्ट्री कनेक्शन और सार्वजनिक छवि एक ही फ्रेम में आ जाते हैं.
लेकिन इस पूरे चलन का एक दूसरा सवाल भी है. क्या सितारों की मौजूदगी ने गणपति उत्सव को ग्लैमराइज कर दिया है? इसका जवाब सीधा हां या ना नहीं हो सकता क्योंकि मुंबई का गणपति उत्सव खुद इतना बड़ा और सार्वजनिक सांस्कृतिक आयोजन है कि उसमें राजनीति, कारोबार, सिनेमा, क्रिकेट और आम जनता सभी की मौजूदगी स्वाभाविक रूप से दिखाई देती है. हां, सेलिब्रिटी की मौजूदगी मीडिया का ध्यान जरूर अपनी ओर खींचती है. यही वजह है कि लाखों लोगों की आस्था वाले उत्सव की कवरेज में भी अक्सर यह सवाल प्रमुख हो जाता है कि आज कौन-कौन से सितारे बप्पा के दरबार में पहुंचे.

और शायद यही इस पूरे रिश्ते का सबसे दिलचस्प विरोधाभास है. गणपति उत्सव सितारों को आम लोगों के बीच लाता है, लेकिन सितारों की मौजूदगी उसी उत्सव को सेलिब्रिटी इवेंट भी बना देती है. एक तरफ बप्पा के सामने स्टार की हैसियत गौण हो जाती है, दूसरी तरफ कैमरा उसी स्टार को केंद्र में ले आता है. बॉलीवुड के लिए यह सिर्फ बप्पा के दर्शन का अवसर नहीं, बल्कि उस शहर से अपना रिश्ता दोबारा दिखाने का मौका भी है जिसने उन्हें पहचान दी. दर्शकों के लिए यह उस चमकदार दुनिया के सितारों को कुछ पलों के लिए अपने ही शहर, अपने ही उत्सव और अपनी ही परंपरा के बीच देखने का मौका है.