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3 बच्चों की मां ने जीता 'पाकिस्तान आइडल', पति-भाई ने जुटाए पैसे, मुश्किलों से पूरा हुआ सपना

फैसलाबाद की हीरा कैसर ने पाकिस्तान आइडल रियलिटी शो जीतकर संगीत जगत में अपनी पहचान बनाई है. तीन बच्चों की मां हीरा ने बिना किसी संगीत प्रशिक्षण के कठिन संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया.

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कौन हैं हीरा कैसर? (Photo: Social Media)
कौन हैं हीरा कैसर? (Photo: Social Media)

फैसलाबाद की हीरा कैसर ने रियलिटी शो 'पाकिस्तान आइडल' का खिताब अपने नाम कर लिया है. 28 साल की उम्र में हीरा ने सिंगिंग रियलिटी शो जीतकर बड़ी कामयाबी हासिल की है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी ये जर्नी आसान नहीं रही. उनके लिए यहां तक पहुंचना बिल्कुल सपने जैसा है. आइए हीरा कैसर की जर्नी पर नजर डालते हैं. 

हीरा कैसर का प्रेरणादायक सफर
हीरा कैसर फैसलाबाद में अपने तीन बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती थीं. वहां महिलाओं को बाहर जाने तक की इजाजत नहीं थी, गाना गाना तो दूर की बात थी. लेकिन रविवार को उन्होंने  'पाकिस्तान आइडल' का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया. हिना ने कभी संगीत की ट्रेनिंग नहीं ली थी. वो पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों से ऑडिशन देने पहुंचे हजारों प्रतियोगियों में शामिल थीं, लेकिन शो खत्म होने तक वो इस सीजन की विजेता बन चुकी थीं. उन्होंने अपने निजी सपने को पूरे देश के सामने एक बड़ी उपलब्धि में बदल दिया.

लोगों का दिल सिर्फ उनकी गायकी ने ही नहीं, बल्कि उनकी सादगी ने भी जीता. शो के जज बिलाल मकसूद ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, आपकी सादगी और आपके जॉगर्स, दोनों ही शानदार हैं. लेकिन ट्रॉफी और टेलीविजन की चमक-दमक से पहले हिना को अपने घर में ही विरोध का सामना करना पड़ा था. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि रियलिटी शो में हिस्सा लेने के लिए उन्हें अपने पति और भाई को मनाना पड़ा. परिवार की चिंता की वजह यह थी कि हिना तीन बच्चों की मां थीं, घर की जिम्मेदारियां संभालती थीं और आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं थी.

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हालांकि, जब उन्होंने लाहौर में ऑडिशन दिया तो परिवार का नजरिया बदल गया. हिना ने 2025 में जियो न्यूज से कहा था, किस्मत ने मेरे लिए रास्ते खोल दिए.

परिवार ने जुटाए पैसे 
उनके पति, बहन और भाई ने मिलकर पैसे जुटाए और उन्हें कराची भेजा. परिवार की ये छोटी-सी मदद आगे चलकर बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई. लाहौर ऑडिशन में हिना ने इतनी दमदार आवाज में गाया कि उन्हें उस एपिसोड का आखिरी गोल्डन माइक मिल गया. इसके साथ ही उन्होंने टॉप 16 में अपनी जगह बना ली.

हिना ने बाद में कहा- मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि मुझे गोल्डन माइक मिलेगा. ये पूरी तरह से भगवान की खास मेहरबानी थी. 

उनके परिवार वाले हमेशा से उनकी आवाज को प्राकृतिक तोहफा मानते थे. उनकी बहन का कहना था कि हिना की आवाज उन्हें खुदा की देन है. वहीं, उनके भाई ने कहा कि हिना की सफलता इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान अब उनके परिवार की प्रतिभा को पहचान रहा है.

इस कहानी में हिना के पिता की भी अहम भूमिका थी. वो अपनी बेटी को राष्ट्रीय मंच पर पहुंचते देखने से पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे. परिवार के मुताबिक, उनके पिता ने हिना को सुर और ताल की बुनियादी समझ दी थी. संगीत की यही अनौपचारिक शिक्षा आगे चलकर प्रतियोगिता में उनके काम आई. 

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शो में पहुंचने के बाद भी उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. हिना को बच्चों की देखभाल करने के साथ-साथ घर की जिम्मेदारियां भी निभानी थीं. लेकिन उनके पति और भाई-बहनों ने उनका लगातार साथ दिया. उन्हें उम्मीद थी कि हिना यह खिताब जीतकर घर लौटेंगी.

हिना के पति का भरोसा साफ था. उनका मानना था कि हिना पाकिस्तान आइडल बन सकती हैं. आखिरकार हिना ने यह साबित कर दिया और पाकिस्तान आइडल का खिताब अपने नाम कर लिया. 

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