छोटे बच्चों से पूछेंगे तो उन्हें मार्वल में अभी भी द इनक्रेडिबल हल्क पसंद आता है. विशालकाय, हरे रंग का तगड़ा सुपरहीरो जो अपने गुस्से और अपनी ताकत से किसी को भी खत्म कर सकता है. लेकिन आज जिस हल्क को दुनिया एक विशालकाय हरे और गुस्सैल सुपरहीरो के तौर पर जानती है, क्या आपको मालूम है कि वो कभी हरा था ही नहीं.
1962 में जब यह किरदार पहली बार कॉमिक बुक में आया, तब उसका रंग ग्रे रखा गया था. बाद में प्रिंटिंग की दिक्कत ने ऐसा मोड़ लिया कि हल्क हमेशा के लिए हरा हो गया.
कैसे बना था मार्वल का किरदार हल्क?
दरअसल किस्सा ये है कि मार्वल के राइटर स्टैन ली और आर्टिस्ट जैक कर्बी ने हल्क को ऐसा रूप देना चाहा था जो डरावना लगे, लेकिन किसी खास जाति या देश से जुड़ा न दिखे. इसी वजह से उन्होंने द इनक्रेडिबल हल्क #1 में उसके लिए ग्रे रंग चुना. लेकिन पहले अंक की छपाई में रंग एक जैसा नहीं रह पाया, और यहीं से हल्क के हरे होने की कहानी शुरू हुई.
जब भी द इनक्रेडिबल हल्क का जिक्र होता है, तो दिमाग में हरे रंग का गुस्से से भरा मॉन्स्टर आता है. ग्रीन गॉलाथ के नाम से मशहूर यह किरदार मार्वल की पहचान बन चुका है. लेकिन शुरुआत में उसे हरा बनाने का कोई प्लान नहीं था. अगर 1960 के दशक की प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी आज जैसी होती, तो हल्क शायद हरे रंग का नहीं बल्कि सलेटी रंग का होता.
स्टैन ली ने ग्रे रंग इसलिए चुना था क्योंकि वह किसी खास नस्ल या समूह की तरफ इशारा नहीं करना चाहते थे. उनके हिसाब से यह रंग गंभीर और रहस्यमयी भी लगता था. इसलिए पहली कॉमिक में हल्क की त्वचा ग्रे रखी गई. लेकिन जब पहली कॉमिक प्रेस से बाहर आई, तो बड़ी समस्या सामने आ गई.

प्रिंटर की एक गलती ने बदल दिया रंग
उस दौर की प्रिंटिंग मशीनें पूरी किताब में ग्रे का एक ही शेड बनाए रखने में सक्षम नहीं थीं. नतीजा यह हुआ कि एक पेज पर हल्क गहरा ग्रे दिखा, दूसरे पर हल्का सलेटी. कुछ जगह वह काला या धुंधला नजर आया. पहले अंक की कॉपियों में ग्रे और हरे जैसे कई अलग-अलग टोन दिखे. गलती से आए हरे शेड ने भी लोगों का ध्यान खींचा.
इसके बाद स्टैन ली ने प्रिंटर से पूछा कि कौन सा रंग मशीनों में सबसे साफ और बिना खराबी के छपेगा. उन्हें बताया गया कि हरा रंग सबसे आसानी से और साफ छपता है. इसके बाद उन्होंने तुरंत फैसला लिया और अगले इश्यू #2 से हल्क का रंग हरा कर दिया. बाद की कहानियों में भी इसी बदलाव को आगे बढ़ाया गया.
यह एक ऐसा संयोग साबित हुआ जिसने किरदार की पहचान ही बदल दी. 2008 की हल्क फिल्म ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर $263 मिलियन कमाए. वहीं, इस किरदार से शुरुआत से अब तक कुल कमाई एक बिलियन डॉलर से ज्यादा आंकी गई. इस तरह प्रिंटिंग की एक गड़बड़ी ने मार्वल को उसका सबसे मशहूर ग्रीन मॉन्स्टर दे दिया.
कुल मिलाकर, हल्क का हरा रंग किसी शुरुआती योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि 1962 की प्रिंटिंग दिक्कत का नतीजा था. स्टैन ली और जैक कर्बी ने उसे ग्रे बनाया था, लेकिन छपाई में आई गड़बड़ी के बाद हरे रंग को अपनाया गया. वही रंग आगे चलकर इस किरदार की सबसे बड़ी पहचान बन गया.

एक डॉक्टर कैसे बन गया सुपरहीरो?
हर किसी को मालूम है, जो शख्स हल्क बनता है उनका नाम डॉक्टर डेविड ब्रूस बैनर है, जो कि एमडी और पीएचडी, एक मशहूर वैज्ञानिक हैं और एवेंजर्स को बनाने वाले लोगों में से एक हैं. बायोकेमिस्ट्री, न्यूक्लियर फिजिक्स और गामा रेडिएशन पर उनके काम को काफी सम्मान मिला, जिसके बाद थैडियस रॉस ने उन्हें उस सुपर सोल्जर सीरम को फिर से बनाने का काम दिया, जिससे कैप्टन अमेरिका बना था.
रॉस ने बैनर को यह नहीं बताया कि वह क्या बना रहे हैं. प्रयोग के दौरान बैनर ने वीटा रेडिएशन की जगह गामा रेडिएशन का इस्तेमाल किया और सीरम खुद पर लगा लिया. इसके बाद उन्हें पता चला कि गुस्सा, उकसावे या बेहद उत्साहित होने पर उनका शरीर और दिमाग बदलकर हल्क नाम के एक विशाल, गुस्से से भरे और आदिम सोच वाले जीव में बदल जाता है.
इस नए खतरे ने रॉस को मजबूर किया कि वह बैनर को हल्क में बदलने और ब्लॉन्स्की से लड़ने की इजाजत दें. लड़ाई के बाद रॉस ने बैनर को भागने दिया. इस तरह एक मशहूर वैज्ञानिक की कहानी उस मोड़ पर पहुंची, जहां खुद पर किए गए प्रयोग ने उसे हल्क बना दिया, फिर पांच साल तक पीछा हुआ और आखिर में उसे एबोमिनेशन जैसे खतरे से लड़ना पड़ा.
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