लंबे इंतजार, कई बड़े शेड्यूल और देरी के बाद आखिरकार यश की मच अवेटेड फिल्म 'Toxic: A Fairytale for Grown-Ups' दस्तक दे चुकी है. 'KGF' के रॉकी भाई के बाद यश इस बार एक बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं. फिल्म की कमान गीतू मोहनदास ने संभाली है, यानी 3 घंटे 15 मिनट की A रेटेड वाली एक्शन और गैंगस्टर की इस दुनिया को एक महिला निर्देशक का नजरिया मिला है.
500 करोड़ रुपये से ज्यादा के बड़े बजट, पीरियड सेटिंग, खतरनाक एक्शन, रहस्यमयी किरदारों और यश के डबल रोल ने पहले ही फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट बढ़ा दी है. तो सवाल सीधा है- क्या 'टॉक्सिक' सिर्फ यश के स्टारडम पर टिकी फिल्म है या इसमें ऐसा कुछ है जो 'KGF' की यादों से आगे ले जाता है? आइए जानते हैं, कैसी है 'टॉक्सिक: अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स'. पढ़ें हमारा रिव्यू...
कैसा है फर्स्ट हाफ?
‘Toxic’ की शुरुआत कियारा आडवाणी यानी नादिया की एंट्री से होती है और पहला ही सीन दमदार असर छोड़ता है. राया के किरदार को जिस तरह से पेश किया गया है, उसमें स्वैग भी है और एक खतरनाक अंदाज भी.
लेकिन फर्स्ट हाफ आगे बढ़ते-बढ़ते कहानी से ज्यादा खून-खराबे का खेल बन जाता है. हाथ, मुंह, पैर... जहां जगह मिली, वहीं से गोलियां चलती नजर आती हैं. एक्शन भरपूर है, लेकिन लगातार हिंसा के बीच कहानी का इमोशनल हिस्सा कहीं दबता हुआ महसूस होता है.
फिल्म के फर्स्ट हाफ का स्क्रीनटाइम मोटे तौर पर दो हिस्सों में बंटा नजर आता है- या तो जबरदस्त रोमांस है या फिर जमकर खून-खराबा. राया और नादिया की लव स्टोरी को जिस तरह आगे बढ़ाया गया है, उसमें यश कई जगहों पर ऐसी चीज़ी और चाशनी में डूबी लाइनें बोलते दिखते हैं, जो उनके खतरनाक गैंगस्टर वाले अंदाज से थोड़ा अलग बैठती हैं.
सबसे बड़ी दिक्कत यहां राया और उसकी बहन गंगा के रिश्ते की लगती है. जिस बहन को राया की जिंदगी की ‘बैकबोन’ बताया गया है, वही रिश्ता उसकी लव स्टोरी के बिल्डअप में कहीं पीछे छूटता दिखता है. यानी भाई-बहन का मजबूत बॉन्ड धीरे-धीरे राया की मोहब्बत की कहानी के आगे बली चढ़ता हुआ महसूस होता है.
फिल्म लगातार अपने बड़े खुलासों और कहानी के बिल्डअप की तरफ बढ़ती रहती है, लेकिन इसी चक्कर में वह वह हाइप पैदा नहीं कर पाती जिसकी उम्मीद की जा रही थी. तमाम स्टाइल, एक्शन और यश के स्वैग के बावजूद फर्स्ट हाफ में कहानी पकड़ बनाने के बजाय कई जगह खींचती हुई लगती है.
और फिर आता है इंटरवल, जो रोमांच बढ़ाने के बजाय थोड़ा इरिटेट करता है. ऐसा लगता है कि फिल्म काफी देर से किसी बड़े धमाके की तैयारी कर रही थी, लेकिन इंटरवल तक वह धमाका उस स्तर का असर नहीं छोड़ पाता.
कुल मिलाकर, ‘Toxic’ का फर्स्ट हाफ स्टाइलिश तो है, लेकिन कहानी के स्तर पर बिखरा हुआ लगता है. कियारा की दमदार एंट्री और यश की शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के साथ शुरुआत उम्मीद जगाती है, मगर उसके बाद रोमांस और खून-खराबे के बीच फिल्म का इमोशनल कनेक्शन कमजोर पड़ता जाता है. अब असली सवाल यही है कि सेकेंड हाफ इस पूरे बिल्डअप को कोई ठोस वजह और दमदार अंजाम दे पाता है या नहीं.
सेकंड हाफ कैसा है, ये जानने के लिए थोड़ा इंतजार करें.