गीतू मोहनदास (Geetu Mohandas) भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी अलग सोच, संवेदनशील दृष्टि और अंतरराष्ट्रीय पहचान के जरिए देश का नाम वैश्विक मंच पर रोशन किया है. वह एक अभिनेत्री, निर्देशक, पटकथा लेखिका और निर्माता के रूप में जानी जाती हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान एक सशक्त स्वतंत्र फिल्मकार की है.
गीतू मोहनदास का जन्म 30 मार्च 1972 को केरल में हुआ. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी. 1980 के दशक में उन्होंने मलयालम सिनेमा की कई चर्चित फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें यथ्रा, ओननम और नाखाक्षथंगल जैसी फिल्में शामिल हैं. बतौर अभिनेत्री उन्हें आलोचकों और दर्शकों से खूब सराहना मिली, लेकिन समय के साथ उनका रुझान निर्देशन और लेखन की ओर बढ़ता गया.
निर्देशक के रूप में गीतू मोहनदास ने सामाजिक यथार्थ और मानवीय भावनाओं को केंद्र में रखते हुए फिल्मों का निर्माण किया. उनकी पहली फीचर फिल्म लायर का डॉटर्स (2009) ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई. यह फिल्म एक महिला और उसकी बेटियों की संघर्षपूर्ण जिंदगी को बेहद संवेदनशील तरीके से दर्शाती है. इसके बाद आई फिल्म मूर्थी (2019) ने भी वैश्विक फिल्म समारोहों में खूब चर्चा बटोरी.
गीतू मोहनदास की फिल्मों की खासियत यह है कि वे मुख्यधारा की चकाचौंध से दूर रहकर यथार्थ, राजनीति, समाज और व्यक्ति के आंतरिक संघर्षों को सामने लाती हैं. उनकी कहानी कहने की शैली सरल, लेकिन प्रभावशाली होती है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है.
साल 2022 में उनकी फिल्म नानपकल नेरथु मायक्कम ने उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण समकालीन निर्देशकों की सूची में मजबूती से स्थापित कर दिया. इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी खूब सराहना मिली.